पद्मश्री से सम्मानित क्रिकेटर धोनी को पैसे का कोई घमंड नही, जीते है साधारण जिंदगी: Dhoni Story

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MS Dhoni Story
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File Photo Credits: Twitter

Ranchi: दिग्गज खिलाड़ी भारतीय कप्तान का नाम भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket) के इतिहास में दशकों तक अमर रहने वाला है। दरअसल बात 2007 के टी20 विश्व कप (T20 World Cup) करें या 2011 के वनडे विश्व कप की या फिर 2013 की चैंम्पियन ट्रॉफी की बात हो। हर वक्त पर भारतीय टीम और सवा करोड़ भारतीयों को गर्व का अनुभव प्राप्त करवाने वाले वाले इस कप्तान को हर एक देशवासी का सम्मान मिलता है। दूसरे क्रिकेटर जहां महंगे सैलूनों पर जाते हैं, तो वहीं धोनी इसके विपरीत कहीं भी सामान्य सैलूनों पर बाल कटा लेते हैं।

धोनी (Mahendra Singh Dhoni) अपने घर की छोटी छोटी चीजों पर खुद ही ध्यान देते हैं। यदि घर में कोई रिपेरिंग या छोटे मोटे काम की जरूरत हो तो इसे वे खुद ही कर लेते हैं। वह जहां चाहे वहा पर खाना खा लेते है। वह किसी भी छोटे रेस्टोरेंट, होटल में खाना खाते हुए दिखाई दिए है। जब धोनी और उनकी बीवी साक्षी पासपोर्ट ऑफिस गए हुए थे, तब वहां धोनी की सादगी साफ़ दिखाई दे रही हैं।

कप्तान धोनी (Captain MS Dhoni) कभी कभी अपने टीम के साथियों के लिए पानी की बोतल, तौलिया, कोल्ड ड्रिंक लेकर के मैदान में चले जाते थे। इसमें उन्हें कोई शर्मिंदगी महसूस नहीं होती थी। धोनी को बाइक का शौक रहा है, पर उन्हे साईकिल चलाना भी बेहद अच्छा लगता हैं। दरअसल धोनी के मुताबिक हर सफल आदमी ने अपने गुजरे ज़माने में साइकल (Cycle) जरूर चलाई है और लोग पैसा कमाने के बाद जिम (Gym) जाकर साइकल चलाते है, मगर ऐसे साइकल चलने को बहुत बेकार समझते है। धोनी से जुड़ी कुछ रोचक (Interesting Facts About Dhoni) जानकारी।

कहा हुआ जन्म

महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) अथवा मानद लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र सिंह धोनी एम एस धोनी रांची झारखंड, में जन्म हुआ। पद्म भूषण, पद्म श्री और राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित क्रिकेट खिलाड़ी हैं। वे भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और भारत के सबसे सफल एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कप्तान रह चुके हैं। शुरुआत में एक उज्जवल व आक्रामक बल्लेबाज़ के नाम से पहचाने गए। धोनी भारतीय एक दिवसीय के सबसे शांतचित्त कप्तानों में से एक है।

उनकी कप्तानी में भारत ने 2097 आईसीसी विश्व T-20 (ICC T20 World Cup), 2007–08 कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज, 2011 क्रिकेट विश्व कप, आइसीसी चैम्पियंस ट्रॉफ़ी 2013 और बॉर्डर-गावस्कर ट्राफी जीती जिसमें भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 4-0 से हराया। उन्होंने भारतीय टीम को श्रीलंका और न्यूजीलैंड में पहली अतिरिक्त वनडे सीरीज़ जीत दिलाई। 02 सितम्बर 2014 को उन्होंने भारत को 14 साल बाद इंग्लैंड में वनडे सीरीज में जीत दिलाकर अपनी कप्तानी से सबका दिल जीत लिया।

ICC की कितनी ट्राफी है

धोनी (Dhoni) ने कई सम्मान भी प्राप्त किए हैं जैसे 2008 में आईसीसी वनडे प्लेयर ऑफ़ द इयर अवार्ड (प्रथम भारतीय खिलाड़ी जिन्हें ये सम्मान मिला), राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार और 2009 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म श्री पुरस्कार साथ ही 2009 में विस्डन के सर्वप्रथम ड्रीम टेस्ट ग्यारह टीम में महेंद्र सिंह धोनी को कप्तान का दर्जा दिया गया। उनकी कप्तानी में भारत ने 28 साल बाद एक दिवसीय क्रिकेट विश्व कप में फिर से जीत हासिल की। सन् 2013 में इनकी कप्तानी में भारत पहली बार चैम्पियंस ट्रॉफी का विजेता बना।

धोनी दुनिया के पहले ऐसे कप्तान बन गये जिनके पास आईसीसी के सभी कप है। इन्होंने 2014 में टेस्ट क्रिकेट को कप्तानी के साथ अलविदा कह दिया था। इनके इस फैसले से क्रिकेट जगत आश्चर्य में पड़ गया। 14 जुलाई 2018 को, महेंद्र सिंह धोनी चौथे भारतीय क्रिकेटर और ओडीआई क्रिकेट में 10,000 रन बनाने के लिए दूसरे विकेट कीपर बने।

कितने वनडे मैच में मिली शानदार जीत

महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) लगातार दूसरी बार क्रिकेट विश्व कप में 2015 क्रिकेट विश्व कप में भारत का नेतृत्व किया और पहली बार भारत ने सभी ग्रुप मैच जीते साथ ही इन्होंने लगातार 11 विश्व कप में मैच जीतकर नया रिकार्ड अपने नाम किया। ये भारत के पहले ऐसे कप्तान बने जिन्होंने 100 वनडे मैच जिताए।

उन्होनें कहा है कि जल्द ही वो एक ऐसा कदम उठाएंगे जो किसी कप्तान ने अपने करियर में नहीं उठाया वो Team को 2 भागो में बाटेंगे जो खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन नहीं करेगा उसे वो दूसरी टीम में डाल देंगे और जो खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करेगा उसे अपनी टीम में रख लेंगे इसमें कुछ नये खिलाड़ी भी शामिल हो सकते है। धोनी ने 4 जनवरी 2017 को भारतीय एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय और ट्वेन्टी-20 अंतरराष्ट्रीय टीम की कप्तानी छोड़ी और 15 अगस्त 2020 को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषण कर दी।

परिवार में कितने लोग है

महेंद्र सिंह धोनी का जन्म झारखण्ड (Jharkhand) के रांची (Ranchi) में एक मध्यम वर्गीय राजपूत परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम पान सिंह व माता श्रीमती देवकी देवी है। उनके पिताजी श्री पान सिंह मेकोन कंपनी के जूनियर मैनेजमेंट वर्ग में नोकरी करने लगे। मेकॉन लिमिटेड यह कंपनी केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली एक सार्वजनिक क्षेत्र मे आनेवाली कंपनी है।

रांची मे पान सिंह और उनके परिवार को रहने के लिए सरकार से सरकारी निवास स्थान मिला था। धोनी की माता श्रीमती देवकी देवी एक साधारण गृहिणी थीं। धोनी की एक बहन है जिनका नाम है जयंती और एक भाई है जिनका नाम नरेन्द्र है। धोनी का बडा भाई नरेंद्रसिंह राजनीति में कार्यरत है और उनकी बहन जयंती गुप्ता एक टीचर है।

उनके पसंदीदा सेलेब्रिटीज़

सचिन तेंदुलकर बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन और गायिका लता मंगेशकर उनकी पसंदीदा है। पहले धोनी के बाल लम्बे हुआ करते थे जो अब उन्होंने कटवा दिए हैं कारण वे अपने पसंदीदा बॉलीवुड स्टार जॉन अब्राहम जैसे दिखना चाहते थे। धोनी एडम गिलक्रिस्ट के प्रशंसक है और बचपन से ही उनके आराध्य है। धोनी ने अपनी स्कूल की पढ़ाई द ए वी जवाहर विद्यालय मंदिर, श्यामली वर्त्तमान में जे वी एम , श्यामली, रांची के नाम से जाने जाते में की।

धोनी को बैडमिंटन और फुटबॉल इन दोनों खेलों मे विशेष रुचि थी। इंटर-स्कूल प्रतियोगिता में, धोनी ने इन दोनों खेलों में स्कूल का प्रतिनिधित्व करते थे। जहां उन्होंने बैडमिंटन व फुटबॉल में अपना अच्छा प्रदर्शन दिखाया जिस कारण वे जिला व क्लब लेवल में चयनित हुये। धोनी अपने फुटबॉल टीम के गोलकीपर भी रहे चुके हैं। उन्हें लोकल क्रिकेट क्लब में क्रिकेट खेलने के लिए उनके फुटबॉल कोच ने भेजा था। हालांकि उसने कभी क्रिकेट नहीं खेला था।

फ़िर भी धोनी ने अपने विकेट-कीपिंग के कौशल से सबको प्रभावित किया और कमांडो क्रिकेट क्लब में नियमित विकेटकीपर बने। क्रिकेट क्लब में उनके अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्हें 1997-98 सीज़न के वीनू मांकड़ ट्राफी अंडर सिक्सटीन चैंपियनशिप में चुने गए जहां उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। दसवीं कक्षा के बाद ही धोनी ने क्रिकेट की ओर विशेष ध्यान दिया और बाद में वे एक अच्छे क्रिकेटर बनकर सामने आये।

कैसे मिली भारतीय क्रिकेट में जगह

धोनी एक आक्रामक सीधे हाथ के बल्लेबाज और विकेट-कीपर है। धोनी उन विकेटकीपरों में से एक है जिन्होंने जूनियर व भारत के ए क्रिकेट टीम से चलकर राष्ट्रीय दल में प्रतिनिधित्व किया। पार्थिव पटेल, अजय रातरा और दिनेश कार्तिक उन्हीं के दिखाए हुए मार्ग पे चले। धोनी अपने दोस्तों में माही के नाम से अपनी पहचान बनाये हुये है।

बिहार क्रिकेट टीम में 1998-99 के दौरान अपना योगदान दिया और भारत-ए टीम के लिए 2004 में हुए केन्या दौरे का प्रतिनिधित्व करने के लिए चयनित हुए। त्रिदेशीय श्रृंखला में पाकिस्तान-ए टीम के खिलाफ धोनी ने गौतम गंभीर के साथ मिलकर कई शतक बनाये और उस साल के अंत में भारतीय राष्ट्रीय टीम में चयनित हुए। धोनी ज्यादातर बैकफ़ुट में खेलने के लिए और मज़बूत बॉटम हैण्ड ग्रिप होने के वजह से जाने जाते है, वे बहुत तेज़ गति से बल्ला (Bat) चलाते है, जिसके कारण गेंद अक्सर मैदान छोड़ जाती है।

कैसे बने नम्बर 1 बल्लेबाज

2005 में अपने पाँचवे एक दिवसीय मैच में पाक के खिलाफ धोनी ने 148 रनों की जबर्दस्त पारी खेली थी। ये किसी भारतीय विकेट-कीपर के द्वारा बनाया गया सर्वोच्च स्कोर है। उस साल के अंत में श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 183 रन बनाकर उसने ना सिर्फ़ ख़ुद का बनाया रिकॉर्ड तोड़ा बल्कि एक दिवसीय मैचों की दूसरी पारी में बनने वाला अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।

सीमित ओवरों के प्रारूप में धोनी की सफलता ने उनका स्थान भारतीय टेस्ट टीम में पक्का कर दिया और 2005-06 के अंत में हुए एक दिवसीय क्रिकेट में अपने अच्छे प्रदर्शन से धोनी को आईसीसी एक दिवसीय रेटिंग में नम्बर 1 बल्लेबाज के रूप में स्थापित किया। इसके बाद धोनी का फॉर्म गिरता रहा जब 2006 में भारत आईसीसी चैम्पियन ट्राफी, डीएलऍफ़ कप और द्विपक्षीय श्रृंखला में वेस्ट इंडीज एवं दक्षिणी अफ्रीका के खिलाफ जीत नही मिली।

2007 की शुरुआत में दक्षिणी अफ्रीका एवं वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ धोनी के फॉर्म में वापस आने की बात तब ग़लत साबित हो गई जब भारत 2007 क्रिकेट विश्व कप में पहले ही राउंड में बाहर हो गया। वर्ल्ड कप के बाद धोनी ने द्विपक्षीय एकदिवसीय टूर्नामेंट में बंगलादेश के खिलाफ मैन ऑफ़ द सीरीज़ का खिताब जीता। फिर 2007 में इंग्लैंड दौरे के लिए धोनी को एक दिवसीय टीम का उप-कप्तान बनाया गया।

अच्छे बल्लेबाज़ के रूप में धोनी ने अपनी लड़ाकू शैली को नियंत्रण करने की समझदारी दिखाई और जिम्मेदार पारियां खेली। अपनी शैली को छोड़ धोनी ने दो अनोखे और असरदार क्रिकेट स्ट्रोक अपनाए। भारतीय क्रिकेट टीम में अपने प्रवेश से आज तक, धोनी की आक्रामक बल्लेबाजी की शैली, क्षेत्र पर सफलता, व्यक्तित्व और लंबे बालों ने उसे भारत में सबसे ज्यादा लोकप्रिय खिलाड़ी बना दिया।

अंदर-19 का सफर

धोनी को 1998-99 में बिहार अंडर-19 में शामिल किया गया था, जिसमें इन्होंने 5 मैचों में कुल 176 रन बनाये, पर टीम छह के ग्रुप में चौथे स्थान पर आई थी इसलिए क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह नही बना पाई। धोनी को पूर्वी क्षेत्र अंडर-19 दस्ते सीके नायडू ट्रॉफी और बाकी भारतीय दस्ते एम ए चिदम्बरम ट्रॉफी और वीनू मांकड़ ट्रॉफी के लिए नहीं चुना गया था।

बिहार अंडर-19 क्रिकेट टीम 1999-2000 के फाइनल में पहुँची, जहां धोनी ने बिहार के लिए 84 रन बनाए थे, जबकि टीम ने कुल 357 रन बनाए थे। जबकि पंजाब अंडर-19 टीम ने कुल 839 रन बनाए, जिसमें युवराज सिंह ने 358 रन बनाए थे। युवराज सिंह आगे चलकर धोनी के राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी बने।

युवराज के 358 रनों के सामने धोनी का स्कोर छोटा पड़ गया। पूरे टूर्नामेंट में धोनी ने 9 मैचों में 12 पारियों में कुल 5 अर्द्धशतक ,17 कैच और 7 स्टम्पिंग भी किये। उन्होंने 1999 -2000 सीज़न के दौरान बिहार क्रिकेट टीम के लिए रणजी ट्रॉफी की शुरुआत की और दूसरी पारी में नाबाद 68 रन बनाये।

उन्होंने अगले सीजन में बंगाल के खिलाफ एक खेल के दौरान अपनी पहली प्रथम श्रेणी की शताब्दी बनाई, लेकिन उनकी टीम ने खेल खो दिया। इसके बाद सी के नायडू ट्रॉफी के लिए खेले गए ईस्ट जॉन अंडर-19 मुकाबले में हिस्सा लिया, लेकिन वे चार मैचों में केवल ९७ रन ही बना पाए थे जिसके कारण ईस्ट जॉन ने चारों मैचों में हार का सामना करके टूर्नामेंट में अंतिम स्थान प्राप्त किया।

किस उम्र में की शुरुआत

धोनी जब 19 साल के थे तब 1999-2000 में इन्होंने बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी से अपने कैरियर की शुरुआत की थी। वह अपनी पहले मैच में असम टीम के खिलाफ दूसरी पारी में 68 रनों की लाजवाब पारी खेली थी। धोनी ने 5 मैचों में 283 रनों के साथ वो सीजन समाप्त किया था। बाद में धोनी ने 2000-01 के सीजन में बंगाल के खिलाफ अपना पहला प्रथम श्रेणी शतक लगाया।

इसके आलावा 2000-01 सीज़न में धोनी किसी भी मैच में अर्द्धशतक नहीं बना पाये थे। इसके बाद 2002-03 के सीज़न में धोनी ने चार रणजी मैच में पांच अर्धशतक बनाए और देवधर ट्रॉफी के अर्न्तगत दो अर्धशतक बनाए, तत्पश्चात उन्हें निचले क्रम के योगदान में अच्छी छवि बनने लगी।

भारतीय टीम में कब मिली जगह

2003-04 के सीज़न में उनके कड़ी मेहनत के कारण धोनी को पहचान मिली, खास कर वनडे मैच में उन्हें जिम्बाब्वे व केन्या के लिए भारत ए टीम में चुने गए। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में जिम्बाब्वे इलेवन के खिलाफ धोनी ने 7 कैच और 4 स्टमपिंग किये और अपने विकेट-कीपर होने का हुनर दिखाया। त्रिकोणीय टूर्नामेंट के अर्न्तगत केन्या, भारत ए और पाकिस्तान ए ने भाग लिया जिसमें धोनी ने पाकिस्तान के 223 रनों का पीछा कर उस मैच में अर्धशतक बनाया और भारत को जीत प्राप्त करने में सहायता की।

अपने प्रदर्शन को और मज़बूत करते हुए इन्होंने इसी टूर्नामेंट में 120 व 119 रन बना कर दो शतक पूरे किए। धोनी ने कुल 7 मैचों में 362 रन बनाए जिसमें उनका औसत 72.40 रहा और इस श्रृंखला में दूसरों के बीच उसके प्रदर्शन पर उस समय के कप्तान सौरव गांगुली ने फोकस किया। भारत ‘ए’ टीम के कोच संदीप मधुसूदन पाटिल ने विकेट-कीपर और बल्लेबाज के रूप में भारतीय क्रिकेट टीम में जगह के लिए धोनी की सिफारिश की। महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से 15 अगस्त 2020 को संन्यास ले लिया।

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