
Gwalior: शाही खानदान या रॉयल फैमिली से राजनीति में आना बड़ी बात समझी जाती है। राजस्थान और मध्य प्रदेश की राजनीति में इसे प्रमुखता से देखा गया है। भारत राजाओं और महाराजाओं का देश रहा है। यहां एक से बढ़कर एक प्रतापी और धनवान राजा हुए हैं, जिनकी संपत्ति आज के समय में करोड़-अरबों में है। इसी राजनीति की एक कड़ी हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया। सिंधिया उस घराने से आते हैं जिसके प्रभुत्व, प्रभाव और धन-दौलत की संपदा का कोई अंत नहीं।
कांग्रेस की राजनीति में कदम रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) भी इसी धमक और रौनक के साथ आए थे। हालांकि कांग्रेस के साथ रिश्ता उनका लंबे समय तक चल नही पाया, आगे चल कर टूट गया और 19 साल के संबंध में दरार आ गई। वे अब बीजेपी के साथ हैं। सिंधिया (Scindia) के बारे में कहा जाता है कि वे कांग्रेस (Congress) में रहें या बीजेपी (BJP) में, लेकिन उनका कद शाही अंदाज से कम नही होगा है।
संग्रहालय की भव्यता
ग्वालियर में सिन्धिया राजपरिवार का वर्तमान निवास स्थल (Scindia House) ही नहीं एक भव्य संग्रहालय भी है। इस महल (Jyotiraditya Scindia Mahal) के 35 कमरों को संग्रहालय बना दिया गया है। इस महल का ज्यादातर हिस्सा इटेलियन स्थापत्य से प्रभावित है। इस महल का खास दरबार हॉल (Darbar Hall) इस महल के भव्य अतीत का गवाह है, यहां लगा हुए दो फानूसों का भार दो-दो टन का है।
Embrace the illustrious bygone era at its best as you witness the Jai Vilas Palace in Gwalior, Madhya Pradesh! Home to one of Asia's largest royal carpets & heaviest chandeliers, this striking white-marbled arch is something visitors from across the globe still come to adore. pic.twitter.com/Kt1vVt64ZD
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कहते हैं इन्हें तब टांगा गया जब दस हाथियों को छत पर चढा कर छत की मजबूती को आंका गया था। इस संग्रहालय की एक और प्रसिध्द चीज है, चांदी की रेल जिसकी पटरियां डाइनिंग टेबल पर लगी हैं और विशिष्ट दावतों में यह रेल पेय परोसती चलती है। इटली, फ्रांस, चीन तथा अन्य कई देशों की मनमोहक कलाकृतियां यहाँ देखने को मिलती है।
18 साल के राजनीतिक सफर के बाद कांग्रेस का साथ छोड़ने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) इस समय सुर्खियों का केंद्र बने हुए हैं। बीजेपी में शामिल होने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके परिवार की कई पहलुओं की चर्चा हो रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया राजघराने से रिश्ता रखते हैं और वह ग्वालियर के महाराज हैं। सिंधिया द्वारा उठाये गए राजनैतिक कदमों के चलते उनका ये महल भी सोशल मीडिया पर टॉप ट्रेंड में अपनी खास जगह बना लिया है।
Jai Vilas Palace, built in 1874 by the Maharaja of Gwalior, is one of the grandest palaces of #India. A part of this palace now houses a museum that exhibits unique artifacts and objects from the past. #IncredibleIndia pic.twitter.com/mOoqABZzJz
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ज्योतिरादित्य की गिनती एक महानुभाव नेता के साथ-साथ राजघराने की इस पीढ़ी के वारिस के तौर पर भी होती है। आपको जानकर हैरानी होगी ज्योतिरादित्य सिंधिया जिस महल (Jyotiraditya Scindia House Gwalior) में रहते हैं, वो 12 लाख वर्गफीट से भी ज्यादा बड़ा है। वो इस महल (Mahal) के इकलौते मालिक हैं।
धनवान राजाओं में से एक थे जयाजीराव सिंधिया, जो ग्वालियर रियासत के महाराजा (Maharaja) थे। उन्होंने एतिहासिक जयविलास महल (Jai Vilas Palace) बनवाया था। आज इसी महल में केंद्रीय मंत्री रह चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया रहते हैं। वह ग्वालियर रियासत के अंतिम महाराजा जीवाजीराव सिंधिया के पोते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया जिस जयविलास महल (Jai Vilas Mahal) में रहते हैं, वह 12 लाख वर्ग फीट से भी ज्यादा बड़ा है।
निर्माण किस सन में हुआ
महाराजा जयाजीराव सिंधिया (Jiwajirao Scindia) ने वर्ष 1874 में जयविलास महल बनवाया था। तब इसकी लागत एक करोड़ रुपये के आसपास थी, लेकिन आज इस शानदार और आलीशान महल (Awesome Palace) की कीमत 4,000 करोड़ रुपये के आसपास है। इस महल में 400 से भी अधिक कमरे हैं।
Jai Vilas Palace #MadhyaPradesh
Located in Gwalior, it is a fusion of Italian, Corinthian and Tuscan architecture pic.twitter.com/8I5SMAhXIx— Indian Diplomacy (@IndianDiplomacy) April 4, 2016
महल (Jai Vilas Palace) को आर्किटेक्ट सर माइकल फिलोस द्वारा सुंदरता दी गई थी। जिन्होंने वास्तुकला के इतालवी, टस्कन और कोरिंथियन शैली से प्रेरणा लेकर इसका निर्माण किया था। जयविलास महल, ग्वालियर में सिंधिया राजपरिवार (Scindia Rajpariwar) का वर्तमान निवास स्थल ही नहीं एक मनमोहक संग्रहालय भी है।
महल (Jai Vilas Mahal) में 400 से अधिक कमरे हैं, जिसका एक भाग इतिहास को संजोने के लिए एक संग्रहालय (Museum) के रूप में उपयोग किया जाता है। कुल 1,240,771 वर्ग फीट में फैले इस महल के एक प्रमुख हिस्से को वैसे ही संरक्षित किया गया है जिस तरह से इसे बनाया गया था।
किसके स्वागत में बनाया गया महल
इस राजसी महल का निर्माण वेल्स के राजकुमार, किंग एडवर्ड VI के भव्य स्वागत के लिए किया गया था, जो सिंधिया राजवंश का निवास भी था और फिर साल 1964 में इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया था। जयविलास पैलेस में 400 कमरे हैं। महल की सीलिंग पर भी सोने जड़े हुए हैं। तीन मंजिले महल की अंदरूनी सजावट में 560 किलोग्राम सोना जड़ा हुआ है।
इसके 40 कमरों को अब म्यूजियम बना दिया गया है। म्यूजियम में कई ऐसी चीजें रखी हैं सिंधिया राजवंश की समृद्धि को दर्शाती हैं। साथ ही, ये ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण हैं। इनमें चांदी की बग्गी, झांसी की रानी की छतरी, मुगल बादशाह औरंगजेब और शाह आलम के जमाने की तलवारें और विंटेज कार शामिल हैं।
The Durbar Hall of Jai Vilas Palace in Gwalior is decorated with gilt, gold furnishing, adorned with a huge carpet and a pair of gigantic chandeliers weighing 3.5 tonnes each. The Palace was built by Maharaja Jayaji Rao Scindia of Gwalior in 1874. pic.twitter.com/t2czTejEYt
— Incredible!ndia (@incredibleindia) September 16, 2019
महल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दरबार हॉल है। महाराज का दरबार इसी हॉल में लगता था। महल का जब निर्माण हुआ था, तब इसकी अनुमानित कीमत एक करोड़ रुपये थी। मौजूदा अनुमानों के मुताबिक इसकी कीमत करीब 4000 करोड़ रुपये है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर के महाराज (Gwalior Maharaja Jyotiraditya Scindia) हैं। पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया महारानी हैं, जबकि बेटे महाआर्यमन राजकुमार (Mahanaryaman Scindia) व अनन्या राजकुमारी (Ananya Raje Scindia) हैं। लोग अनन्या को राजकुमारी (Rajkumari) ही कहते हैं।
सबसे बड़ी रियासत में शुमार
अंग्रेजों ने जिस समय भारत छोड़कर जाने का निर्णय लिया था उस वक्त पांच बड़ी रियासतें थीं। उसमे ग्वालियर पांचवीं सबसे बड़ी रियासत हुआ करती थी। वहां के महाराजा जीवाजीराव सिंधिया आजादी के बाद भी राज करते रहे। हालांकि जीवाजीराव ने वह समझौता स्वीकार कर लिया था जिसके अंतर्गत उनकी और आसपास की छोटी रियासतों को मिलाकर ‘मध्य भारत’ नाम से नया राज्य की उत्तति करनी थी। नए राज्य का मुखिया ‘राजप्रमुख’ कहलाता। तो मध्य भारत के पहले राजप्रमुख होने का गौरव भी जीवाजीराव सिंधिया के नाम ही दर्ज है। जब तक 1956 में मध्यप्रदेश का गठन नहीं हुआ था, तब तक सिंधिया राजप्रमुख रहे।
किस कारण आया राजनीति में सिंधिया परिवार
जीवाजीराव ने अपने पिता माधव राव सिंधिया के देहांत के बाद 5 जून, 1925 को ग्वालियर की गद्दी संभाली थी। महाराजा ने खुद स्वतंत्र भारत में चुनाव नहीं लड़ा मगर 16 जुलाई, 1961 को उनके देहांत के बाद सिंधिया परिवार ने राजनीति में कदम रखा। जीवाजीराव की विधवा राजमाता विजया राजे सिंधिया ने 1962 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा के चुनाव में प्रत्याशी बनी और जीत भी अपने नाम दर्ज की। हालांकि कार्यकाल पूरा होने तक राजमाता ने जनसंघ की सदस्यता ले ली। वह भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थीं।
किसके पास है राजपरिवार की कमान
जीवाजीराव के बेटे माधवराव सिंधिया का राजनीतिक सफर जनसंघ से प्रारम्भ हुआ और कांग्रेस पर समाप्त। माधवराव भारत सरकार में रेलमंत्री रहे थे। महाराजा की बेटी वसुंधरा राजे भारतीय जनता पार्टी में हैं और राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। माधवराज के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले साल तक कांग्रेस में थे,एमजीआर कांग्रेस से दरकिनारे के बाद अब भाजपा के साथ हैं। अब उनके पास अपने पिता की तरह मंत्री का पद है।
Jai Vilas Palace #Gwalior– A fine example of European architecture, designed and built by Sir Michael Filose. pic.twitter.com/xRauMUgBkE
— Madhya Pradesh Tourism (@MPTourism) October 7, 2015
ज्योतिरादित्य सिंधिया सिर्फ नेतागिरी ही नहीं चलाते बल्कि क्रिकेट की पिच पर भल्ला भी पूरे उत्साह से भांजते हैं। अपने शौक को कभी पीछे नही छोड़ा, राजनीति के साथ परिवार का बिजनेस संभालते हुए, उन्होंने अपने क्रिकेट प्रेम को जगाए रखा और उसे तराश कर तरोताजा भी करते रहे।
ज्योतिरादित्य सिंधिया कितने की संपत्ति के मालिक
इस सवाल का जवाब दे पाना बहुत कठिन है, क्योंकि 1957 से लेकर अब तक के चुनावों में सिंधिया खानदान के उम्मीदवारों ने जितनी संपत्ति को उजागर किया, वह उस आंकड़े से काफी कम है, जितनी उसकी कीमत है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चुनाव के लिए आवेदन में 2 अरब से ज्यादा की संपत्तियां का उल्लेख किया था, लेकिन जिन संपत्तियों को लेकर कई अदालतों में मामले चल रहे हैं, उनकी अनुमानित कीमत ही करीब 40 हजार करोड़ यानी 400 अरब के आस-पास बताई जा रही है।
सिंधिया परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद
संपत्ति को लेकर दरार राजमाता विजयाराजे सिंधिया के जमाने से ही प्रारंभ हो गया था। मामला राजमाता की दो वसीयतों में अटका है। राजमाता ने वसीयतों में अपनी संपत्ति से बेटे माधवराव सिंधिया और पोते ज्योतिरादित्य को भी दरकिनार कर दिया था। इसका एक हिस्सा उन्होंने अपनी तीन बेटियों उषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे के नाम कर दिया था। अपने जीते जी माधवराव अदालती मामले लड़ते रहे। अब ये काम ज्योतिरादित्य कर रहे हैं। दूसरी और ज्योतिरादित्य की तीन बुआ हैं।



