
Aurangabad, Mahrashtra: आज के दौर में महिलाएं न सिर्फ अपने घर की जिम्मेदारी सम्भल रही है, बल्कि अपने घर और बाहर की भी जिम्मेदारी को संभालते हुए हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। कहते है ना कि जब इरादा कुछ बड़ा करने का हो और उसके दृढ़ संकल्प भी गहरा हो, तो फिर कोई चीज आपको आपका मुकाम हासिल करने से नहीं रोक सकती।
इसी बात को सच साबित कर दिखाया किसान महिला (Women Farmer) ने। छोटे से शहर में जन्मी। उनके पिता मजदूर करते थे और माता सब्ज़ी बेचकर गुज़ारा करती थी। पाँच भाई-बहनों में से एक बेटी ने घर की आर्थिक मदद करने के लिए महज़ 15 साल की उम्र में फैक्ट्री में किया काम और 17 साल की उम्र में एक गाँव के गरीब किसान परिवार (Farmer Family) में शादी हो गई।
यह कहानी किसी आम महिला की होती, तो शायद आप इसके आगे की कहानी (Story) खुद ही समझ जाते। पर यह कहानी है सविता डकले की, जिन्होंने न सिर्फ अपनी इस आम कहानी को अपनी मेहनत और लगन से ख़ास बनाया, बल्कि अपने गाँव की दूसरी महिलाओं को गांव की रूढ़िवादी सोच को तोड़ अपनी जिंदगी में कुछ बनने के लिए प्रेरणा (Inspiration) दी।
यदि आप विचार कर रहे हैं कि सविता (Women Farmer Savita Dakle) ने अपनी मेहनत से कई एकड़ ज़मीन खरीद ली है या उस पर खेती करके लाखों कमातीं हैं, इसलिए वह हमारी इस कहानी की कलाकार हैं, तो ऐसा कुछ भी नहीं है। पर जो बात उनके व्यक्तित्व को सबसे अलग बनाती है, वह है उनका आत्मविश्वास, जो लाख कठिनाई के बावजूद कभी नहीं कमजोर नही पड़ी। आईये जानते हैं, सविता की संघर्ष भरी कहानी।
कौन है सविता
महाराष्ट्र की एक ऐसी मेहनती महिला से मिलवाने जा रहे हैं, जो समाज खासकर महिला वर्ग के लिए एक मिसाल हैं। दरअसल, महाराष्ट्र के औरंगाबाद (Aurangabad Mahrashtra) की रहने वाली सविता डकले एक किसान हैं। उन्होंने किसानी करते हुए अपनी बेटी से अंग्रेजी सीखी और 10वीं की परीक्षा दी। मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सविता के घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। पांच भाई बहनों में सविता तीसरे नंबर की संतान थीं।
पिता एक फैक्ट्री में मजदूरी करते और मां सब्जी बेचती थीं। घर की खराब आर्थिक स्थिती के चलते उन्होंने 9वीं के बाद फैक्ट्री में काम करने लगीं। वह 10वीं बोर्ड की परीक्षा नहीं दे सकीं और पढ़-लिखकर आगे बढ़ने का उनका सपना अधूरा ही रह गया। लेकिन हौसला बना हुआ था। गरीबी के चलते घुटने टेक दिये।
महिलाओं को सशक्त बनाने वाली संस्था ने बदली जिंदगी
17-18 साल की उम्र में औरंगाबाद के ही एक किसान परिवार में सविता की शादी करा दी गई। सविता (Savita Dakle) भी किसानी करने लगीं। फिर किसी दिन गांव में महिलाओं को सशक्त बनने में हेल्प करने वाली एक संस्था आई सविता इस संस्था के संपर्क में आईं। इसके बाद संस्था की हेल्प से सविता अलग-अलग कार्यक्रमों में भाग लेकर लोगों को खेती (Farming) की विशेषता सिखाने लगीं।
बच्चे बने प्रेरणा दायक
सविता के दो बच्चे हैं। दोनों अंग्रेजी मीडियम में पढ़ते हैं। खेती से बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च निकालना कठिन हो रहा था, सविता ने हार नही मानी, सविता ने दूसरों की खेतों में मजदूरी भी करनी शुरू कर दी। गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं सविता ने पिछली साल 10वीं की परीक्षा दी, लेकिन वह अंग्रेजी में फेल हो गईं। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी से अंग्रेजी सीखी और इस साल फिर से अंग्रेजी की परीक्षा दी है। पास होने के बाद वह आगे की पढ़ाई जारी रखेंगी।
जिस अंग्रेजी ने अपमानित किया उसी ने दिलाई पहचान
एक विदेशी किसान ने किसी विदेशी भाषा में कमेंट किया हुआ था, जिसका उत्तर भी बहुत सलीकेदार अंग्रेजी में दिया गया था। यह तस्वीर थी सविता डकले की, मीडिया से बातचीत के दौरान सवीर ने कहा मेरी हिन्दी उतनी अच्छी नहीं है, चलेगा न। मैं एक बार फिर हैरान हुई और उनसे पूछा कि केवल मराठी बोलनेवाली सविता इतनी अच्छी अंग्रेजी कैसे लिख लेतीं हैं।
तब उन्होंने उसका जवाब दिया
मेरी बेटी अंग्रेजी मीडियम में जाती है मैं थोड़ा-थोड़ा उससे सीखती रहती हूँ। कभी कोई शब्द न आये तो उससे पूछ लेती हूँ। यह सुनकर सविता के लिए मेरे मन में सम्मान और बढ़ गया। सविता कहती हैं कि सोशल मिडिया केवल उनके लिए बातचीत का एक माध्यम ही नहीं है, बल्कि यहाँ से उन्हें बहुत ज़्यादा प्रोत्साहन मिलता है। मैं अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालती हूँ, तो कई लोग तारीफ़ करते हैं, देश के ही नहीं दुनिया भर के किसानों से बातचीत हो जाती है। ये बहुत बड़ी बात है मेरे लिए। इससे मुझे आगे बढ़ने का हौसला मिलता रहता है।



