आंखों में रोशनी भले ही नहीं, फिर भी हिम्मत ना हारी, UPSC में 286वीं रैंक पाकर बनी IAS अधिकारी

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IAS Purana Sunthari story
Purana Sunthari from Tamil Nadu has secured 286th rank in UPSC. She Can't See But Cracked UPSC Exam Anyway. IAS Purana Sunthari success story.

Madurai: अगर आपने जीवन में कुछ करने की ठान लीया है, तो दिव्यांगता भी आड़े नहीं आ सकती। तमिलनाडु (Tamilnadu) की पूर्णा सुंदरी (IAS Purana Sunthari) ने इसे बात को सच कर दिखाया है। जानिए केसे सिर्फ किताबों को सुन उसने यूपीएससी की परीक्षा पास (UPSC Exam Cleared) की है।

पूर्णा सुंदरी (Purana Sunthari) जैसी लडकिया न सिर्फ परिवार, बल्‍क‍ि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा हैं। आंखों में रोशनी न होने (Blind) के बाद भी जिस तरह अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए जोश, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से उन्होंने सफलता पाई है, युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई हैं।

पूर्णा ने इस वर्ष यूपीएससी की परीक्षा में 286 वीं रैंक प्राप्त की है। बता दें कि 25 वर्षीय पूर्णा की आंखों की रोशनी नही हैं। तैयारी के दौरान उन्हें कई सारी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। जीवन की इन कठिनायों के आगे उन्होंने बहुत हिम्मत दिखाई और आगे बढ़ने की ठानी।

उन्होंने बताया कि उनकी कई ऑडियो फॉर्म में नहीं होती थीं। फिर भी उन्होंने हिम्मत नही हारी आने मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ती चली गई। उनके घरवालों ने उनका जिस प्रकार तैयारी में साथ दिया उसी की वजहे से वो UPSC परीक्षा निकाल (Cracked) पाई हैं।

Media Channel से बातचीत में पूर्णा ने बताया कि सिविल सेवा (Civil Service) में यह मेरा चौथा प्रयास है। मैं वर्ष 2016 के बाद से सिविल सेवा एग्जाम की तैयारी कर रही हूं। इसी तैयारी के फल स्वरुप इस बार मुझे ऑल इंडिया 286 वीं रैंक मिली है। पूर्णा के पिता एक सेल्स एग्जीक्यूटिव हैं और मां एक गृहनी हैं। पूर्णा ने कहा कि मेरे मम्मी-पापा दोनाें चाहते थे कि मैं IAS बनूँ।

पूर्णा ने बताया “कॉलेज से मैं चेन्नई में मणिधा नेयम संस्थान गई, ये एक ऐसा मंच था जिसने मुझे खुद को निखारने में मदद की। मेरे माता-पिता और मेरे दोस्त मेरा हमेशा साथ देते है। मैंने आज जो मुक़ाम हासिल किया है, उसकी वजह यही लोग हैं। मेरे लिए जो बलिदान किए हैं, वो परिवारवालों ने ही किए हैं।” आज UPSC परीक्षा देने वाले छात्र इनके प्रेरणा ले रहे हैं।

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