
Mumbai: देश में दवाइयों की कीमतें आसमान छूती नजर आती है। जिसका मुख्य कारण है, कंपनियों द्वारा दवाइयों के निर्माण के अधिकारों को खरीदना और उसके बाद भी फुटकर विक्रेताओं द्वारा उन दवाइयों को कई गुना अधिक दामों में बेचना जो की होता तो लिखे गई कीमत के अनुसार होती है, लेकिन थोक विक्रेताओं से दो गुनी तीन गुनी होती है।
जेसे आप अगर आपके शहर के दवा बाजार से कोई दवा 20 Ru की लेते हैं, तो वही दवा फुटकर वक्रता के पास 80 Ru की मिलती है, ये कीमत कंपनियों द्वारा ही निर्धारित किया जाता है। जिससे राहत दिलाने के लिए भारत में जेनेरिक दवाइयों की माँग तेजी से बढ़ रही है।
यह वो दवाइयों होती है, जिस पर किसी बड़ी कंपनी का कोई नियंत्रण नहीं होता। आज की हमारी कहानी भी इसी विषय पर है कि केसे एक 16 साल के लड़के के जेनेरिक आधार के विचार काम कीमतों में दवाइय मुहैया कराते हुए करोडों का कारोबार बना लिया है।
देश की नवरत्न कंपनियों की सूची में टाटा (TATA) भी शुमार है और टाटा समूह (TATA GROUP) के प्रमुख रतन नवल टाटा (Ratan Naval Tata) ने 18 वर्ष के एक युवा अर्जुन देशपांडे (Arjun Deshpande) की दवा विक्रय करने वाली कंपनी जेनेरिक आधार में आधी हिस्सेदारी खरीद ली है।
खास बात ये है कि दूसरी ऑनलाइन दवा (Online Medicine) विक्रय करने वाली कंपनी के तुलना में जेनेरिक आधार काफी सस्ते मूल्य पर दवाएं बेचती है। जेनेरिक आधार खुदरा दुकानदारों को बाजार से सस्ती दरों पर दवाएं बेचती है।
अर्जुन देशपांडे के हिसाब से टाटा समूह के मालिक रतन टाटा (Tata Group Owner Ratan Tata) ने नए इस प्रस्ताव को 3 से 4 महीने पहले ही अपने संज्ञान में ले लिया था। रतन टाटा, जेनेरिक आधार कंपनी के भागेदार बनना चाहते थे। साथ ही वे अर्जुन देशपांडे के उपदेशक भी बनने के इच्छुक थे। रतन टाटा और जेनेरिक आधार कंपनी एक दूसरे के सहभागी बनेंगे और इसकी औपचारिक घोषणा करना शेष है।
दो साल पहले शुरू हुई कंपनी
अर्जुन देशपांडे ने जेनेरिक आधार कंपनी (Generic Aadhar Company) की स्थापना दो वर्ष पूर्व की थी। तब वे केवल 16 वर्ष के थे और अब उनकी कंपनी हर साल 6 करोड़ रुपए के कारोबार (6 Crore Ru Business) का दावा करती है। अभी इनके कारोबार में और उछाल आने की भी संभावना है।
.@RNTata2000 joins hands as a business partner with 18 year old @arjundeshpande4 of Generic Aadhar. Generic Aadhar provides affordable medicines & supports single medical stores that face competition from online pharmacy. The venture has a B2B2C model@ShereenBhan @CNBCTV18News pic.twitter.com/PCQnRzieHY
— Young Turks (@CNBCYoungTurks) May 7, 2020
रतन टाटा ने जेनेरिक आधार कंपनी में निजी रूप से निवेश किया है। ये टाटा ग्रुप से नहीं जुड़ा है। रतन टाटा ने इसके पूर्व भी देश के कई बड़े स्टार्टअप में निवेश किया है, जिसमें ओला, पेटीएम, अर्बन लैडर, स्नैपडील, क्योरफिट, लेंसकार्ट और लाइब्रेट शुमार हैं।
प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल पर आधारित है
आपको बता दें कि जेनेरिक आधार लाभ साझेदारी मॉडल से चलती है। यह कंपनी अभी धीरे धीरे प्रगति कर रही है। मुंबई पुणे बेंगलुरू और ओड़िशा के तकरीबन 30 से ज्यादा रिटेलर 18 साल के युवा के इस कंपनी से जुड़े हुए हैं।
जेनेरिक आधार में फार्मिस्ट, आईटी इंजीनियर और मार्केटिंग को जोड़कर लगभग 55 कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि ये कंपनी नौजवान के लिए एक प्रेरणादायी के समान है, जिसने इतने कम वक़्त में ही रतन टाटा जैसे कारोबारी से हाथ मिला लिया है।
Ratan Tata funded Generic Aadhaar, a pharmacy chain selling low cost medicines, has launched a mobile app to take on competition from online pharmacies. pic.twitter.com/Z4XajUB58Q
— sanatanpath (@sanatanpath) October 27, 2021
अर्जुन देशपांडे ने बताया कि अगले एक वर्षा में एक हजार छोटे फ्रेंचाइजी खोलने की रणनीति बनाई गई है। अभी कंपनी मुख्य तौर पर डायबिटीज और हाइपरटेंशन की दवाओं की आपूर्ति करती है, लेकिन कंपनी के कहे अनुसार बहुत जल्द कम कीमतों पर कैंसर की दवाएं भी मिलेंगी।
अर्जुन ने कहा कि इस योजना से हमने देश में पालघर, पांडिचेरी, अहमदाबाद और नागपुर में चार ब्ल्यूएचओ-जीएमपी प्रमाणिन निर्माताओं के साथ टाइअप है। इसके सिवाय कैंसर की दवाएं क्रय करने के लिए हिमाचल प्रदेश के एक निर्माता से टाइअप किया जाएगा।
Business : Ratan Tata bought 50 percent stake in 18 year old Arjun Deshpande’s company Generic Aadhar which was started 2 years ago.#YuvaPress #Business #RatanTata #Tata #ArjunDeshpande #GenericAadhar pic.twitter.com/Vzf2QUSGmE
— YUVA PRESS (@YuvaPressNews) May 7, 2020
सरकार दवाओं के ऊंचे दामों में नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। गौरतलब हो कि देश में तकरीबन 80 प्रतिशत दवाएं ऐसी विक्रय जाती हैं, जिन दवाओं को देश की 50000 से ज्यादा कंपनियां बनाती हैं। आपको बता दें कि ये सभी कंपनियां तकरीबन 30 प्रतिशत मार्जिन चार्ज करती हैं, जिसमें 30 फीसदी में 20 फीसदी व्यापारी का और 10 फीसदी फुटकर विक्रेता का मार्जिन होता है।



