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Dehradoon: हर किसी का सपना होता है, सरकारी अफसर बनने का लेकिन किस्मत और मेहनत ही इस मुकाम पर पहुचती है। कई लोग तो अपनी परिस्थिति देखकर पीछे हट जाते है, लेकिन कई स्टूडेंट्स अपने जुनून से परीक्षा को पास कर अपने सपनो को पूरा कर लेते है। एक ऐसी बेटी की कहानी बताने जा रहे है, जिसने सपना तो देखा लेकिन जब पूरा हुआ तो उसके पास खुशी के आंसू नही गम के आंसू थे आंखों में।
यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा (UPSC Exam) पास करने वाली मोनिका (IAS Monika Rana) उत्तराखंड (Uttrakhand) की रहने वाली हैं। मोनिका बचपन से ही पढ़ाई में बहुत होशियार थीं। बचपन में उनके माता-पिता का सपना था कि बेटी एक दिन सरकारी अधिकारी बनकर माता पिता का नाम रोशन करेगी। मोनिका ने 5वीं की पढ़ाई दून के स्कॉलर्स होम से की।
जन्म कहा हुआ
मोनिका उत्तराखंड में देहरादून जिले के गांव नाडा लाखामंडल की हैं। मोनिका बचपन से ही पढ़ाई में होनहार थीं। माता-पिता (Mother-Father) का सपना था, बेटी एक दिन सरकारी अधिकारी (Government Officer) बनेगी। पिता का सपना था उन्हें अधिकारी बनते देखें। माता पिता के गुजर जाने के बाद उनकी जिंदगी रुक सी गई।
मोनिका की माता-पिता के स्वर्गवास के बाद उनकी बहन दिव्या ने उन्हें संभाला। मोनिका ने इसके बाद साल 2015 में मद्रास मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई की थी। मोनिका के पिता गोपाल सिंह राणा आईएफएस (IFS) थे और वन संरक्षक के पद पर तैनात थे। मोनिका की बहन दिव्या यूनियन बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। मोनिका मूल रूप से जौनसार-बावर क्षेत्र से हैं। मोनिका ने दिल्ली में रहकर यूपीएससी (UPSC) की तैयारी की थी। मोनिका के पिता गोपाल सिंह राणा इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (Indian Forest Service) में कार्यरत थे।
मोनिका ने 5वीं तक की शिक्षा दून के स्कॉलर्स होम से ली। 6ठी से 12वीं तक की पढ़ाई सेंट जोसेफ स्कूल हुई। सब ठीक चल रहा था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। ज़िंदगी ऐसे ही कहां चलने वाली थी। मोनिका की ज़िंदगी में पहाड़ टूटने सा हादसा हुआ। उन्होनी को भला कौन टाल पाया है और दुःख का पहाड़ भी खुद को ही झेलना पढता है। मोनिका अपने अंदर से बिखर गई थी।
पिता गोपाल सिंह राणा और मां इंदिरा राणा की साल 2012 में सड़क दुर्घटना में देहांत हो गया। सारा परिवार बिखर गया। उस समय बहन मसीहा बनकर उसकी हिम्मत बड़ाई, उसके होसलो को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। अपने सपनो से पीछे नही हटना है हर समय साया बनकर अपनी बहन का हौसला बढ़ाती चली गई। मोनिका को कभी अकेला महसूस नही होने दिया। बहन दिव्या राणा ने उनका हौसला बढ़कर सको आगे कदम बढ़ाने की ओर प्रेरित किया। उसकी बहन दिल्ली के यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया में मैनेजर हैं।
नम आंखों से किया माता पिता को याद
यूपीएससी में 577 रैंक (Rank In UPSC) लाने के बाद डा. मोनिका राणा को जहां सगे संबंधियों और रिश्तेदार उनके घर पर बधाई और मिठाई खिला रहे थे, लेकिन मोनिका की नजरें तो किसी और को ही ढूंढ रही थी। जीत के जश्न में वो अकेला महसूस कर रही थी। वहीं मोनिका की आंखे नम दिखाई दी। सबके चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन मोनिका का चेहरा उदास था। माता पिता के बिना वो खुद को अकेला महसूस कर रही थी। भावुक भी नजर आई।
Honoured by the Deputy Collector Tmt Dr. Monika Rana Sharma IAS for rendering humanitarian service through JUNIOR RED CROSS The Nilgiris on Teachers'Day pic.twitter.com/PSO5I01kE8
— Saravana chandar (@SaravanaChandar) September 7, 2020
मोनिका ने बताया कि काश, उसके माता-पिता आज जिंदा होते तो वह अधिक खुश होती। आईएफएस में मोनिका के पिता गोपाल सिंह राणा और मां इंदिरा राणा का 2012 में सर से साया उठ गया था। मोनिका ने बताया कि वह अपने माता पिता का सपना पूरा कर रही हैं क्योंकि उनके पिता ने दोनों बहनों को खुद के पैरों पर खड़े रहने का सपना देखा था। माता पिता की गुजर जाने के बाद उनका पूरा साथ बहन दिव्या राणा ने दिया।
इंटरव्यू (UPSC Interview) में लगा 40 मिनिट
मोनिका ने बताया कि यूपीएससी का इंटरव्यू दिल्ली में हुआ। जिसमें 40 मिनट का वक्त लगा। इस दौरान उनके हेल्थ सेक्टर को लेकर काफी प्रश्न पूछे गए। हेल्थ सेक्टर को कैसे बेहतर करना है, इस बारे में काफी प्रश्न पूछे गए। साथ ही हेल्थ एजुकेशन और कम्यूनिटी मेडिशन को आगे कैसे बढ़ाया जाए इस पर जोर दिया गया।
लिखना और चित्र बनाना पसंद
हर किसी की पसंद अलग ही होती है। मोनिका (Monika Rana) ने बताया कि उन्हें स्टार्टिंग से ही लिखना काफी पसंद रहा है। इसके अतिरिक्त चित्रकला भी उनकी पसंदीदा है। गार्डनिंग को वह शुरू से ही बेहतर मानती हैं और जब भी समय मिलता है, तो घर के गार्डन में समय बिता देते हैं। घर मे लगे गार्डन को भी समय देती है।
मोनिका के जीवन (Minika Rana Life) मे इतना कुछ हो गया। लेकिन हिम्मत नही हारी, माता पिता के सपने को पूरा करने के लिए आगे बढ़ते चली गई। किस्मत के रूठने के बाद भी मोनिका ने हौसला नहीं हारा। डॉक्टरी (Doctor) की पढ़ाई और फिर सिविल सेवा (Civil Service) की तैयारी की। आखिर में में सफल होकर ही मानी और दुसरो के लिए सफलता की मिसाल पेश की। आह उनके माता पिता होते, तो उन्हें अपनी बेटी पर नाज़ जरूर होता।
दो बार हुई असफल
इससे पहले मोनिका दो बार सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam) दे चुकी हैं। 2015 और 2016 में, लेकिन सफल नहीं हो पाई। लगातार असफलता के बाद दिल्ली में रहकर मोनिका ने सिविल सेवा की तैयारी की और 2017 में अपना लक्ष्य पा लिया। मोनिका मूल रूप से जौनसार-बावर क्षेत्र से हैं। मोनिका कहती हैं कि वह स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाना चाहती हैं।
मोनिका ने स्टूडेंट्स (Students) को सलाह देते हुए कहा कि, कोचिंग में जो आपको पढ़ाया जा रहा है, उस पर आपको खास ध्यान देना चाहिए। इससे आपकी आगे की नीव मजबूत होती है। नीव मजबूत होने पर आप हर विषय की गहराई आसानी से समझ पाएंगी। इसके बाद सेल्फ स्टडी करें, इससे जो आपने पढ़ा है, वह मजबूत होगा।



