भारत का वीर सपूत, 21 साल बाद लंदन जाकर लिया जलियांवाला बाग का ब-दला

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Uddham singh story
Who was Udham Singh. Who Waited 21 Years to Avenge Man Behind Jallianwala Bagh. Story of Udham Singh in Hindi.

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Delhi: ऐसे वीर सपूत की बात कर रहे है जिनका नाम है, शहीद उधम सिंह, जिनका जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम गांव में हुआ था। सन 1901 में उधम सिंह की माता और 1907 में उनके पिता का नि-धन हो गया। इस घटना के चलते उन्हें अपने बड़े भाई के साथ अमृतसर के एक अनाथालय में शरण लेनी पड़ी।

उधम सिंह का बचपन का नाम शेर सिंह और उनके भाई का नाम मुक्ता सिंह था, जिन्हें अनाथालय में क्रमश: उधम सिंह और साधु सिंह के रूप में नए नाम मिले। जलियांवाला बाग कांड को कभी भुलाया नहीं जा सकता है, इस दिन अंग्रेजों ने बड़ी बेरहमी से एक बाग में उपस्थित हुए लोगों पर फा-यरिंग शुरू कर दी थी।

अंग्रेजों ने रॉलेट एक्ट के तहत कांग्रेस के सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू को हि-रासत में ले लिया था। जिसके विरोध में ये लोग पंजाब के अमृतसर में जलियांवाला बाग में प्रदर्शन कर रहे थे। उधमसिंह 26 दिसम्बर 1899–31 जुलाई 1940 भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी एवं क्रांति-कारी थे।

उन्होंने जलियांवाला बाग कांड के समय पंजाब के गर्वनर जनरल रहे माइकल ओड्वायर को लंदन में जाकर गो-ली मा-री। कई इतिहासकारों का मानना है कि यह साजिश ब्रिटिश अधिकारियों का एक सुनियोजित षड्यंत्र था, जो पंजाब पर नियंत्रण बनाने के लिए किया गया था।

13 मार्च 1940 की उस शाम लंदन का कैक्सटन हॉल लोगों से खचाखच भरा हुआ था। मौका था ईस्ट इंडिया एसोसिएशन और रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी की एक मीटिंग का। हॉल में बैठे कई भारतीयों में एक ऐसा भी था, जिसके ओवरकोट में एक मोटी किताब थी। यह किताब एक खास मकसद के साथ यहां लाई गई थी। इसके भीतर के पन्नों को चतुराई से काटकर इसमें एक रि-वॉल्वर रख दिया गया था।

वार्तालाप समाप्त होते ही सब लोग अपनी-अपनी जगह से उठकर जाने लगे। इसी दौरान इस भारतीय ने वह किताब खोली और रि-वॉल्वर निकालकर बैठक के अफसरों में से एक माइकल ओड्वायर पर फा-यर कर दिया। ड्वॉयर को दो गो-लियां लगीं और पंजाब के इस पूर्व गवर्नर की मौके पर ही प्राण चले गये।

हाल में अफरा तफरी मच गई। लेकिन इस भारत के वीर सपूत ने हिम्मत दिखाते हुए भागने की कोशिश नहीं की। उसे हिरासत में ले लिया गया। ब्रिटेन में ही उस पर मुकदमा चला और 31 जुलाई 1940 को उसे फां-सी हो गई। इस क्रांतिकारी का नाम उधम सिंह था।

अंग्रेजों ने उन मासूम लोगों पर दनादन गो-लियां चलाईं उस फाय-रिंग में बहुत लोगों की जानें गईं बाग का इकलौता एक्जिट गेट अंग्रेजों ने बंद कर रखा था। लोग बचने के लिए पार्क की दीवार पर चढ़ने लगे। कुछ जान बचाने के लिए कुएं में कूद गए। गोरों की इस साजिश से सब गुस्साए बैठे थे, पर इस घटना से एक इंसान था, जो इतना ज्यादा गुस्साया कि उसने जनरल डायर का अंत करने का मन मे विचार बना लिया था। ये थे सरदार उधम सिंह।

आजादी की इस ल-ड़ाई में वे गदर पार्टी से जुड़े और उस वजह से बाद में उन्हें 5 साल की जेल की सजा भी हुई। जेल से निकलने के बाद उन्होंने अपना नाम बदला और पासपोर्ट बनाकर विदेश चले गए। लाहौर जेल में उनकी मुलाकात भगत सिंह से हुई। उधम सिंह भी किसी भी धर्म में भरोसा नहीं रखते थे।

देश में सामूहिक नर-संहार की अब तक की सबसे बड़ी घटना कही जाने वाली जलियांवाला बाग कांड के बाद माइकल ओ ड्वायर को घटना के बाद लंदन भेज दिया गया था। जानकारी के मुताबिक ड्वायर को लगने लगा था कि वह अपने शासन काल में हिंदुस्तानियों के भीतर डर बैठाकर वापस अपने वतन आ गया है, लेकिन कोई था, जो उसका साये की तरह पीछा कर रहा था।

ये कोई और नहीं बल्कि भारत का शेर सिंह था, जो उधम के नाम से पासपोर्ट बनाकर लंदन आ चुका था। गो-ली चलाने के बाद भी उधम सिंह ने भागने की कोशिश नहीं की। उन्हें हिरासत में ले लिया गया। ब्रिटेन में ही उन पर मुकदमा चला और 4 जून 1940 को उधम सिंह को दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 1940 को उन्हें पेंटनविले जेल में फां-सी दे दी गई।

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