
Ghaziabad: किसी भी शादीशुदा महिला और उसके परिवार को इंतज़ार रहता है उनके धार में नए मेहमान के आने का, अर्थात बच्चे जे जन्म लेने का। हर महिला चाहती है की उसकी गोद भर जाये और घर में बच्चे की किलकारियां गूंजे। अब किसी किसी महिला को जल्दी या चाहते हुए भी बच्चा नहीं हो पता है और वह इंतज़ार में रहती है की कब उसकी गोद भरे।
ये एक ऐसा पल होता हैं, जिसे दंपति कभी नहीं भूल सकते। शादी के बाद सभी चाहते हैं कि उनके घर में एक किलकारी गूंजे और वे पहली बार माता-पिता बनने का सुख हासिल करे। ऐसी ही एक कहानी उत्तर प्रदेश से आई है।
गाजियाबाद में शादी के आठ साल तक एक महिला को बच्चे नहीं हुए थे और फिर उसने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया। महिला ने तीन लड़के और एक लड़की को एक साथ जन्म दे दिया और उसकी कामना पूरी हुई। बच्चों का वजन कम होने के कारण उनको नर्सरी में रखा गया और बाद में डिस्चार्ज का फैसला हुआ। यह घटना अब सोशल मीडिया पर वायरल है।
मीडिया रिपोर्ट्स बताती है की गाजियाबाद की एक दंपत्ति को पिछले कई वर्षों से बच्चा नहीं हो रहा था। महिला को पिछले 8 वर्षों से कोई भी बच्चा नहीं हुआ था। महिला ने माँ बनने के लिए सभी कोशिश की। उसने आईयूआई जैसी प्रजनन तकनीकी की भी मदद ली, लेकिन फिर भी उन्हें सफलता नहीं मिल पाई।
बच्चे पैदा न होने पर दो साल पहले ने इलाज शुरू कराया था। फिर फायदा हुआ और दो महीने की गर्भवती होने के बाद यशोदा अस्पताल की उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ डॉ शशि अरोड़ा ने इलाज शुरू किया। इलाज़ बड़ा और बहुत केयर की गई।
इसके बाद महिला ने आईवीएफ तकनीक का निर्णय लिया। जिसके बाद महिला के हाथ ख़ुशी लगी और गर्भधारण हो गया, लेकिन जब स्कैन किया गया, तो यह पता लगा कि उस महिला के गर्भ में एक या दो नहीं, बल्कि 4 बच्चा थे। जिसके बाद उस महिला ने 4 बच्चों को जन्म दिया।
मीडिया में डॉक्टरों के हवाले से बताया गया कि तीनों लड़कों का वजन 1.680 किग्रा, 1.600 किग्रा, 1.330 किग्रा और लड़की का वजन 1.580 किग्रा है। सभी बच्चे आठवें महीने में पैदा हुए हैं, लेकिन उनकी स्थिति नार्मल हैं। आरम्भ में बच्चे सिक नेटल केयर यूनिट (एसएनसीयू) में भर्ती रहेंगे और तीन से पांच दिन में अस्पताल से डिस्चार्ज की बात कही गई थी।
Woman gave birth to 4 children (1 daughter and 3 sons)simultaneously in Ghaziabad
Will the law of two children policy apply to them too? According to the doctor if there are more than 2 children together or twins at the time of 2nd child then they will get the benefit of 2 child pic.twitter.com/dYS6sdj9PJ— shoaib khan (@_shoaib_khan) July 13, 2021
डॉ शशि ने मीडिया अख़बार को बताया की यह स्थिति काब्रुप्लेट्स कहलाती है। उन्होंने बताया कि 20 साल पहले भी एक महिला ने 4 बच्चों को छठे महीने में जन्म दिया था, लेकिन उस समय इलाज की बेहतर तकनीक न होने से बच्चों की मृत्यु हो गई थी। आज 20 साल बाद फिर ऐसा केस आया और सभी सुरक्षित और स्वस्थ है।
आगे बताया गया की ऐसी स्थिति में गर्भवती का उच्च रक्तचाप और डायबिटीज होने का खतरा रहता है, जबकि सामान्य प्रसव की अपेक्षा खास स्थिति में महिलाओं में अनिद्रा और थकान की दिक्कत होती है। साथ ही साथ यह भी केयर करने की जरूरत होती है कि महिला का सही खानपान हो, क्योंकि महिला के आहार से ही बच्चे का भी पोषण होता है, जो बच्चे के लिए बेहद जरुरी है।



