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Bhopal, Madhya Pradesh: देश में तब्लीगी जमात मरकज़ के जलसे और कार्यक्रम में लोगो के जमाव आउट फिर वायरस महामारी के फैलाव के बाद से देश और हर प्रदेश बहुत चौकस है। ऐसे में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) में हर साल होने वाले मुस्लिम समाज के दुनिया के दूसरे सबसे बड़े धार्मिक समागम मतलब आलमी तब्लीगी इज्तिमा (Bhopal Tablighi Ijtema) इस साल नवंबर के अपने तय दिनों में नहीं होगा।
ऐसा पहली बार है, जब राजधानी भोपाल में पिछले 72 साल से सालाना जारी इज्तिमा कोरोना के कारण स्थगित किया गया है। समाज का ये सालाना धार्मिक कार्यक्रम हर साल भोपाल में ही आयोजित होता है। आयोजन में दुनिया भर से लोग आते हैं। इज्तिमा के दौरान 4 दिनों मज़हबी तकरीर होती हैं। हालांकि, इस बार तेजी से बढ़ रहे कोरोना को देखते हुए, इज्तिमा प्रबंधन और उलेमा ए दीन ने आयोजन को अपने तय दिनों में न करने का फैसला लिया है।
खबर मिली है की इज्तिमा प्रबंधन (Bhopal Tablighi Ijtema Management) से जुड़े लोगों की मानें तो इस साल इज्तिमा 27 से 30 नवंबर तक प्रस्तावित था। हर साल की तरह इस बार भी इस समय में लाखों मुस्लिम ज़ायरीन राजधानी भोपाल पहुंचते। इसमें इज्तिमा प्रबंधन और प्रशासन की ओर से इंतज़ाम कराया जाता है। लेकिन कोरोना के कारण उलेमा ए दीन कमेटी ने खुद ही इसका आयोजन टाल दिया।
इसका कारण है की अब तक इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा करने की परमिशन शासन द्वारा नहीं दी गई है। यही कारण है कि, बड़ी संख्या में आने वाले लोगों की व्यवस्था प्रशासन नहीं कर सकता और प्रशासन ने भी अब तक इज्तिमा को लेकर नए नियम और व्यवस्था नहीं की है। साथ ही, दूसरे देशों और राज्यों से आने वाले लोगों से संकर्मण के फैलाव का खतरा भी रहता। इन सभी चीजों वजहों को देखते हुए इज्तिमा आयोजन के स्थगन का फैसला लिया गया है।
आपको जानकरी हो की हर साल होने वाला ये आलमी इज्तिमा पहले शहर की सबसे बड़ी मस्जिद यानी ताजुल मसाजिद में होता था, लेकिन एक समय ऐसा आया कि, जायरीनों की तादाद बढ़ने के कारण ये जगह कम पड़ने लगी। इससे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी डगमगा जाती थी, जिसे देखते हुए इज्तिमा प्रबंधन द्वारा इसे शहर से बाहर खुले इलाके में ले जाना सुनिश्चित किया।
इसी के चलते पिछले कुछ सालों से हर साल शहर के बाहर ईटखेड़ी में तब्लीगी इज्तिमा आयोजित किया जा रहा है। बता दें कि, आयोजन में दुनियाभर से जमातें बनाकर लोग भोपाल आते हैं। आयोजन में 10 लाख से अधिक समुदाय विशेष के लोग शामिल होते हैं।



