
Midkulnar, Chhattisgarh: इस साल की गणेश चतुर्थी शुरू हो चुकी है और अब देशभर में गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है। गणेशोत्सव के लिए पंडालों और घरों में गणपति बप्पा (Ganpati Bappa) की मूर्तियों की स्थापना की जा रही है। ऐसे में एक नंबर न्यूज़ की टीम आपको गणेश जी के उस मंदिर के बारे में बता रही हैं, जहां पर परशुराम जी और गणेश भगवान् में युद्ध हुआ था। उस युद्ध में गणेश जी का एक दांत टूट गया था, जिसके कारण गजानन एकदंत कहलाए।
देश के मध्य में स्थित राज्य छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में स्थित भगवान गणपति का यह खास मंदिर बैलाडिला की ढोलकल पहाड़ी (Dholkal Mountain) पर स्थित है। इसे ढोलकल गणेश (Dholkal Ganesh) के नाम से भी जाना जाता है। समुद्र तल से 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर में गणेश जी की प्राचीन प्रतिमा (Dholkal Ganesh Idol) स्थापित है। गणेश जी की प्रतिमा ढोलक के आकार की बताई गई है, जिस कारण से इस पहाड़ी का नाम भी उन्ही के नाम पर ढोलकल पड़ा था।
हिन्दू धर्म में पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश (Bhagwan Ganesha) और परशुराम जी (Parshuram Ji) में युद्ध इस पहाड़ी के सबसे ऊपर के हिस्से (शिखर) पर हुआ था। युद्ध (Parshuram Ganesh Fight) में परशुराम जी के फरसे से भगवान् गणेश जी का एक दांत टूट गया था। इस वजह से ही गजानन एकदंत बोले गए। अब परशुराम जी के फरसे से गणेश जी का दांत टूटा था, अतः इस पहाड़ी के शिखर के नीचे के गांव का नाम फरसपाल पड़ गया।
ढोलकल गरेश मूर्ति तक कैसे पहुंचा जाये (How To Reach Dholkal Ganesh Statue)
ढोलकल शिखर तक पहुंचने के लिए दंतेवाड़ा से करीब 18 किलोमीटर दूर फरसपाल जाना पड़ता है। यहां से कोतवाल पारा होकर जामपारा तक पहुंच मार्ग है। जामपारा में वाहन खड़ी कर तथा ग्रामीणों के सहयोग से शिखर तक पहुंचा जा सकता है। जामपारा पहाड़ के नीचे है। यहां से करीब तीन घंटे पैदल चलकर पहाड़ी पगडंडियों से होकर ऊपर पहुंचना पड़ता है।
An iconic statue which survived #IslamicInvasion and #BritishColonialism!
#DholkalGanesh has recently been destroyed by Naxals. pic.twitter.com/Flh7DYI3V9— Siddharth Bakaria (@SidBakaria) February 3, 2017
आपको बता दें की ढोलकर मंदिर में सालभर भक्तों का मेला लगा रहता है। इस मंदिर में फरवरी महीने में एक मेले का आयोजन भी किया जाता है। दक्षिण बस्तर के भोगामी आदिवासी परिवार के लोग अपनी उत्पत्ति ढोलकल की महिला पुजारी से मानते हैं। इस घटना की ही याद करते हुए यहाँ के छिंदक नागवंशी राजाओं ने पहाड़ी के शिखर पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करवाई थी। इतिहासकार बताते है की ढोलकल पहाड़ी के शिखर पर ललितासन आसान में बैठे दुर्लभ गणेश प्रतिमा 11वीं शताब्दी की बताते है।
#BJP Govt fails to protect A statue which survived Islamic Invasion and British Colonialism! @drramansingh #Chhattisgarh #DholkalGanesh pic.twitter.com/nmVSXdrk37
— Adithya M Reddy (@AdithyaMarri) February 2, 2017
आपको बता दे की कुछ साल पहले छत्तीसगढ़ के बस्तर संभागीय मुख्यालय जगदलपुर से लगभग 85 किमी दूर दंतेवाड़ा जिले की ढोलकल पहाड़ी के शिखर से करोड़ों की एक पुरातात्विक महत्व की गणेश मूर्ति गायब होने की खबर सामने आई थी। ये प्रतिमा छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में सबसे ऊंचे स्थल पर विराजमान दुर्लभ गणेश प्रतिमा (Ancient Old Ganesha Statue of Dholkal) थी। एक दिन शुक्रवार की सुबह दर्शन को आये पर्यटकों को प्रतिमा नहीं मिली।
Built of granite-1000yr old #DholkalGanesh idol-atop densely forested Dholkal hills-is 3 ft in ht & 3.5 ft in width
Hearing about it frm locals-who had been frequentin the place- two #journalists-Shri Hemant Kashyap & Shri Bappi Rai re-discovered it & brought it to public notice pic.twitter.com/R8dSfBNX07
— Dr. Priyanka Shukla (@PriyankaJShukla) August 23, 2020
फिर बाद में यह मूर्ति पहाड़ी के नीचे गिरी हुई खंडित हालत में मिली थी। बाद में पता चला की इसे एक नक्सली ने नीचे गिरा दिया था और बाद में वह पुलिस द्वारा पकड़ा गया। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध ढोलकल गणेश प्रतिमा खाई में गिरकर खंडित होने की घटना को पुरातत्व विभाग, जिला प्रशासन और ग्रामीणों ने बहुत गंभीरता से लिया था। खुले पर्वत में स्थित गणेश की यह प्रतिमा बहुत ही अनमोल है। पहले प्रतिमा के चोरी होने की अफवाह फैल गई थी। बाद में सं पता चल गया।
Save n support #DholkalGanesh bastar….we love bastar @aiebs @sarwotamprasad @patelprabhakar @drramansingh pic.twitter.com/y8VMxElkgB
— PRAVEEN MAHAJAN.N (@0110pn) January 29, 2017
मूर्ति को देखने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पहले मूर्ति पर हथौड़े से प्रहार किया गया है। इसके बाद भी जब मूर्ति नहीं टूटी तो इसको लोहे के रॉड से फंसाकर पहाड़ी से नीचे गिराया गया। मूर्ति के 56 टुकड़े हुए थे, लेकिन ऐसा कोई महत्वपूर्ण भाग गायब नहीं हुआ, जिससे मूर्ति का मूल रूप प्रभावित हो पाता।
The restoration process of the 1000 year old Dholkal Ganesh idol has started. #Dantewada #DholkalProject #LifeBeyondConflict #HopeNaturally pic.twitter.com/1PLaHBz5qs
— Dantewada (@DantewadaDist) February 1, 2017
मूर्ति के टुकड़ों को एकत्र करके फरसपाल थाने में रखा गया था, फिर रखी गई खंडित मूर्ति को रेत से अरुण शर्मा ने एक बार फिर मूर्त रूप दिया था। उस वक़्त अरुण शर्मा का कहना था कि मूर्ति के 85 प्रतिशत भाग सुरक्षित रहे। इन टुकड़ों को जोड़कर दोबारा मूर्ति तैयार (Restoration of the 1000 year old Dholkal Ganesh idol) की गई।
Naxal commander responsible for demolishing the magnificent 17th century #DholkalGanesh statue in Bastar arrested. pic.twitter.com/dQLtXoGj64
— Santosh Misra (@misra_ias) November 7, 2017
फिर यह तह हुआ की मूर्ति की सुरक्षा गांव वालों को ही करना पड़ेगी। यह बेहद संवेदनशील क्षेत्र है, वहां पुरातत्व विभाग या प्रशासन सुरक्षा नहीं दे सकता। यदि ग्रामीण इस मूर्ति को संरक्षण और सुरक्षा नहीं दे सकते हैं, तो म्यूजियम में ही रखना सबसे उचित उपाय है। ऐसे में गांव वालो ने ही ढोलकल गणेश की मूर्ति की सुरखा करने का वाचाल दिया और दोबारा मूर्ति को स्थापित किया गया।



