मामा ने भांजी की शादी में मायरा भरा, 3 करोड रु, 41 तोला सोना, 16 बीघा जमीन और 30 लाख का प्लॉट

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Mayra ceremony
Mama giving their niece wedding gifts worth over Rs 3 crore in Nagaur district. The video of the ceremony is going viral on social media.

Photo Credits: Twitter Video Crap Image

Nagaur: दोस्तों शादी की रस्में भी अजीब होती है। जिनमें कुछ रचना ऐसी हैं, जो ट्रेडिशनल एवं पुश्तैनी चली आ रही है। जिन्हें कोई बदल नहीं सकता, परंतु जब भुई आज उन्हें निभाया जाता है, तो उनमें भावनाएं एवं प्यार कूट-कूट के भरा होता है। ऐसे में यदि कोई रिवाज किसी दुल्हन के लिए उसके मायके पक्ष से जुड़ा होता है, तो उसके लिए इस की भावनाओं की कीमत अनमोल होती है।

ऐसा ही एक रिवाज होता है राजस्थान (Rajasthan) में जिसमें विवाह के उपलक्ष में बहन के मायके पक्ष से शगुन के तौर पे मायरा भेजा जाता है और उसके बाद ही शादी के रस्म संपन्न किए जाते हैं और इसी रस्म से जुड़ा एक मायरा आज देश भर में प्रसिद्ध हो गया।

इसमें भाइयों ने अपनी बहन को डॉलर से सजाई हुई चुनरी के साथ-साथ लाखों रुपए नगद के साथ 41 तोला सोना एवं चांदी के लाखों रुपए के जेवर (Jewellery) भी तोहफे के तौर पर दिए हैं। जिसने भी देखी एवं सुनी ये खबर वह आश्चर्यचकित रह गया आइए जानते हैं डिटेल में, गिफ्ट में क्या कुछ मिला इस बहन को और किस शादी के उपलक्ष में यह सारा मायरा भाइयों ने गिफ्ट किया था।

राजस्थान मारवाड़ा का रिवाज है कि, भांजे एवं भांजी की शादी में ननिहाल पक्ष से आता है मायरा

दोस्तों जिस रिवाज की हम बात कर रहे है, उसे मायरा कहते हैं और मायरा (Mayra Ceremony) एक विशेष परिस्थिति में ही दिया जाता है। जानकारी के अनुसार राजस्थान के गांव में आज भी यदि अपनी बहन के बेटा या बेटी अर्थात जिसे भांजा या भांजी के नाम से जाना जाता है।

यदि उनकी शादी होती है तो मामा (Mama) पक्ष से मामा अपनी बहन एवं भांजे-भांजीयों के लिए तोहफे से सजा हुआ मायरा लेकर आते हैं। यह रस्म हर कोई अपनी अपनी हैसियत के अनुसार जरूर अदा करता है और गांव में इसका काफी महत्व माना जाता है। यह खबर नागौर (Nagaur) जिले के अंतर्गत आने वाले जायल तहसील के अंदर स्थित छोटे से ग्राम झोड़ेली का है। जहां एक मामा ने अपनी भांजी की शादी में 3 करोड़ 21 लाख रुपया का मायरा भरा।

करोड़ों का मायरा देख लोगो करने लगे चर्चाएं

जानकारी के अनुसार इस मायरा की रस्म में 41 तोला सोने के आभूषणों के साथ साथ 81 लाख रुपये की नगद राशि, नागाौर में रिंग रोड पर 30 लाख का प्लॉट, 16 बीघा खेत, 3 किलो चांदी, एक नया ट्रैक्टर-ट्रॉली धान से भरी हुई और एक स्कूटी मायरे में दी है। करोड़ों रुपए का यह मायरा देखकर गांव का हर एक व्यक्ति हैरान रह गया और आसपास के कई गांव में इसकी चर्चा आग की तरह फैल गई।

इसी के साथ एक भाई ने अपनी बहन याने दुल्हन की मां को रुपयों से सजी सीधी ओढ़ाई। राजस्थान में यह प्रथा काफी वर्षों से चली आ रही है और यह चलन लोग खुशी खुशी मनाते हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि राजस्थान अपनी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता के लिए जाना जाता है उसी की एक झलक आप मायरा में देख सकते हैं।

बुरड़ी गांव से झोड़ेली गांव ले गए मायरा

बताया जा रहा है कि झोड़ेली गांव के रहने वाले घेवरी देवी और भंवरलाल पोटलिया के बेटी अनुष्का की शादी बीते दिन रचाई गई थी। बेटी अनुष्का का ननिहाल बुरड़ी गांव का है। अनुष्का के ननिहाल में जब उसके शादी की बात बताई गई तो अनुष्का के नाना भवरलाल गरवा अपने तीनों बेटे जिनका नाम हरेंद्र, रामेश्वर और राजेंद्र है चारों लोग एक साथ मिलकर करोड़ों रुपए का मायरा लेकर अपनी बहन के घर अपनी भांजी के विवाह में पहुंचे।

लोगों ने जब मायरे की राशि को देखा तो हैरान रह गए वही भवरलाल गरबा की बेटी और तीनों भाइयों की बहन घेवरी देवी अपने भाई और पिता के इस सम्मान भरे उपहारों को देखकर भावुक हो गए।

बताया जा रहा है कि घेवरीदेवी के पिता भवरलाल गरबा स्वयं अपने सिर पर नोटों से भरी थाल रखकर विवाह स्थल तक पहुंचे। बताया जा रहा है कि इस रसम को भात भरना भी कहा जाता है। लोगों का मानना है कि यह रस्म राजस्थान के नागौर में काफी ज्यादा प्रचलित है इसके मायने काफी ज्यादा है।

मायरे की शुरुआत

बताया जा रहा है कि राजस्थान के नागौर में मायरे की रस्म की शुरुआत नरसी भगत के जीवन काल से प्रारंभ हुई थी। लोगों का कहना है कि आज से 600 वर्ष पूर्व नरसी का जन्म गुजरात के जूनागढ़ तहसील में हुआ था। वह हुमायूं के शासनकाल के थे।

नरसी एक दिव्यांग बालक थे, जो ना बोल सकते थे और ना ही सुन सकते थे। नरसी अपनी दादी के साथ रहते थे साथ में उनके भाई भाभी भी रहते थे, भाभी का स्वभाव उनके प्रति काफी ज्यादा खराब था। जैसे तैसे एक संत की कृपा से उनकी आवाज और सुनने की शक्ति वापस आ गई। धीरे-धीरे समय बीतता गया और उनका विवाह किया गया।

विवाह करने के बाद उनकी पत्नी का देहांत हो गया उनकी एक बार फिर शादी की गई, तो उनकी भाभी ने उन्हें घर से निकाल दिया। इसके बाद उन्होंने सारी मोह माया को त्याग कर संयास ले लिया। लोगों का मानना है कि उनकी याद मैं मामा अपनी भांजे और भांजी यों को मायरा देते हैं, जिससे उनका जीवन ठीक तरह से चल सके।

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