महिला हिन्दू डॉक्टर ने दम तोड़ रहे मुस्लिम पेशेंट के लिए क़लमा पढ़ा, अब डॉक्टर की तारीफ हो रही

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Female Doctor India
I felt that she was having some problems in leaving the earthly abode. Then, I slowly recited Kalima in her ears, Dr Rekha Krishna talks about reciting the Islamic prayer for a Muslim COVID-19 patient on the latter’s deathbed at a hospital in Palakkad.

Dr Rekha Image Credits Twitter and Other is Demo Image

Delhi: देश में कोरोना का खतरा अब भी बना हुआ है और लोग इसके डर के साये में जी रहे है। अनेक लोग संक्रमित होने के बाद अस्पताल में इलाज़ के दौरान अपने प्राण गवा चुके है। ऐसे में अनेक डॉक्टर मिसाल पेश कर रहे है। इस संकट के दौर में लोग धर्म-सम्प्रदाय को भूल कर इंसानियत की मिसाल भी दे रहे हैं।

हाल ही में एक दिन को छू जाने वाली कहानी केरल से सामने आई, जहां एक डॉक्टर ने अपने फ़र्ज़ से ऊपर उठ कर इंसानियत का काम किया। केरल स्थित पल्लकड़ ज़िले से जो ख़बर सामने आई है, वह एक मिसाल बनकर उभरी है। आज लोग इस किस्से को उदाहरण की तरह एक दूसरे को बता रहगे है और सोशल मीडिया में भी यह मसला छाया हुआ है।

केरल के ज़िले के पट्टांबी इलाके में स्थित सेवाना हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में जहां एक हिंदू महिला डॉक्टर ने अंतिम सांसें गिन रही मुस्लिम कोरोना मरीज को क़लमा (मुस्लिम धर्म के मुताबिक़) पढ़ कर सुनाया। कोरोना से बीमार हुई मुस्लिम महिला दो हफ्ते से एसएचआरसी में वेंटिलेटर पर थी और उसके रिश्तेदारों को आईसीयू में जाने की अनुमति नहीं थी।

मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, अस्पताल में कार्यरत डॉ रेखा कृष्णा ने बताया कि मरीज को 17 मई को वेंटिलेटर से बाहर निकाला गया था, क्योंकि उनके बचने की उम्मीद नहीं थी और उनके परिजनों को इस बात की ख़बर थी। रेखा मीडिया में बताया की, जैसे ही मैं मरीज़ के पास पहुंची, मुझे लगा कि उन्हें दुनिया को अलविदा कहने में मुश्किल हो रही है, चूंकि वे मुस्लिम थीं।

उन्होंने आगे कहा की इसके बाद मैंने धीरे-धीरे उनके कानों में कलमा पढ़ा। कलमा सुनने के बाद मैंने उन्हें गहरी सांस लेते हुए देखा और फिर वह स्थिर हो गईं। डॉ कृष्णा ने आगे बताया कि उन्होंने ऐसा कुछ भी करने के बारे में पहले से नहीं सोचा था। यह सब अचानक हुआ। उन्होंने कहा की मैं ऐसा इसलिए कर पाई क्योंकि मैं दुबई में पैदा हुई और वहीं पली-बढ़ी।

उन्होंने बताया की दुबई में रहने के कारण मैं इस्लामिक रीति-रिवाजों को जानती हूं। मेरे हिंदू होने के कारण गल्फ में मेरे साथ कभी भेदभाव नहीं हुआ था। आज मैंने ऐसा करके केवल गल्फ से मिले सम्मान को लौटाया है। डॉ रेखा कृष्णा के अनुसार, यह कोई धार्मिक नहीं बल्कि इंसानियत का कार्य था। उन्होंने कहा कि कोरोना से संक्रमित मरीजों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे ख़ुद को अकेला और अलग-थलग फील करते हैं। ऐसे में हमें उनकी पूरी सहायता करनी चाहिए।

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