भगवान शिव की अमरनाथ गुफा से जुड़ा सबसे बड़ा रहस्य जानें: Mysterious Pigeons Of Amarnath

0
2033
Amatnath Cave Kabutar
Mysterious pigeons Of Amarnath Cave Of God Shiva. Amarnath Cave mystery 2 pigeons story. Amarnath Gufa Ke 2 Kabutar ka raz aur kahani: Ek Number News

Jammu: भगवान भोलेनाथ के कई पवित्र धामों में एक धाम अमरनाथ गुफा भी है। भोलेनाथ की अमरनाथ की यह गुफा जम्मू-कश्मीर राज्य में स्थित है। अमरनाथ गुफा में ही भगवान भोलेनाथ ने माता पार्वती को अमरत्व की कहानी सुनाई थी। अमरनाथ गुफा में बाबा के दर्शन करने से ही जीवन की कई तरह की परेशानियों से व्यक्ति उसे आसानी से पार कर जाता है।

1 जुलाई 2019 से अमरनाथ की पवित्र यात्रा प्रारम्भ हो गई है। इस गुफा की खास बात यह है कि हर साल प्राकृतिक रूप से शिवलिंग का निर्माण होता है, जिसके दर्शन करने के लिए देश-विदेश से भोलेनाथ के भक्त आते हैं। जानकरों के अनुसार भगवान शिवशंकर ने माता पार्वती को इसी गुफा में बैठकर अमरत्व की कहानी सुनाई थी। इस वजन से इस गुफा का बहुत महत्व है।

इस गुफा में हर साल प्राकृतिक रूप से ठोस बर्फ से शिवलिंग का निर्माण होता है। शिवलिंग के अतिरिक्त पास में ही माता पार्वती और शिवपुत्र भगवान गणेश का भी बर्फ का लिंग बना हुआ दिखाई देता है। इस अमरनाथ गुफा में बाबा भोलेनाथ जहां साक्षात विराजमान रहते हैं वहीं देवी सती का महामाया शक्तिपीठ भी है। इस जगह पर देवी सति का कंठ गिरा था। एक साथ एक ही जगह पर शिवलिंग और शक्तिपीठ के दर्शन से सभी तरह की मनोकामना की पूर्ति होती है।

जानकारों के अनुसार अमरनाथ गुफा को लगभग 500 साल पहले खोजा गया था और इसे गुफा को खोजने का श्रेय एक मुस्लिम, बूटा मलिक को दिया जाता है। बूटा मलिक के वंशज अभी भी बटकोट नाम के स्थान पर रहते हैं और अमरनाथ यात्रा से सीधे संपर्क से जुड़े हैं। सबसे प्रथम भगवान शिव ने अपने नंदी का त्याग किया। जहां पर उन्होंने नंदी को छोड़ा वह पहलगाम के नाम से प्रसिद्ध है।

https://twitter.com/TheRohtakite/status/1152566039282012160

अमरनाथ गुफा की यात्रा यहीं से प्रारम्भ होती है। इसके बाद भोलेनाथ ने अपनी जटा से चंद्रमा को मुक्त किया था। जहां पर चंद्रमा का त्याग किया वह चंदनवाणी के नाम से प्रसिद्ध है। इसके बाद भगवान शंकर ने गले में धारण सांपों को छोड़ा। यह स्थान शेषनाग के नाम से जाना जाता है। फिर इसके बाद भोलेनाथ ने गणेशजी को महागुणस पर्वत पर छोड़ दिया, भोलेनाथ ने जहां पिस्सू नामक कीडे़ को त्यागा, वह जगह पिस्सू घाटी के नाम से प्रसिद्ध है।

अमरकथा गुफा में कबूतरों का एक जोड़ा भी मौजूद था जो अमरकथा सुन रहा था और बीच-बीच में गूं-गूं की ध्वनि निकाल रहे थे। भोलेनाथ को लगा पार्वती कथा सुन रही हैं। अमरकथा की पवित्र कथा सुनने से कबूतर अमर हो गए। गुफा में आज भी कबूतरों का जोड़ा भोलेनाथ के पास नजर आता है। वहां जाने वाले लोगो को आज भी इन दो कबूतरों के जोड़ों के दर्शन भक्तों को होते हैं।ये प्राकृतिक का अद्धुत नजारा है जिसे देखकर लोग चकित में पड़ जाते है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here