वैज्ञानिकों ने जेनेटिकली मोडिफाइड गेहूं की खास प्रजाति विकसित की, कैंसर का खतरा घटाने की कोशिश

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Genetically modified Wheat News
Genetically modified wheat a reality around the world. Researchers have created a new genetically modified wheat variety that increases grain production by up to 12%.

Photo Credits: DD News on Twitter

Delhi: भारत विश्व में गेहूं (Wheat) का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश है केरल, मणिपुर व नागालैंड राज्यों के अलावा अन्य सभी राज्यों में इस की खेती (Farming) की जाती है यह प्रोटीन, विटामिन और कार्बोहाइड्रेटस का मुख स्त्रोत है और संतुलित अहार प्रदान करता है।

विश्व में उत्पादक होने वाली गेंहूं की पैदावार में भारत का योगदान लगभग 8.7 फीसदी है। उन्नत तकनीक से खेती करने पर सिंचित दशा में गेहूँ की बौनी प्रजाति से तकरीबन 50-60 क्विंटल दाना के साथ 80-90 क्विंटल भूसा प्रति हेक्टेयर प्राप्त होता है। जबकि देशी लम्बी प्रजातियों से इसकी तकरीबन आधी उपज हासिल होती है।

ब्रिटिश वैज्ञानिकों (British Scientist) ने कैंसर की संभावना को कम करने के लिए गेहूं (wheat) की नई प्रजाति विकसित की है। वैज्ञानिकों ने जीन एडिटिंग तकनीक से गेहूं की नई किस्म से एसपर्जिन नाम के अमीनो एसिड की मात्रा को घटा दिया है।

ब्रिस्टल विश्वविद्यालय (Bristol University) के वैज्ञानिक हर्टफोर्डशायर (Scientific Hertfordshire) में गेहूं की जेनेटिकली मोडिफाइड (Genetically Modified Variety) किस्म उगा रहे हैं। यह योजना पांच वर्षों तक चलेगा।

यह पहली मर्तबा है, जब जीन एडिटिंग तकनीक से यूके या यूरोप में गेहूं (Wheat) उगाया गया है। चीन और अमेरिका में ऐसा पहले हो चुका है। अब इस किस्म की खेती और गेंहू की वैराइटी को पूरे विश्व में अपनाया जा रहा है और भारत में भी इस किस्म को अपनाने और बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

अमीनो एसिड 90% कम

प्रो हाफोर्ड (Professor Hafford) कहते हैं, नई किस्म की जांच करने पर इसमें से एक्रेलामाइड की मात्रा दूसरे साधारण गेहूं की किस्म से 90 फीसदी तक कम था। नई किस्म से लोगों के खान-पान और पैकेज फूड से एक्रेलामाइड का खतरा कम होगा।

एसपर्जिन को हटाया जाता

शोधकर्ताओं के अनुसार जब सामान्य गेहूं से निर्मित ब्रेड को बेक्ड या रोस्ट किया जाता है, तो इसमें मौजूद एसपर्जिन कैंसर (Cancer) फैलाने वाले तत्व एक्रेलामाइड में बदल जाता है। यह कैंसर का कारण बन सकता है।

ऐसे में मानव के स्वस्थ को घ्यान में रखते हुए गेंहू की किस्म में कुछ बदलाव करके इसे सही बनाया गया है और इसे खाने या अन्न उपयोग में लाने से कोई हानि नहीं हो सकती है। अब इसे जोर शोर से अपनाया जा रहा है।

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