UP में काबा से फेमस हुई नेहा सिंह राठौर, बिहार से ख़ास कनेक्शन और हाल ही में चर्चा का विषय जानें

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Neha Singh Rathore
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Kaimur: भारत में कुछ ही लोग ऐसे हैं, जो समाज के हित के लिए आवाज उठाती हैं। यह कुछ लोग अपनी-अपनी तरह से भारत के भ्रष्टाचार, गरीबी सरकार के झूठे वादों के खिलाफ आवाज उठाते हैं। इन्हीं में से एक है नेहा राठौर जो बिहार की लोक गायिका के नाम से प्रसिद्ध है।

नेहा राठौर (Neha Singh Rathore) अपने गीतों के माध्यम से समाज के भ्रष्टाचार गरीबी का माहौल और सरकार के नीतियों के खिलाफ व्यंग के माध्यम से अपनी बात कहती हैं। नेहा अपनी इन्हीं बातों के कारण देश में चर्चा का विषय बनी हुई है।

नेहा सिंह राठौर ने अपने बिहार में का बा और यूपी में का बा (UP Me Ka Ba) के बाद नाम और शोहरत कमाया। बिहारी भाषा का इस्तेमाल करके व्यंग करती हैं देश दुनिया की बातें वे एक अलग ही अंदाज से कहती हैं, इसीलिए लोगों को उनका अंदाज काफी पसंद आता है। आज हम विस्तार से नेहा सिंह राठौर के बारे में जानेंगे।

नेहा सिंह राठौर

नेहा सिंह राठौर बिहार (Bihar) राज्य के अंतर्गत आने वाला कैमूर (Kaimur) जिले की निवासी है। वर्ष 1997 में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी है। उन्होंने अपने इस व्यंग के सफर की शुरुआत इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से किया। उन्होंने अपने व्यंग में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की काफी पोल पट्टी खोली। उनके इस व्यंग से वे चर्चा का विषय बन गई। साथ ही विवाद की स्थिति भी बनने लगी।

लोगों को उनके व्यंग काफी पसंद आते हैं, साथ ही जिन के खिलाफ बात की जाती है, उन्हें उनके इस व्यंग से काफी परेशानियां भी होती हैं। इसके बाद उन्होंने एक बार फिर एक गाना बनाया जिसका नाम “रोजगार देबा कि करबा ड्रामा” था। यह गाना यूपी और बिहार के बेरोजगार युवाओं के लिए था जब यह गाना रिलीज हुआ तो बिहार और यूपी में हाहाकार मच गया।

नेहा सिंह राठौर का निजी जीवन

बताया जा रहा है कि नेहा सिंह राठौर बिहार के कन्नौज जिले के अंतर्गत आने वाले रामगढ़ गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने अपने गाने का सफर वर्ष 2016 से प्रारंभ किया। अपने गानों में समाज के कारनामों और राजनीति की तरीके से खिंचाई की है। इस के बाद उन्होंने यूपी के अंबेडकर नगर के निवासी हिमांशु सिंह से विवाह कर लिया। इस प्रकार नेहा सिंह राठौर बिहार की बेटी और यूपी की बहू बनी।

लोकगीत ने बनाई विवाद की स्थिति

नेहा सिंह राठौर ने वर्ष 2020 में बिहार में काबा और यूपी में काबा के नाम से गाए हुए लोकगीत में काफी नाम कमाया। इसके साथ ही यह गाना काफी विवादित भी रहे। नेहा ने अपने गाने में महामारी के वक्त की सारी गाथाएं अपने व्यंगात्मक गीत में पिरो दिए।

गाना काफी वायरल हुआ था परंतु उतनी ही ज्यादा प्रशासनिक विभाग को परेशानी भी झेलनी पड़ी। यह गाना विवादित था और इस प्रकार नेहा सिंह राठौर विवाद में फंसी। नेहा की हिम्मत और उनके जुनून को देखकर समाज में एक नई क्रांति का आभास होता है।

यूपी में का बा पार्ट 1 के बाद आया पार्ट 2

नेहा प्रशासनिक विभाग की कार्यवाही से डरकर शांत नहीं हुई। उन्होंने एक बार फिर जंग की शुरुआत कर दी। नेहा ने बिहार में का बा पार्ट वन में महामारी की व्यवस्थाओं और हाथरस कांड के विषय में अपने शब्दों को व्यंग में बनाया। इसके बाद बिहार में का बा पार्ट 2 के माध्यम से उन्होंने कानपुर देहात में दीक्षित परिवार की घटना को व्यंगो के माध्यम से सुनाया जिससे एक बार फिर नेहा सिंह राठौर चर्चा में आई।

इसके बाद पुलिस के द्वारा उन्हें नोटिस भी दिया गया, पुलिस का मानना है कि नेहा सिंह राठौर के व्यंगात्मक लोकगीत से समाज में भ्रांतियां और सरकार के प्रति नकारात्मक विचार दिए जा रहे हैं जिसकी वजह से बाद में विवाद की स्थिति भी बन सकती है।

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