भारत की पहली महिला ट्रक ड्राइवर लॉ की डिग्री ले चुकी, मां बच्चों का पेट भरने के लिए ट्रक दौड़ा रही

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Yogita Raghuvanshi Driver
Story of Yogita Raghuvanshi Who is India's first woman truck driver. Yogita Raghuvanshi Owner and Driver of Rajhans Transport Co. Struggle Story Of Woman Truck Driver Yogita Raghuvanshi in Hindi. Lady Driver In India.

File Photo Credits: Twitter

Bhopal: हमारी जिंदगी में कई ऐसे पल आते हैं, जब एक फैसला पूरे भविष्य को बदल कर रख देता है। कई फैसले मजबूरी में लिए जाते हैं, तो कई के लिए बहुत सारी तैयारियां की जाती है। महिलाओं को शादी के बाद बहुत जिम्मेदारी निभानी जोती है, वो उन जिम्दारियों से पीछे नही हटती है। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी उनका डटकर सामना करती है, कभी हार नही मानती।

शादी के बाद लोग ये सोचने लगते गई कि महिलाएं केवल घर के काम मे ही अपने आपको ढाल लेती है, लेकिन ऐसा नही जब विप्पति आती है, तो वो गृहणी से बाहर निकलकर हर काम करने के लिए तैयार रहती है। फिर चाहे वो कुछ भी हो। महिलाओं की बात करें तो लोग ये समझते हैं कि वो सिर्फ घर-गृहस्ति के फैसले ही ले सकती हैं, लेकिन उनका क्या जो समाज की बंदिशों को तोड़कर आगे बढ़ती हैं और अपनी अलग पहचान बनाती हैं। उनका क्या जो अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाती हैं और लोगों के लिए प्रेरणा बन जाती हैं।

आज हम ऐसी ही प्रेरणात्मक महिला की बात करने जा रहे हैं। शहरों में गाड़ियों की ड्राइविंग सीट पर महिलाएं नजर आ जाती हैं। लेकिन यह संख्या हाईवे और ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत कम देखने को मिलती है। क्योंकि शहरों से दूर गाड़ियों, ट्रकों व अन्य वाहनों का स्टीयरिंग अब भी पुरुषों के ही हाथ में है। लेकिन एक महिला ऐसी है, जिसने समाज की इस सोच को तोड़कर ट्रक का स्टीयरिंग अपने हाथ मे ले ली है।

कैसे बानी पहली महिला ट्रक ड्राइवर

योगिता (Yogita Raghuvanshi) भारत की पहली महिला ट्रक ड्राइवर (India’s first woman truck driver) हैं। शहर-शहर में अपना ट्रक लेकर जाने से लेकर रोड में होने वाली कई परेशानियों तक योगिता सब कुछ संभालती रहती हैं। रास्ते मे बहुत दिक्कतें आती है, लेकिन योगिता ने कभी हार नही मानी। अपने काम को पूरी ईमानदारी के साथ पूरा करती है। उन्होंने पति के गुजर जाने के बाद ये काम संभाला। परिवार में 32 बच्चों की जिम्मेदारी थी, अब वो अकेली ही अपने बच्चों की जिम्मेदारी उठा रही हैं।

वो खुद लॉ की डिग्री ले चुकी हैं, लेकिन परिस्थिति को देखते हुये ट्रक ड्राइवर बनने के बारे में सोचा। उनका कहना था कि अगर वो वकालत में आगे बढ़तीं तो कई सालों तक बहुत संघर्ष करना पड़ता, लेकिन इस समय अपने बच्चों की खातिर कुछ भी काम करने को तैयारी है। वकालत में उन्हें बहुत कम पैसा मिलता या बिलकुल नहीं मिलता, लेकिन इस रोजगार ने उन्हें आत्मनिर्भर महिला बना दिया।

योगिता रघुवंशी (Yogita Raghuvanshi) को इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाते हुए, भारत की पहली महिला ट्रक ड्राइवर कहा गया था। उसने ट्रक ड्राइवर की सीट पर बैठकर सभी लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ दिया। इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भारत की पहली महिला ट्रक ड्राइवर योगिता रघुवंशी (Lady Truck Driver Yogita Raghuvanshi) को माना गया।

कैसे चुना चुनोतियाँ को

महिलाओं को जो कमजोर समझते है, उन्होंने सारी रूढ़ि वादी परम्पराओं को तो-ड़ते हुये सभी को मुंह तोड़ जवाब दिया। महिला हर क्षेत्र में काम करने को सक्षम है। एक महिला ट्रक ड्राइवर सबसे अलग ही दिखाई देती है। कठिन परिस्थितियों में जब उनके पति की सड़क दुर्घ-टना में देहांत हो गया, तो योगिता को एलएलबी की डिग्री (LLB Degree) होने के बाद भी ट्रक ड्राइवर की सीट पर बैठना पड़ा।

भारत को पहली महिला ट्रक ड्राइवर (India’s first Lady truck driver) योगिता रघुवंशी 18 साल पहले मिली थी। रूढ़िवादिता को तोड़ते हुए, योगिता इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कई लोगों के लिए एक रोल मॉडल हैं। हालाँकि, जब उसने उनके सफर के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया जब अपनी यात्रा शुरू की थी, तो वह बेड रोज़ नहीं थी। सड़क पर लोगों ने योगिता को अजीब निगाहों से ट्रक चलाते हुए देखा, लेकिन उसने उसे ऊंचा रखा और कभी नहीं रुकी और मुस्कुराते हुए यात्रा पर निकल गई।

योगिता के लिए ट्रक चलाने वाले ट्रक का मतलब था अपने बच्चों को अच्छे से पालन-पोषण करना उनको अच्छी शिक्षा दिलाना। जब वह ये सब याद करते हुए बताती है कि ट्रक की यात्रा पूरी करने में कई दिन लगते हैं, लेकिन मेरे बच्चों ने इसमें मेरा साथ दिया। योगिता ऐसी कई महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं। उसने चुनौती देना चुना, हम उसे सलाम करते हैं, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर।

बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

योगिता की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए। उन्हें जिंदगी में कई विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। वर्ष 2003 में उनके पति राजबहादुर की सड़क दुर्घ-टना में चल बसे। उन्हीं के अंतिम संस्कार पर जाते हुए योगिता के भाई का भी देहांत हो गया। योगिता उस समय बहुत अकेली पड़ गई थी। उनके सामने बच्चों को पालने के लिए कोई रास्ता नजर नही आ रहा था। इन सभी मुश्किलों का सामना करते हुए योगिता ने ट्रक ड्राइवर का पेशा चुना।

इस काम को करने में कभी नहीं लगा डर

योगिता कहती हैं कि ड्राइविंग के दौरान काफी सतर्क रहना पड़ता है। जरा सी चूक एक बड़े हादसा को दावत दे सकती है। हर समय चौकना रहना पड़ता है। अपने ड्राइविंग करियर में उन्हें कभी डर और खतरा का अनुभव नहीं हुआ। उनकी मेहनत और जुनून को देखते हुये इस काम को करने के लिए दूसरे ड्राइवर्स उनको प्रोत्साहित करते हैं। साथ ही, जब वो किसी ढाबे पर जाती हैं तो लोग उनका स्वागत करते हैं।

बच्चों की परवरिश

उनके बच्चे, याशिका और यशविन छोटे थे, और उन्हें अपने परिवार का समर्थन करना था। उन्होंने बताया, हमने ड्राइवर को नौकरी (Job) पर रखा था, लेकिन मैं उसकी वजह से बहुत नुकसान उठाना पढ़ रहा था। इन सबको देखते हुए मैंने कमान अपने हाथों में लेने का फैसला किया, अपने जीवन के नुकसान को लाभप्रदता में बदल दिया और महसूस किया कि जब आप कदम बढ़ाते हो, तो चीजें अच्छी हो जाती हैं।

योगिता की पहली यात्रा भोपाल से अहमदाबाद तक थी। वह बताती है, यह मेरे लिए नई चुनोती से कम नही था, लेकिन मैं इसके लिए तैयार थी। मैंने अपनी प्रवृत्ति और अपने आत्मविश्वास पर विश्वास किया। मुझे यह भी पता नहीं था कि कौन सी सड़क किस राजमार्ग तक जाती है। मैं लोगों से रास्ता पूछती रही और अपने सफर की ओर आगे बढ़ती रही। कभी पीछे पलटकर नही देखा।

चुनौती से हार नही माननी

वह आगे कहती है, मैंने अपना मन बना लिया था कि मैं बस अपने जीवन के साथ आगे बढ़ना चाहती हूं और अपने और अपने परिवार के लिए अच्छा करना चाहती हूं। मैं सभी बाधाओं को तोड़ते हुए आगे बढ़ती रही और आज मैं इस मुकाम पर पहुँच गई। यदि में और महिलाओं की हार्ट हार मान लेती तो शायद इस मुकाम पर ना होती। आपके द्वारा काम शुरू करने के बाद सब कुछ आसान हो जाता है, और जब आप ऐसा मानते हैं, तो आप अपनी सभी आकांक्षाओं को पूरा कर सकते हैं।

रूढ़िवादी सोच को तोड़ा

योगिता कहती है, मुझे बहुत अच्छा लगता है, लेकिन मैं अपने ट्रक के साथ देश भर के शहरों के बीच काम करती हूं। किसी को भरोसा नहीं होता कि मैं ट्रक चलाती हूं, चाहे तब या अब। वे मानते हैं कि मैं ड्राइवर की पत्नी हूं। हाइवे पर मैकेनिक, ढाबों पर पुरुष और अन्य जगहों पर मुझे लेयर करते हैं, लेकिन जब वे मुझे सीट पर बैठा देखते हैं, तो उनका नजरिया बदल जाता है। लेकिन इसमें से कोई भी मुझे कभी परेशान नहीं करता है। हमेशा दूसरे ड्राइवर ने साथ दिया। होसलो को मजबूत बनाया।

वह स्वीकार करती है कि उन्होंने पूरे अनुभव को व्यावहारिक रूप से लिया, और उनका मानना है कि उन्हें एक महिला के रूप में वैसा ही सम्मान मिलेगा जब वह समाज की रूढ़िवादी भूमिकाओं को तोड़कर आगे निकलने कोशिश करती है। हालांकि, उन्होंने समाज की रूढ़िवादी परम्पराओं को अनदेखा करने और आगे बढ़ने के लिए चुना।

महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

सड़कों पर ज्यादा महिलाएं नहीं हैं, योगिता का कहना है कि वे आगे आ रही हैं और इस काम को अपना रही हैं। वह कहती हैं, मैं उन्हें बताना चाहती हूं कि सभी के पास आत्म-विश्वास होना चाहिए और दुनिया के बारे में जो कुछ भी वह सोचती है, उसके प्रति समर्पण नहीं करना चाहिए। हम चाहें तो कुछ भी कर सकते हैं और सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ सकते हैं।

मैं अपने आप को शक्तिशाली महसूस करती हूं और मुझे गर्व है कि मैंने ऐसी नौकरी की है जो महिलाओं से दूर से जुड़ी हुई है। मैं अपने कार्यक्षेत्र में हर दिन चुनौतियों का सामना करना पसंद करती हूं और इससे मुझे काफी आत्मविश्वास मिलता है। लोगो की मंशा को गलत साबित कर आत्मनिर्भर बनाना ही सबसे बड़ी जीत है। लोग क्या कहेंगे इसको दरकिनारे करो। और अपनी मंजिल की ओर बढ़ते चलो। खुद सब कुछ अकेले संभलने वाली योगिता ने सहानुभूति की जगह संघर्ष को चुना। ऐसे साहसिक, कर्मठ और शक्तिस्वरूपा योगिता को तहे दिल से सलाम।

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