
File Image
Bhopal: भारत की बेटियां देश और विदेश में धमाल मचा रही है। देश से बाहर विदेशी प्लेटफॉर्म पर देश का नाम रोशन कर रही है। भारत की इस बेटी ने UN में तक डंका बज़ा दिया है। भारत की बेटियां बड़ी बड़ी नामी कंपनियों में इंजीनियर और अधिकारी है। ये बेटियां ऊँचे पदों पर विराजमान है।
आज भारत की लड़कियों ने हर क्षेत्र में साम्याबी की मिसाल पेश की है। परंरु आज की कहानी एक ऐसी बेटी की है, जिसने अपनी लाखो की IT कंपनी की जॉब छोड़के कुछ ऐसा किया की पूरे देश को आज गर्व हो रहा है। यह कहानी है शिल्पी गर्गमुख की। शिल्पी को जिन्हें 5 अक्तूबर 2016 को देश की पहली प्रादेशिक सेना ऑफिसर लेफ्टिनेंट बनने का गौरव प्राप्त है।
शिल्पी गुर्गमुख ने बिहार के कटिहार में नवोदय विद्यालय में दसवीं और बाहरवीं में टॉप करने के बाद बिरसा प्रौद्योगिकी इंस्टीट्यूट से केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। फिर उन्होने हैदराबाद में IT Company में नौकरी की, परन्तु वे अपने जीवन में कुछ और ही करना चाहती थी।
शिल्पी के दो भाई सशक्त बल में कार्यरत हैं और देश की सेवा कर रहे है, उनकी ऑलिव ग्रीन वर्दी और सेना का रुतवा शिल्पी को बहुत आकर्षित करता रहा था। उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए बहुत मेहनत की और ओएनजीसी अंकलेश्वर में केमिकल इंजीनियर के पद के लिए चुनी गई।
इसी से उन्हें पता चला कि ओएनजीसी के माध्यम से वे क्षेत्रीय सेना में जा सकती हैं। इस माध्यम से शिल्पी ने अपने सपने को पूरा होते हुए देखा। क्षेत्रीय सेना में जाने के लिए शिल्पी में कड़ी मेहनत कर इसके लिए जरूरी जांच और परीक्षा पास की। इस उपलब्धि को हासिल करते हुए वह देश की पहली प्रादेशिक सेना ऑफिसर लेफ्टिनेंट बनने का गौरव हासिल किया। यह किस्सा साल 2016 का है और आज शिल्पी देश सेवा में जुटी हुई है।
आपको बता दे की प्रादेशिक सेना देश की सेवा का ही एक भाग है, जो भारतीय सेना का हिस्सा है। इसके लिए हर साल कुछ दिनों के लिए स्वयंसेवको को कुछ दिन सैनिक प्रशिक्षण की ट्रेनिंग दी जाती है। इन्हें इसलिए ट्रेनिंग दी जाती है ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें देश की रक्षा के इस सेना का उपयोग किया जा सके।
Moment of Pride !!
Best wishes to @ONGC_ engineer #ShilpiGargmukh for becoming First lady officer to be inducted into the Territorial Army. pic.twitter.com/ejc9xGKT5H— Prasar Bharati प्रसार भारती (@prasarbharati) October 6, 2016
ऐसे ही हाल ही में खबर आई थी की उड़ीसा के एक छोटे से आदिवासी जनजातीय गांव की रहने वाली अर्चना सोरेंग, जिन्हें कुछ दिनों पहले ही कोई नहीं जानता था, परन्तु आज इस बेटी को देश ही नहीं पूरे विश्व में पहचान प्राप्त हुई है। बात यह है की अर्चना को विश्व कल्याण के लिए काम करने वाली संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अपने सलाहकार समूह में शामिल किया है।
अर्चना और उनका परिवार पीढ़ियों से पर्यावरण की देख रेख और उपाय करता आया है। अर्चना ने परिवार के इस नेक काम को कड़ी मेहनत से पढ़ाई कर प्रोफेशनल में बदल लिया है। और अब वे अब दुनिया भर के पर्यावरण को सुधारने का काम करेंगी। छोटे से गांव से आकर इतनी ऊंची उड़ान अर्चना ने भरी है कि आज पूरा देश उन्हें सलाम कर रहा है।
Today is #IndianTerritorialArmyDay 9th Oct
CONGRATULATIONS! Shilpi Gargmukh,an engineer with @ONGC_& FIRST WOMAN OFFICER of #TerritorialArmy pic.twitter.com/FLliXcRuW8— ALL INDIA RADIO आकाशवाणी (@AkashvaniAIR) October 9, 2016
मीडिया रिपोर्ट्स बताती है की अर्चना उड़ीसा के एक छोटे से जनजातीय गांव खड़िया की रहने वाली हैं। उनका गांव और जिला पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता है, जहां शिक्षा का भी आभाव है, लेकिन अर्चना ने इन सभी समस्याओं से न केवल पार पाया बल्कि अब गांव के लोगों को भी इन समस्याओं से छुटकारा दिलाने के प्रयास कर रही हैं।
बिहार के पटना वूमेंस कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने मुंबई के टीआईएसएस से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की और इस दौरान छात्रसंघ की अध्यक्ष भी रहीं। बता दे की उन्होंने वकालत की भी पढ़ाई की है। जलवायु परिवर्तन पर काम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के सलाहकार के रूप में जिस 7 सदस्ययी युवा सलाहकार समूह का चयन हुआ है, उनमें अर्चना भी है।



