कम पढ़े लिखे किसान ने खेती के लिए सस्ते थ्री व्हीलर ट्रेक्टर का अविष्कार किया, डिमांड आने लगी

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Sanedo Tractor Bullet Santi
Sanedo Tractor Made By Gujarat Innovator Upendra Rathore. The man Mansukhbhai Jagani is not an educated but invented 'Bullet Santi'.

Photo Credits: Twitter

Amreli, Gujarat: कृषि कार्य सम्बंधित किसी भी कार्य को करने के लिए आज के युग में खेती में इस्तेमाल किए जाने वाले औजार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। भारत के हर कोने में एक कला छुपी हुई है, जो धीरे धीरे बाहर आते जा रही है। किताबी ज्ञान से ज्यादा जरुरी होता है।

व्यवहारिक ज्ञान इस बात को कोई नही झुठला सकता कि शिक्षा एक उज्वल भविष्य के लिए जरुरी है। परंतु शिक्षा में किताबी ज्ञान और व्यवहारिक ज्ञान दोनों आता है। ऐसा कहा जाता है कि सभी व्यक्तियों में एक छुपी हुई कला होती है, जो माध्यम ढूंढता है, बाहर आने का परंतु किसी को मिलता है, तो किसी को नही। कुछ तो अपनी कला को पैसे के अभाव या विषम परिस्थितियों के चलते छोड़ देते है।

अपने सपनो को पीछे छोड़ किसी ओर दिशा में चले जाते है। अपने सपनो को पूरा करते हुऐ इस बात का उदहारण बने गुजरात के एक किसान जिन्होंने अपनी 10वी तक ही शिक्षा प्राप्त की और अपने पिता को गुरु बना कर एक अविष्कार किया। कठीन परिस्थितियों का भी सामना करते हुए अपने हौसलो को बुलन्द रखते हुए उन्होंने अविष्कार किया।

साधारण परिचय

गुजरात (Gujarat) राज्य के अमरेली गांव (Amreli Village) के निवासी उपेंद्र भाई राठौर (Upendra Bhai Rathore) करीब 15 साल से गांव वासियों के लिए जरुरत के उपकरण बना रहे है। उनके अंदर यह कला थी और उनके पिता ने उनकी इस कला को उड़ने के लिए पंख दिये। उनके पिता जी ने अपना यह गुण उनको उपहार स्वरूप दिया।

उपेंद्र के पिता जी की एक वर्क शॉप थी और उपेंद्र (Upendra Rathore) उनके साथ काम में मदद करते थे। मशीनी भाषा को उन्होंने अपने पिता जी से सीखी। उन्होंने मात्र 10वीं तक ही शिक्षा प्राप्त की। बात चीत के माध्यम से उन्होंने बताया कि बचपन से ही वह अपने पापा का हाथ बटाते थे। उनके छोटे छोटे काम करना उनको अच्छा लगता था।

वर्क शॉप के छोटे छोटे काम करने के दौरान उन्होंने देखा की सारे किसान भाई उनके पापा से कोई न कोई जरुरत के उपकरण बनवाने आते थे। फिर वह उन उपकरण को बनाने लगे और यही से उन्होंने शुरुआत की।

कहा से आया Sanedo Tractor बनाने का ख्याल

इन्टरनेट के माध्यम से मिला उपेंद्र भाई को अपने हुनर को बढ़ाने का मौका मिला। इसी दौरान साल 1994 में गुजरत के ही रहने वाले मनसुख भाई जगानी (Mansukhbhai Jagani) ने बुलेट सांती (Bullet Santi) का आविष्कार किया था। उस बुलेट से उनके दिमाग में सस्ता और टिकाऊ ट्रेक्टर बनाने का ख्याल आया और मोटरसाइकिल से किसान भाइयों के लिए एक छोटा-सा ट्रेक्टर (Moter Cycle To Small Tactor) बनाने की कोशिश की।

जिसमे उन्हें सफलता भी मिली। उपेंद्र भाई ने बुलेटसांती गाड़ी में थोड़ा संसोधन किया और उसे सनेडो टेक्टर (Sanedo Tractor) में परिवर्तित कर दिया। इसकी खूबी यह है कि इसमें 3 चके है। यह छोटे किसानों के लिए काफी हेल्पफुल है। उपेंद्र भाई कहते है कि उनके इस ट्रेक्टर की डिमांड देखते ही देखते बहुत बड़ गई है। अब यह भारत तक ही सीमित नहीं है अफ्रीका जैसे देशों में भी इसकी बहुत मांग है।

क्या विशेषता है इस टेक्टर की और कीमत

पुराने जमाने में खेतों से फसल उगाने के लिए किसान बहुत परिश्रम करते थे और सारा दिन अपने पुरे परिवार के साथ खेतों में गुजार देते थे तब कही जाकर फसल पैदा होती थी। पुराने जमाने में किसान अपने खेतों की जुताई बैल से किया करते थे।

जिस किसान के पास अधिक भूमि होती थी, वे दूसरों किसानों की हेल्प से अपने खेतों में 3 से 4 जोड़ी बैल से खेतों की जुताई किया करते थे और गरीबी के चलते जिन किसान के पास बैल नहीं हुआ करता था। जिनके पास अधिक भूमि नहीं होती थी। वे अपने खेतों की खुदाई कुदाल या फरसा से किया करते थे, जिसमे बहुत समय लगता था।

पिपहिया ट्रेक्टर किसानों के लिए उपयोगी

इसके अलावा फसल की कटाई तथा मड़ाई तक का सारा काम हाथों से ही करना पड़ता था। जिससे किसानों को खेती करनी में बहुत समय लगता था। शुरूआत में बुलेट गाड़ी का ही उपयोग हुआ। परंतु जब इस बाइक पर रोक लग गई थी। तो हमने इस मॉडल से बुलेट को हटा दिया और दूसरे मॉडल के साथ काम किया। पिपहिया ट्रेक्टर आज हमारे किसानों भाइयों के लिए काफी फेमस है। अच्छी गुडवत्ता के साथ यह व्यवस्थित करने में भी सरल है।

किसान भाइयों को खेत मे जुताई करने में बहजत मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। उन सब समस्या का हल निकलते हुए वह कहते है कि इससे आप खेत में जुताई-बुवाई जैसे कठिन काम सरलता से कर सकते हैं।

अच्छी ब्रांड के ट्रेक्टर काफी महंगे होते है, परंतु ये ट्रेक्टर काफी सस्ता है। लेकिन इसका काम बड़े ट्रैक्टर जैसा है। इस लिए इसकी मांग बहुत है। इसकी कीमत 1 लाख 37 हज़ार रुपये से 1 लाख 60 हज़ार रुपये की है। इस लिए किसान इसके उपयोग से काफी खुश है। उनके इस उपकरण को सृस्टि सम्मान दिया गया साथ ही अफ्रीका व केन्या जैसे देशों में भी इसकी मांग है।

देश से बाहर मिला सम्मान

केन्या की टीम ने उनके वर्क शॉप का भ्रमण किया और उनकी काफी सराहना की। उपेंद्र कहते है वह बहुत सारे नए नए उपकरण बना रहे है और केन्या की टीम की डिमांड पर एक गन्ने से पत्ते निकलने वाला उपकरण बना रहे है।

टीम का कहना है कि उनको एक ऐसा उपकरण चाहिए, जिससे गन्ने के पत्ते आसानी से निकले जा सके, क्योंकि इस काम में काफी समय लगता है और कई बार तो मजदुर को चोट भी लग जाती है। उनकी इस डिमांड को उपेंद्र जी ने कुछ ही समय मर पूरी कर दी।

खेती करने में आसानी और समय भी कम लगता है

उन्होंने हाथ से चलने वाला एक ऐसा उपकरण बनाया, जो कुछ ही मिनट में पत्तों को काट देता है। इस यंत्र की कीमत मात्र 500 रुपये है। इस बारे में सृष्टि के प्रोजेक्ट मैनेजर चेतन पटेल कहते हैं, हमारा उद्देश्य किसान और मजदूर भाइयों की मदद करना है। ऐसे छोटे-छोटे यंत्र कठिन काम को भी आसान बना देते है, जो खेती करने में आसानी और समय भी बचाता है।

प्रतिदिन नई नई तकनीक की खोज हो रही है, उनका निर्माण भी किया जा रहा है, जैसे आज 20 सालों में मोबाइल के हजारों मॉडल बन गए हैं, लेकिन खेत में हाथों से संचालित होने वाले औजारों की ओर कोई ध्यान नही देता।

आगे बताया गया की किसान भाई धूप में इतनी मेहनत करके किसानी करते है, अगर उनके पास सही औजार आ जाये, तो उनका सारे दिन का काम कुछ ही घंटों में हो सकता है। हमारा उद्देश्य यही है कि लोगों का दिमाग इस तरफ करने का है, जिससे किसान भाइयों को खेती के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध हो जाये।

किसान भाइयों के लिए कृषि क्षेत्र में ज़रूरी आविष्कार होंना बहुत जरूरी है। उपेंद्र भाई जैसे लोग इस ज़िम्मेदारी को निभाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे है। अगर आप भी उपेंद्र भाई राठौर से बात करना चाहते है, तो उनके इस नम्बर 9726518788 पर संपर्क कर सकते हैं।

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