
Nasik: कई गांव में अभी भी यही धारणा बनी हुई है कि लड़की बोझ होती है, लेकिन आज के युग मे बेटी बोझ नही सिर का ताज है। बेटी बाप पर बोझ नहीं, बाप का गुरुर होती है। बेटी अनचाही संतान नहीं, मनचाही मन्तत है जिसे भगवान ने तुम्हे आशीर्वाद के रूप में दिया है।
ये महाराष्ट्र (Maharashtra) की एक ऐसी बेटी की कहानी (Story) है, जिसने अपने हौसले को मजबूत बनाते हुए हर विकट परिस्थिति को पार किया है और अपने किसान मां-बाप के सपनों को साकार किया है। जिस राज्य में किसान तंगहाली के कारण से आत्महत्या करने को बेबस हों जाते।
गांव का गांव कभी बेमौसम बरसात तो कभी सूखे की चपेट की मार झेल रहा हो ऐसे विकट परिस्थितियों में जी रहे किसान परिवार के लिए तेजल की उपलब्धि जीने की एक उम्मीद है। तेजल के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नही थी। उनके सपने तो बड़े थे लेकिन उसको पूरा करने के लिए पैसे नही थे। फिर भी उन्होंने हार नही मानी अपने सपनो को पूरा करने के लिए निकल पड़ी।
कामयाबी कभी पैसे नही देखती वो तो हमेशा मेहनत की मोहताज होती है। नासिक में रहने वाली तेजल आहेर के माता-पिता उसकी कोचिंग का खर्च नही उठा सकते थे। उसने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी अपने मजबूत होसलो के दम पर की और महाराष्ट्र पुलिस उपपनिरीक्षक पद की परीक्षा में सफलता हासिल की।
15 महीने का प्रशिक्षण पूरी कर जब तेजल निफाड प्रखंड में स्थित अपने गांव लौटी तो गांव वालों ने मिलकर इस सफलता की खुशियां मनाईं। मां-बाप की आंखों में खुशी के आंसू रोके नहीं रुक रहे थे। तकलीफें और मुश्किलें आई हैं तो चली भी जाएंगी, तेजल आहेर महाराष्ट्र पुलिस बल की सेवा कर रही है।
कठिन समय मे भी लक्ष्य के प्रति डटी रही
यदि किसी के घर में दो वक्त की रोटी मिलना संभव ना हो तो वैसे समय में वह रोटी की तलाश में लग जाता है, लेकिन महाराष्ट्र (Maharashtra) के नासिक (Nasik) जिले की रहनेवाली तेजल आहेर (Tejal Aaher) ने ऐसे विकट परिस्थितियों में भी संघर्षभरे जीवन के समय में भी अपने लक्ष्य को पाने के रास्ते पर डटी रही और उसको पूरा भी किया। तेजल ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (Maharashtra Public Service Commission) परीक्षा में कामयाबी हासिल कर पुलिस उपनिरीक्षक बनीं।
बेटी बनी पिता की खुशी
तेजल बताती हैं कि, उनकी मां का सपना था कि बेटी एक पुलिस अधिकारी बने। वह हमेशा कहती थीं कि एक दिन मेरी बिटिया पुलिस ऑफिसर अवश्य बनेगी। माँ के सपने को पूरा करने के लिए तेजल अपने सपने से पीछे नही हटी। मां के इस सपने को आखिरकार तेजल से सच कर दिखाया।
तेजल ने बताया कि जब प्रशिक्षण पूरी कर के वह वापस अपने घर गई तो उनके शरीर पर पुलिस की वर्दी और कंधे पर स्टार लगा देखकर उनका पूरा परिवार खुशी से भावुक हो गया। बेटी को पुलिस की वर्दी में देखकर उनके पिता की आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। तेजल को गले से लगा लिया और कहा कि आज मेरा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।
कोचिंग के लिए नही थे पैसे
कई लोगो का कहना है कि बिना कोचिंग के परीक्षा पास नही की जा सकती है। आजकल कोचिंग का प्रचलन काफी देखने को मिलता है। ज्यादातर लोग नौकारी की तैयारी के लिए कोचिंग को ही अपना सहारा बनाते है। लेकिन परिवार की स्थिति खराब होने के कारण तेजल (Tejal Aaher) के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह कोचिंग में जाकर शिक्षा ले सकें, तेजल ने खुद को मजबूत बनाकर तैयारी शुरु के दी और अपनी मेहनत और लगन से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग परीक्षा को पास करके एक पुलिस अफसर बन गई।
अन्य अभ्यर्थियों के लिय सलाह
तेजल आहेर (Tejal Aaher) अन्य अभ्यर्थियों को सुझाव देते हुए कहती हैं कि, कभी भी परिस्थितयोँ देखकर घबराना नही, हर परिस्थिति का डटकर सामना करना, बुरे दिन आये है तो अच्छे भी जरूर आएंगे खुद पर भरोसा रखना। डरकर मंजिल को पाने से पीछे नही हटना। अपने लक्ष्य पर डटे रहे।
यदि आपकों लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता मालूम है और खुद पर विश्वास है तो परिस्थितियों का सामना करते हुए आगे बढ़ते रहिये। एक दिन ऐसा जरुर आयेगा जब सफलता आपकी कदम चूमेगी। तेजल ने जिस तरह कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए कामयाबी के शिखर तक पहुंची है वह सभी के लिए बेहद प्रेरणादायक है।



