इस देश के किसान खेती में सोलर पैनल का उपयोग करके फायदा उठा रहे, भारतियों को भी प्रेरणा मिली

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Crops Under Solar Panels
Farmers in Kenya are Growing Crops Under Solar Panels. Kenya Plans to Boost Crop Yields by Using Agrivoltaics Technique.

Delhi: किसान वर्ग बहुत ही पिछड़ा हुआ वर्ग माना जाता है। परंतु कृषि विज्ञान जैसा विषय नव युवको में कृषि के प्रति रूचि को बढ़ाने में सफल रहा और वर्तमान में नव युवकों ने नई तकनीक का उपयोग और किसानों की मदद की है। जिससे काम करने में सरलता आईं।

नये नये उपकरण और मशनरी कि खोज कर किसान को खेती करने के लिए नई उड़ान दी। जिससे दिनभर का काम घण्टो में हो जाता है। साथ ही समय की बचत हुई। देश में इस वक्त सोलर ऊर्जा की एक नई लहर चल रही है और देश के किसान बड़ी संख्या में इस लहर में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। जिसका मुख्य कारण है सही जानकारी ना होना।

ये एक तथ्य है कि किसान भी देश में बिजली के एक बड़े उपभोक्ता हैं। सिंचाई से लेकर खेती-बाड़ी के कई तरह के कार्यो में वे काफी अधिक बिजली का इस्तेमाल करते हैं। कुछ राज्यों में किसानों को बिजली पर सब्सिडी तो दी प्रदान की जा रही है, लेकिन उनको बिजली भी कुछ ही घंटों के लिए मिल पाती है। जिससे उनको अनेको समस्या का सामना करना पड़ता है।

वैज्ञानिको की अनेको रिसर्च से पता लगाया गया कि किस तरह से फसल की पैदा वार को बढ़ाया जाता है। क्योंकि हर व्यक्ति कोई काम करता है, तो सिर्फ पेट भरने के लिए क्योंकि जीवन का आधार ही अनाज होता। अगर अनाज की पैदावार अच्छी नहीं होगी, तो लोग जीवन कैसे चलाएंगे। तो आज हम जानते है कौन कौन सी नई तकनीक का उपयोग हो रहा है।

सोलर पैनल का उपयोग

सौर ऊर्जा यह एक प्राकृतिक सोर्स है। इसकी ऊर्जा का इसका उपयोग कई जगहों पर किया जाता है। केन्या में किसान भाई फसलो के लिए सोलर पैनल का उपयोग कर रहे है। पैनल के नीचे लगी फसल कुछ इस तरह लहराते देखी गई मानो वह हवाओं से बाते कर रही हो।

फसल को देख कर किसानों के मन में एक उम्मीद की किरण दिखाई दी और उनके चहरो में काफी समय के बाद मुस्कराहट दिखी। वास्तव में किसान एग्रीवोल्टिक्स तकनीक का उपयोग कर रहे है। यह एक ऐसी विधि है, जिसमे जमीन का उपयोग करके सोलर पैनल लगाना और फार्मिंग की प्रक्रिया, दोनों एक साथ एक स्थान पर किया जा रहा है। इस तकनीक का उपयोग फसलों की उत्पादकता पर अच्छा असर देखने को मिल रहा है।

क्या है एग्रीवोल्टिक्स तकनीक

एग्रीवोल्टिक्स प्रक्रिया नई तकनीक नहीं है। पहली बार इसका उपयोग सन 1981 में सर एडॉल्फ गोएट्ज़बर्गर और आर्मिन ज़ास्ट्रो ने इसके बारे में बताया और प्रारम्भ भी इन्ही के द्वारा हुआ था। उसके बाद 2004 में जापान में इस तकनीक का प्रोटोटाइप बनाया।

वैज्ञानिको के अथक परिश्रम और कई सफल परीक्षणों के बाद वर्ष 2022 के आरंभ में पूर्वी अफ्रीका में प्रथम बार एग्रीवोल्टिक्स लॉन्च किया। यूके में शेफील्ड, यॉर्क और टीसाइड विश्वविद्यालयों, स्टॉकहोम एन्वायार्नमेंट इन्स्टिट्यूट, वर्ल्ड एग्रोफॉरेस्ट्री, सेंटर फॉर रिसर्च इन एनर्जी एंड एनर्जी कन्जरवेंशन और अफ्रिकन सेंटर फॉर टेक्नोलोजिकल स्टडीज़ के संयुक्त प्रयास का फल था। जो बहुत परिश्रम के बाद सामने दिखाई दिया।

किस तरह किया जाता है, इस प्रकिया का उपयोग

एग्रीवोल्टिक्स प्रक्रिया में, फसलों के बढ़ने और नीचे फलने-फूलने के लिए पैनलों को खूब ऊंचा लगाया जाता है और फसलों को कुछ इस प्रकार से छाया देते है जिससे फसल को तेज़ धूप से बचाया जा सके। सूरज की तेज रोशनी के कारण कुछ फसल बर्बाद हो जाती है। इसके माध्यम से रेन वॉटर हार्वेस्टिंग भी की जा सके।

यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड के एग्रीवोल्टिक (Agrivoltaics) के एक वैज्ञानिक डॉ. रिचर्ड रैंडल-बोगिस ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि सौर पैनल से पौधों और मिटटी में उपस्थित नमी को खत्म होने से बचाने के साथ साथ इनकी छाया से, उच्च तापमान के कारण होने वाली परेशानी और यूवी किरण से होने वाली छति से भी पौधे को बचाया जा सकते हैं।

कहा कहा विस्तार है, इस तकनीक का

विश्व के बहुत से देश इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे है। संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी जैसे कई अन्य देश, इस प्रणाली के उपयोग में ख्याति हासिल की हुई है। भारत में भी कुछ ऐसे राज्य है, जहाँ इस तकनीक का उपयोग हो रहा है।

उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्य है, जहाँ छोटे पैमाने के एग्रीवोल्टिक फार्म विकसित किये गये हैं। अभी भारत को इसके लिए लंबा सफर तय करना है। NSEFI और इंडो-जर्मन एनर्जी फोरम ने एक रिपोर्ट Share की है, जिसमें बताया गया कि भारत में एग्रोवोल्टिक इंस्टॉलेशन की कैपेसिटी अभी 10kWp और 3MWp के मध्य है।

भारत के जोधपुर और सीतापुर जैसे शहर जहां कभी कभी गर्मियों में तापमान बढ़ जाता है, वहां के रिसर्च संस्थानों से हेल्प प्राप्त करके किसानों ने एग्रीवोल्टिक्स (Agrivoltaics) का उपयोग किया है। इनसे फसलों को तेज़ रोशनी और गर्मी से बचाने के साथ ही खेतों में नाइट लैंप लगाने की सुबिधा दी।

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