80 साल की उम्र में भी पीएचडी की उपाधि हासिल कर साबित कर दिया कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती

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Sasikala Rawal PhD
80-year-old Ujjain woman Sasikala Rawal completes PhD. Sasikala Rawal of Ujjain, who has been awarded a PhD in Sanskrit at the ripe age of 80.

Photo Credits: Twitter

Ujjain: जीवन में सबसे जरुरी चीज़ है शिक्षा और देश के हर नागरिक का शिक्षा का अधिकार है। एक शिक्षित व्यक्ति ज्यादा सही सोच सकता है और उसके सही मार्ग पर चलने की संभावना अधिक होती है। कुछ लोग मज़बूरी के चलते और विपरीत परिस्थितियों में शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते है और जीवन भर अशिक्षित ही रह जाते है। ऐसे में अगर उस व्यक्ति तो दुबारा शिक्षा पाने का अवसर मिले, तो उसे अपने हाँथ से जाने नहीं देना चाहिए।

जहां एक ओर अधिकांश लोग एक उम्र के बाद घर पर बेठ जाते हैं। वही कुछ लोग एसे भी है, जो वृद्धि अवस्था में जाने के बाद अपने सपने को पूरा कर रहे हैं। जिस प्रकार कुछ समय पहले राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक दादी गाड़ी दौड़ाते हुए दिखने एक बाद चर्चाओं का विषय बन गई है। आज का लेख भी एक एसी ही बुज़ुर्ग महिला के विषय में है।

उज्जैन की शशिकला रावल बनी प्रेरणा

उज्जैन (Ujjain) निवासी शशिकला रावल (Sasikala Rawal) राज्य सरकार के शिक्षा विभाग से व्याख्याता (Lecturer) के तौर पर सेवानिवृत्त (Retired) हुई। इसके बाद उन्होंने साल 2009 से 2011 के मध्य ज्योतिष विज्ञान (Astrology) से एमए किया।

शशिकला ने महर्षि पाणिनी विश्वविद्यालय (Maharishi Panini University) के पूर्व कुलपति (Vice Chancellor) डॉ. मिथिला प्रसाद त्रिपाठी (Dr Mithila Prasad Tripathi) के मार्गदर्शन में ‘वृहत संहिता के दर्पण में सामाजिक जीवन के बिंब’ विषय पर डॉक्टर ऑफ फिलासॉफी की डिग्री प्राप्त की।

जब 80 साल की महिला को डिग्री प्रदान की गई

80 साल महिला को डिग्री प्रदान करते समय राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल (Governor AnandiBen Patel) को सुखद आश्चर्य हुआ और उन्होंने महिला के हौसले की तारीफ की। शशिकला से जब प्रशन किया गया कि अधिकांश लोग इस आयु में आराम करते हैं।

मगर आपने पढ़ाई का मार्ग क्यों चुना, तो उन्होंने बताया की उनकी हमेशा ज्योतिष विज्ञान में दिलचस्पी रही है और इस कारण विक्रम विश्वविद्यालय (Vikram University) द्वारा प्रारम्भ किये गये ज्योतिर्विज्ञान विषय में एमए में दाखिला लिया। इसके बाद और पढ़ने का मन हुआ, तो वराहमिहिर की वृहत संहिता पढ़ी और इसी पर पीएचडी करने का खयाल आया।

ज्योतिष के माध्यम कई कार्य संभव

उन्होंने कहा कि ज्योतिष पढ़ने से उनके चिन्तन को अलग दिशा मिली है। ज्योतिष का जिंदगी में कुछ इस प्रकार का महत्व है, जैसे नक्शे की मदद से हम कहीं मंजिल पर पहुंचते हैं। ज्योतिष के माध्यम से जिन्दगी के आने वाले संकेतों को पढ़कर हम चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि जीवन में किस-किस प्रकार की समस्या आ सकती हैं और कहां तूफानों से गुजरना होगा, इसका पूर्व से आकलन कर लिया जाये तो जीवन बिताने में सरलता होती है। उनका कहना है कि अंधविश्वास करने की जगह ज्योतिषीय गणना के अनुसार मिलने वाले संकेतों को समझना चाहिये।

डॉ. शशिकला रावल (Dr Sasikala Rawal) का कहना हैं कि वे फलादेश और लोकप्रिय कार्यों की जगह पर जीवन में मूलभूत परिवर्तन की ओर जायदा ध्यान देती हैं और अपने ज्ञान का इस्तेमाल आलेख या संभाषण के माध्यम से जनहित में करना चाहेंगी।

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