गरीबी में माता-पिता के साथ खेतों में काम करने वाले अली बने मणिपुर के पहले IAS Officer

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Asker Ali IAS
Asker Ali is the first direct IAS Officer from his region. Asker Ali, the first IAS officer from a minority community in Manipur got 167 rank in UPSC exam 2015.

File Photo Credits: Asker Ali on Social Media

Manipur: जब कोई व्यक्ति बचपन मे अर्थिक स्थिति खराब होने के कारण जो समस्याएं देखता है, तो वह उस स्थिति को परिवर्तित करने का अंदर ही अंदर मन बना लेता है और चाहता है कि वह अपने माता पिता को एक अद्भुत भविष्य प्रदान करे, जिसके लिए वह तभी से कठिन परिश्रम करने मे जुट जाता है और अपने मेहनत और लगन से उस मुकाम को अखिरकार प्राप्त करे ही लेता है, आज का लेख भी इसी विषय पर आधारित है।

कौन है मणिपुर के लाल

मणिपुर (Manipur) के एक छोटे से समुदाय (Community) से निकल कर आईएएस ऑफिसर (IAS Officer) बनने तक का सफ़र तय करने वाले अस्कर अली (Asker Ali) की कहानी प्रेरणा (Inspirational Story) से भरी है। 2016 बैच के आईएएस अधिकारी अस्कर एक ऐसे मणिपुरी समुदाय से नाता रखते हैं, जो वर्षो से हासिये पर खड़ी है।

मीतेई-पंगल (Meetei-Pangal) नाम का यह समुदाय राज्य का जनसंख्या का मात्र आठ प्रतिशत है और शायद ही कभी किसी कारणो से मीडिया या लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा हो। सालो से अवहेलना का शिकार हुए, इस समुदाय को पहचान दिलाने के उद्देश्य से सस्कर अली ने बेहद कठिन परिश्रम की और आज केवल अपने समुदाय के समकक्ष ही नहीं, किंतु लाखों नौजवान के लिए प्रेरणा का कारण बनकर सामने आया हैं।

बचपन से था IAS बनने का सपना

हुमंस ऑफ़ एलबीएसएनएए नाम के एक फेसबुक पेज के साथ अपनी कहानी (Story) शेयर करते हुए बताया है कि जब मैं कक्षा 9 में था, तभी मेरे अन्दर आईएएस बनने का ख़्वाब जागृति हुआ। स्कूल के दौरान, मैं अपने माता-पिता के साथ खेतों में उनका हाथ बटाया करता था।

यहीं से मेरे भीतर कठिन परिश्रम करने की भावना उत्पन्न हुई। आईएएस के पद तक पहुँचने वाले मार्ग में कई मर्तबा ऐसे अवसर आए जब लोगों ने मेरे ख्वाबों पर संदेह किया, परंतु मेरी कठिन परिश्रम और जुनून ही था, जिसने मुझे हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

गरीबी से कभी हार नही मानी

दिल्ली यूनिवर्सिटी से भौतिकी में स्नातक करने के बाद उन्होंने यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) की तैयारी प्रारंभ की। आर्थिक स्थिति के कारण होने वाले समस्याओं के बावजूद भी उन्होंने अपनी तैयारी को जारी रखा और वर्ष 2016 में सफलता (Success) हासिल करने वाले अपने राज्य से पहले व्यक्ति बने।

अपने आईएएस अधिकारी बनने की कामयाबी को वह एक बड़ी सफलता मानते हैं, न केवल अपने लिए बल्कि पुरे समुदाय के लिए। उनका कहना है कि यह भले ही एक छोटी कामयाबी है, लेकिन यह दूसरों के लिए अनुसरण करने का एक मिसाल होगा।

शिक्षा कैसे सबकुछ परिवर्तित करने की ताकत रखती है और इंसान को एक बेहतर भविष्य की तरफ लेकर जाता है। उनका कहना है कि कोई अन्तर नहीं पड़ता कि आप कौन है और कहा से आये हैं। एक आईएएस के तौर पर आप केवल एक भारतीय हैं और आपको देश के लिए काम करना है।

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