माँ ने सब्जी का ठेला लगाकर बेटी को पढ़ाया, बेटी ने डॉक्टर बन नाम रोशन किया: Success Story

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Lady Doctor Anita
In Lucknow, Woman Vegetable seller daughter Anita became Doctor. Success story of Doctor Anita Who is daughter of Vegetable seller mother in Hamirpur UP. Inspirational story of Lady Doctor Anita From Hamirpur.

Hamirpur: कहते है ना कि जब इरादा कुछ बड़ा करने का हो और उसके दृढ़ संकल्प भी पक्का हो तो फिर कोई चीज आपको आपका मुकाम हासिल करने से नहीं रोक सकती। आज लाखों लड़कियों के सामने एक मिसाल है। मजबूत इरादें और लक्ष्य प्राप्त करने से पहले हार ना मानने का उनके जुनून ने अपनी मंजिल तक पहुचाया है। आपके हाथ में कोई अच्छा हुनर हो जो आपको और लोगो से अलग बनाये तो आप कही भी रहते हुए भी किसी भी परस्तिथी में सफलता हासिल कर सकते है।

कुछ ऐसी भावुक कर देने वाली ही कहानी है, अनिता की पिता के देहांत के बाद उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि उसके पास पढ़ाई के लिए भी पैसा नही था। लेकिन अपने मजबूत होसलो से उन्होंने वो सब हासिल किया, जो उन्होंने सपना देखा था। अनीता भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। ऐसे में उनके ऊपर भी जिम्मेदारी बढ़ गई। अनीता डॉक्टर बनना चाहती थी। लेकिन उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी।

अनपढ़ माँ ने बढ़ाया हौसला

सफलता की ये कहानी (Success Story) यूपी के हमीरपुर जिले के मौदहा कस्बे की रहने वाली सुमित्रा और उनकी बेटी अनीता (Anita) की है। सुमित्रा बताती हैं कि दो बेटे व तीन बेटियां सहित उसके पांच बच्चे हैं। करीब 14 साल पहले मजदूरी करने वाले पति संतोष का देहांत हो गया था। बच्चों की जिम्मेदारी उन पर आ गई। बड़ी बेटी ने कुछ बड़ा बनने का सपना मन मे संजो लिया था। लेकिन इतना पैसा नही थी कि वो पढ़ाई कर पाये। फर भी उसने हार नही मानी।

अपने सपने को अपने अंदर जीवित रखा। पति के देहांत के बाद सारी जिम्मेदारी माँ पर आ गई थी। परिवार में इतना पैसा नही था कि हम लोगो की पढ़ाई अच्छी स्कूल में हो सके लेकिन माँ का सपना था कि उसके बच्चे अच्छी स्कूल में जाकर शिक्षा प्राप्त करे इस उद्देश्य से माँ ने सब्जी का काम करना शुरू कर दिया। बच्चों की जिम्मेदारी से पीछे नही हटी।

महिला ने कठिन परिस्थितियों के बीच बेटी को पढ़ाया। महिला अब तक सब्जी की दुकान लगाती है। भाई भी परिवार के पालन पोषण के लिए माँ का हाथ बटाता। इलाके के लोगों के लिए महिला और उसका बेटा रोल मॉडल बन चुके हैं। छोटी बेटी भी सीपीएमटी (CPMT) की पढ़ाई कर रही है। सबसे बड़ी बेटी अनीता डॉक्टर बनना चाहती थी। वह बताती हैं कि मैं पढ़ी लिखी नहीं हूं, लेकिन बेटी को आगे पढ़ाने का निर्णय लिया। अनीता 10वीं में 71 व 12 वीं में 75 प्रतिशत अंकों के साथ पास हुई। अनीता ने स्कूल में टॉप किया।

पिता के देहांत बाद माँ ने उठाई जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के मौदहा कस्बे में रहने वाली सुमित्रा सब्जी बेचकर अपने परिवार का पेट भारती थी। परिवार में 2 बेटे और 3 बेटियों सहित 5 बच्चें के साथ रहती हैं। बड़ी बेटी का नाम अनीता (Doctor Anita) है। बड़ी बेटी डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहती है। सुमित्रा बताती हैं कि उनकी पढ़ाई लिखाई नहीं हो पाई लेकिन वो अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती हैं। उनका मानना है कि बेटियां पढ़ेंगी तो परिवार का नाम रौशन करेंगी।

बेटी ने किया सपना पूरा इस खुशी पर मां के नहीं रुके आंसू

यही वजह है कि उन्होंने अपनी बेटियों को आगे की पढ़ाई करने का फैसला लिया। बड़ी बेटी अनीता ने हाई-स्कूल परीक्षा में 71 फीसद अंक और इंटरमीडिएट की परीक्षा में 75 फीसद अंक हासिल कर स्कूल में टॉप किया था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद कानपुर में एक साल तक CPMT की परीक्षा की तैयारी की।

अनीता (Doctor Anita) ने 682 रैंक हासिल कर इस परीक्षा में सफलता (Success In Exam) हासिल कर ली। उनकी रैंक के अनुसार उन्हें इटावा के सैफई मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल गया। दाखिले के बाद उन्होंने MBBS की पढ़ाई शुरू कर दी। बेटी अनीता बताती हैं कि जब CPMT में उनका चयन हुआ था, तब उसकी खुशी के कारण रोने लगी थीं।

सुमित्रा को बेटियों पर था पूरा भरोसा

बेटी को पढ़ाने के लिए सुमित्रा ने दूसरों के घरों पर झाड़ू पोछा भी लगाया। पैसों की जरूरत पड़ने पर बस स्टैंड में खड़े होकर पानी बेचा। वो बताती हैं कि जैसे जैसे बच्चे बड़े हो रहे थे वैसे वैसे उनकी पढ़ाई लिखाई का खर्च भी बढ़ता जा रहा था। इसलिए उन्होंने सब्जी की दुकान लगाना शुरू कर दिया। इससे वो हर रोज 300 से 500 रुपए तक निकाल लेती हैं।

पढ़ाई का खर्च और परिवार की जिम्मेदारी बढ़ने के कारण भाई ने भी सब्जी का ठेला लगाना शुरू कर दिया। वहीं अनीता ने भी अपनी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान इमली और कैथा बेचकर अपनी फीस के लिए पैसा इकट्ठा करने लगी। सुमित्रा ने अपनी छोटी बेटी को भी पढ़ाई के लिए कानपुर भेजा। एक माँ को अपनी बेटियों पर पूरा भरोसा था कि एक दिन उसकी बेटी उसका नाम रौशन करेंगी।

सुमित्रा को भरोसा है कि बड़ी की तरह छोटी बेटी भी नाम रोशन करेगी। इसके बाद उन्होंने 1 साल कानपुर में CPMT की तैयारी की ओर 682 रैंक हासिल की, जिसके बाद उन्हें इटावा के सैफई मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिल गया, जहां उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई की। अनीता की मां सुमित्रा सब्जी बेचने का काम करती थीं।

फ्री में करूंगी गरीबों का ईलाज

गरीबी के दौर से गुजरी अनीता कहती हैं कि उनके पिता के स्वर्गवास हो जाने के बाद परिवार टूट गया था। पेट भरने जे लिए भी पैसा नही था।लेकिन परिस्थितियों से हार नही मानी आगे बढ़ते चले गये। पिता मजदूरी करते थे और घर में इतना पैसा नहीं था कि वो अपना इलाज ढंग से करवा लेते। वो कहती हैं कि पिता के ना रहने के बाद मेरी मां और भाई ने पिता के ना रहने पर भी मेरे पढ़ाई के सपने को कभी हारने नहीं दिया।

उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज मैं डॉक्टर (Doctor) बन सकीं। आगे चलकर मैं लोगों का मुफ्त में ईलाज करना चाहूंगी। गरीबी के कारण जिस तरह से गरीबी ने मेरे पिता (Father) को अपना शिकार बना लिया वैसा किसी और परिवार के साथ ना हो।

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