हरियाली दीदी का कमाल, छत पर उगाई 20 तरह की सब्जियां-फल, आर्गेनिक खेती को दे रहीं बढ़ावा

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terrace farming tips
Raipur Woman sets example for locals by introducing terrace farming in Raipur. Pushpa Sahu unconventional way of farming on her home’s rooftop in Raipur.

(Raipur: छत्तीसगढ़ में रायपुर (Raipur CG) की रहने वाली 56 वर्षीया पुष्पा साहू (Pushpa Sahu) को लोग ‘हरियाली दीदी’ (Hariyali Didi) के नाम से जानते हैं। गार्डनिंग (Gardering) से खास लगाव रखने वाली पुष्पा साहू ने अपने घर की छत को सुंदर से बगीचे में बदल दिया है। उन्होंने साबित किया है कि बिना खेती की जमीन के भी लोग कैसे अपनी छतों पर जैविक फल-सब्जियां (Organic Vegetables and Fruits) लगा सकते हैं।

प्रदेश में हरियाली दीदी के नाम से चर्चित कृषक पुष्पा साहू ने अपने गार्डन (Garder Farmer Pushpa Sahu) में कई प्रकार की सब्जियां और फल-फूल के पौधे से हरियाली बनाये रखी है। पढ़ाई में तो वे सेकंड डिवीजन से आगे नहीं बढ़ पाईं, लेकिन हौसले ने उड़ान भरी तो न केवल प्रदेश, बल्कि देशभर के प्रमुख कृषि संस्थानों में छत पर फल-फूल, सब्जी उगाने के लिए चर्चा का विषय बन गईं।

दुनिया जब आपदा के संकट से जूझ रही है। लोग घरों में क्वारंटाइन होकर आलसी हो रहे थे। दुनिया की आर्थिक हालत बिगड़ती जा रही है। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ की लाडली बेटी हरियाली दीदी (Hariyali Didi) ने अपने छत पर ही बागवानी कर लोगों को स्वस्थ रहने और जीवन जीने का मंत्र दे रही हैं।

हरियाली दीदी ने अपने छत पर तमाम तरह के फल और सब्जियों की खेती की है और वे लोगों को भी इसके लिए प्रेरणा दे रही हैं। उनके इस नवाचार को केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक में जमकर सराहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से लेकर राज्यपाल अनुसुइया उइके तक उनकी तारीफ कर चुके हैं।

कब किया था शुरुआत

छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर (Raipur Chhattisgarh) निवासी पुष्पा साहू ‘हरियाली दीदी’ नवाचारी महिला कृषक द्वारा वर्ष 2013 से अपने घर के छत (Home Terrace) के ऊपर फल और सब्जी, औषधि पौधे, मसालों एवं फूलों की जैविक खेती (Organic Farming) खुद करके अनेको लोगों को ट्रेनिग दे रही हैं।

आपके छत में फल सेब, किन्नू, अमरूद, निम्बू, लीची, आम, मुनगा, ड्रैगन फ्रूट सब्जियां कुंदरू, भटा, तरोई, भिंडी, मिर्ची, लौकी, कद्दू, प्याज औषधि पौधे सतावर, लेमन ग्रास, एलोवेरा, पत्थरचट्टा, श्यामा तुलसी, इन्सुलिन पौधा, जंगली, लहसुन, आमी हल्दी, फूल नीलकमल, पारिजात, गुलाब, मोगरा, गेंदा तथा अन्य मौसमी साग-भाजी लगा है।

नवाचार के लिए हो चुकी हैं सम्मानित

श्रीमती साहू ने अनेकों राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के संगोष्ठियों अपने नवाचार की प्रस्तुति की है। नवाचार को राज्य केंद्र सरकार के अनेकों संस्थानों द्वारा पुरस्कृत किया है। इनमें से आई ए आर आई इन्नोवेटिव अवार्ड, इन्नोवेटिव वीमेन अवॉर्ड-आउटलुक मैगज़ीन, भुइयाँ के भगवान अवॉर्ड-आई बी सी 24 आदि प्रमुख है।

आपके नवाचार से प्रभावित हो कर छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने राज्य में छत में साग सब्जी एवं फलों की जैविक खेती (Organic Kheti) को बढ़ावा देने के लिए कंपलीट वेजिटेबल ग्रोइंग किट योजना स्टार्ट की थी। आपके छत की खेती (Farming in terrace) का अवलोकन तत्कालीन केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री सुदर्शन भगत जी द्वारा किया गया था।

आपके छत का भ्रमण अनेकों जनप्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों, समाज सेवियों, छात्र छात्राओं, किसानों एवं आम नागरिकों द्वारा किया गया एवं तारीफ की गई है। श्रीमती साहू ने कोलकाता में आयोजित 4th इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल-2019 में आमंत्रित वक्ता के रूप में अपने अनुभव को पेश किया था।

पति ने हर कदम पर बढ़ाया हौसला

पुष्पा ने बताया कि ग्यारहवीं के बाद होम साइंस में बेचलर डिग्री और समाजशास्त्र में एमए की पढ़ाई की, जिनमें सेकंड डिवीजन ही रहा। उनक पढ़ाई में ज्यादा मन नही लगता था। डॉ केके साहू से शादी के बाद घर-परिवार संभालना प्रमुख जिम्मेदारी थी। इसके बावजूद समाज के लिए कुछ करने की इक्षा थी। कृषि विवि से पति जुड़े थे। उन्होंने हर कदम पर पूरा समर्थन किया, जिसके चलते अपनी सोच को साकार करने में सफल साबित हुई।

घर में ही तैयार करती हैं वर्मी कम्पोस्

पुष्पा को गार्डनिंग का क्रेज़ काफी पहले से रहा है। वे पौधों की देख रेख बहुत अच्छी तरह करती हैं। वे वर्मी कम्पोस्ट घर पर ही तैयार करती हैं। गोबर, सड़ी-गली सब्जियां, छिलके आदि से जैविक खाद बनाती हैं। कुछ पौधों को सींचने के लिए वे ड्रीप इरिगेशन टेक्निक का उपयोग करती हैं, इसमें वे बर्बाद हो रहे पानी का इस्तेमाल कर लेती हैं।

गार्डन में लगे हैं ये फल-सब्जी

पुष्पा के गार्डन में बैंगन, फूलगोभी, पत्तागोभी, शिमला मिर्च, टामाटर, भिंडी, तरोई, लौकी, कद्दू, कुंदरु, पालक, लालभाजी, धनिया पत्ती, प्याज, लहसुन, सरसों लगे हैं। गुलाब व गेंदा के फूल भी बगिया की शोभा बढ़ा रहे हैं। सेब, केला, मौसम्बी, अनार, पपीता, सीताफल, नींबू आदि फलदार पेड़ भी उनके गार्डन में लगे हैं। इनके अलावा कई मेडिशनल प्लांट भी हैं। इनमें एलोवेरा, तुलसी, नीम, आंवला, हल्दी, पुदीना, ब्राह्मी, गुड़मार आदि शामिल हैं।

हाउसवाइफ पुष्पा साहू ने कहा कि घर में उगाई गई सब्जियों और फलों का स्वाद सबसे हट जे होता और बहुत ही फायदेमंद होते हैं। स्वास्थ्य के साथ-साथ समय का भी पता नही चलता। सोशल वर्कर समीर ठाकुर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए अपने घर से ही पहल करनी होगी। इसके लिए हर घर में पौधे होना चाहिए, ताकि घर का वातावरण शुद्ध रह सके।

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