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Delhi/Kandhar: आपने अखंड भारत (Akhand Bharat) का नाम तो सुना ही होगा। यह भारत आज के अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, अभी के भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार जैसे देशों को मिलकर बनता था। इस भारतवर्ष में प्राचीन भारत के हिन्दू राजा का शासन था। उस वक़्त चन्द्रगुप्त मौर्या (Chandragupta Maurya) ने अफ़ग़ानिस्तान (Afghanistan) पर राज करके उसे भारत में मिला लिया था।
आज अमेरिका और रूस पिछले कई दशकों से अफगानिस्तान को कंट्रोल करने की कोशिशों में लगे हुए हैं। अभी तक कोई भी अपनी इस कोशिश में सफल नहीं हो पाया है। अब तालिबान फिर से इस देश पर हावी हो गया है और उसने यहाँ कब्जा कर लिया है। पूरे देश में अफरा तफरी की स्थिति है। परन्तु इस वक़्त भारतीय राजा ने बिना किसी लड़ाई और झगडे के ही अफगानिस्तान को जीत (Won Afghanistan) लिया।
रत के सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने अफ़ग़ानिस्तान को जीता था
अभी तक अफ़ग़ान के धरती पर कोई भी कब्जा करने में सफल नहीं हो पाया है। परन्तु एक समय भारत के सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य (Samrat Chandragupta Maurya) ने बिना युद्ध के अपनी सटीक रणनीतियों के सहारे अफगानिस्तान को जीत (Rule In Afghanistan) लिया था और भारत की भूमि में मिला लिया था।
Rājaputra Harshavardhana ranks as one of the great rulers of India. He combines in him the genious of Chandragupta Maurya, the benevolence of Ashoka, the statesmanship of Samudragupta and the enlightened character of Chandragupta Vikramāditya. pic.twitter.com/yATcuIsjCl
— Karn Singh Hada (@Ekadhiraja) August 23, 2021
वैसे तो भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते आज के नहीं, बल्कि कई सदी पुराने हैं। यह रिश्ता महाभारत (Mahabharata Era) काल से है, जब कांधारी का विवाह भारत के राजकुमार से हुआ था और तब भी अफ़ग़ानिस्तान भारत में मिल (Indian King Ruled in Afghanistan) गया था। उसके बाद भारत और अफगानिस्तान को सिंधु घाटी सभ्यता से भी जोड़कर देखा जाता है।
मौर्या ने सेल्युकस से कंधार को जीता और संधि की
आपको बता दे न की जस्टिन और ग्रीक-रोमन इतिहासकार प्लूटार्क ने भारतीय सम्राट राजा चंद्रगुप्त मौर्य और अलेक्जेंडर के बीच रिश्तों के बारे में बताया है। अलेक्जेंडर के सेनापति सेल्युकस ने एक बार अभी के अफगानिस्तान, जो की उस वक़्त कंधार (Kandhar) हुआ करता था, को जीत लिया था। ऐसे में चंद्रगुप्त मौर्य भी देश की सीमा की रक्षा के लिए वहां गए और इसी दोनों के बीच युद्ध छिड़ गया था। यह युद्ध एक संधि पर खत्म हो सका था।
India Map During Maurya Empire. Even Afghanistan was Indian Part. pic.twitter.com/d6oQGI3WDm
— sanatanpath (@sanatanpath) August 31, 2021
इस संधि के मुताबिक़ 305 ईसा पूर्व में सेल्युकस ने चंद्रगुप्त मौर्य को अफगानिस्तान सौंप दिया था और अपनी बहिन हेलेना (Helena) की शादी भी चन्द्रगुप्त के साथ करवा दी थी। इस जंग के बाद मौर्य वंश और प्राचीन ग्रीक साम्राज्य के बीच कूटनीतिक रिश्ते बन सके थे और आयात निर्यात भी होने लगा था।
चंद्रगुप्त मौर्य को गुरू आचार्य चाणक्य से मार्गदर्शन मिला
चंद्रगुप्त मौर्य के गुरू आचार्य चाणक्य ने हमेशा से ही अपने शिष्य की कामयाबी के बारे में सोचा था। कहा जाता है कि उन्होंने ‘चाणक्य नीति’ किताब में शासन करने की ऐसी कूटनीति लिखी थी, जिसका पालन मौर्या राजवंश द्वारा किया जाता था। चंद्रगुप्त मौर्या ने ग्रीक राजकुमारी हेलेना से शादी (Queen Helena Maurya) की और अफगानिस्तान पा लिया था।
The Footprints of Chandragupta Maurya on Chandragiri Hill (Shravabelagola, Karnataka), Where Chandragupta (the unifier of India and founder of the Maurya Dynasty) performed Sallekhana. pic.twitter.com/7LR2Fn5Ee6
— ಕರ್ಣಾಟ ಕುಲ (@karnatakula) August 25, 2021
ग्रीक राजा सेल्यूकस को बहुत ही प्रतापी माना जाता था। सेल्यूकस की सेना भी विशाल थी, जिसके बाद सेल्यूकस ने युद्ध का ऐलान कर दिया। चन्द्रगुप्त मौर्य ने ग्रीक राजा के सामने शर्त रखी कि अगर वो युद्ध में पराजित हो जाते हैं और चंद्रगुप्त जीत जाते हैं, तो वो राजकुमारी हेलेना से विवाह करेंगे और कंधार (अफ़ग़ानिस्तान) पर भी राज करेंगे। युद्ध शुरू हुआ और सेल्यूकस की सेना को कड़ी टक्कर मिली, जिन्हें मौर्य सेना ने हरा दिया था। इस तरह राजकुमारी हेलेना और कंधार को जीतने में भारतीय सम्राट सफल रहे।
चंद्रगुप्त मौर्या ने महावतों के साथ 500 हाथी उपहार में दिए
इतिहास के जानकार बताते है की ग्रीक साम्राज्य ने कंधार के अलावा अफगानिस्तान के दूसरे क्षेत्र और भारत पर चंद्रगुप्त का शासन स्वीकार कर लिया था। इसी मित्रता के बदले चंद्रगुप्त ने महावतों के साथ 500 हाथी (500 Elephents), कुछ सामान और अनाज यूनान (अभी के ग्रीस) भेजे थे। यूनान के राजदूत मेगास्थनीज को चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में नियुक्त किया गया था।
Megasthenese In Emperor Chandragupta's Court
( Painting by Asit Kumar Haldar of Bengal School of Art / Allahabad Museum ) pic.twitter.com/U9VyuYiYfH
— indianhistorypics (@IndiaHistorypic) August 28, 2021
मेगास्थनीज ने चंद्रगुप्त के शासन काल के दौरान किताब ‘इंडिका’ लिखी, जो बहुज लोकप्रिय हुई थी। इस किताब में ही उस समय की सारी जानकारी उपलब्ध हो सकी है। चंद्रगुप्त मौर्य के बाद उसके पोते महान सम्राट अशोक ने भी अफगानिस्तान पर राज किया और सम्राट अशोक ने ही अफगानिस्तान में बौद्ध धर्म का प्रचार और प्रसार करवाया और बौद्ध धर्म के लोगो को बसाया था। उन्ही के बसाये गए लोगो के द्वारा बाद में अफ़ग़ानिस्तान के बामियान में विशाल बौद्ध मूर्ति बनाई गई थी। जिसे बाद में 2001 में तालिबान ने बम से उड़ा दिया और नुक़साम पहुँचाया था।



