
Jaipur: आपने ऐसे अनेक किस्से जरूर सुने होंगे, जहाँ युवा ने कॉरपोरेट नौकरी छोडक़र खेती का रास्ता करना शुरू किया और सफल हो गया या फिर खाने का ठेला लगा कर अच्छी कमाई कर रहा है। यह कहानी थोड़ी अलग है, जिसमें एक युवा ने कारपोरेट नौकरी छोडक़र गांव के प्रधान का चुनाव लड़ा और जीत गई। हम बात कर रहे है एक ऐसी लडक़ी की जो देश की पहली महिला सरपंच बनी और जीत गई।
इस किस्से में देश के राज्य राजस्थान की छवि राजावत (Chavi Rajawat) ने लोगों के लिए एक मिशाल कायम कर दी है। छवि राजावत ने गांव की भलाई के लिए त्याग किया और कई चुनौती का सामना भी किया। उन्होंने कंपनी की नौकरी ही छोड़ दी। छवि एक हिंदी अखबार को बताती है की उन्हें अब ऐसे साथी की तलाश है। जो जनसेवा में उनके हर कदम पर मिल चल सके।
छवि ने राजस्थान के गांव सोढ़ा (village soda) की सरपंच बनक र चार साल में ही उसकी सूरत बदल दी। गांव में सबसे बड़ी समस्या पानी की थी। क्योंकि गांव सूखाग्रस्त था। गांव में 40 से अधिक सडक़े बनवाई गई। गांव को सौर ऊर्जा पर निर्भरता बढ़वाने के लिए जैविक खेती पर जोर दिया गया। अब छवि का गांव दूसरे गांवों के लिए रोल मॉडल बन गया है।
Stage being set for Sarpanch Chavi Rajawat.. service since 2010 in Rajasthan #adobelife pic.twitter.com/c1fxsW9pOQ
— Sonal Dawar (@Sonal_Dawar) October 26, 2017
छवि ने अखवार को बताया की सरपंच (sarpanch) बनने के बाद उनके लिए सबसे बड़ी समस्या पानी की थी। इसके लिए बहुत पैसा चाहिए था। सरकार ने पैसा देने से मना कर दिया था। निजी कंपनियोंं ने भी कोई सहायता नहीं दी थी। अंत में हारकर छवि ने अपने पिता, दादा और तीन दोस्तों के प्रयास से चार दिन में 20 लाख रुपए एकत्र किए।
इसके बाद उसका इंटरव्यू रेडियो पर हुआ। छवि की बात से प्रभावित होकर दिल्ली की महिला ने 50 हजार रुपए का चेक भेज दिया। इसके बाद छवि ने तालाब खुदवाया। जब आसमान से बरसात हुई, तो पानी एकत्र हो गया। बस ऐसे ही सपना साकार हो गया। छवि का कहना है कि उन्हें अपने परिवार से सबसे बड़ा सहयोग मिला।
Ms Chavi Rajawat, youngest sarpanch started the session post lunch amongst thunderous applause #PMNC18 pic.twitter.com/1ZJrevIaaM
— PMI North India Chapter (@PMINIC) October 13, 2018
गांव वालों ने जिस तरह से मुझे सरपंच बनाया कुछ साल पहले मेरे दादा जी को भी इस तरह से सरपंच बनाया था। मैने सरपंच का चुनाव जीतकर गांव के हालात बदलने का निर्णय लिया। उनके सरपंच बनने से पहले गांव में शिक्षा का स्तर 50 प्रतिशत से कम था। जो कि फिलहाल काफी अच्छी स्थिति में है। हमने गांव में शिक्षा का स्तर 100 प्रतिशत तक पहुंचाया।
What an inspirational leader she is! Listening to achievements of #ChaviRajawat as village Sarpanch at #PMNC18 pic.twitter.com/2JuFxxtdlB
— Rajarama Rao Bannengala🇮🇳 (@rbanneng) October 13, 2018
आज के समय में छवि गांव में किसी मसीहा से कम नहीं है। लोगों का लगता था कि उनकी सरपंच सिर पर पल्लू, चेहरे पर संकोच और शब्दो की हकलाहट होगी। लेकिन लोगों ने देखा तो बिल्कुल उलट था। उनके सामने खड़ी सरपंच बिल्कुल मॉडल की तरह दिख रही थी। आज यही उनके लिए रोल मॉडल है।



