
Rajkot: गुजरात राज्य के राजकोट जिले में साठली गांव के रहने वाले भगवान जी रूपापारा ने पक्षियों की दुर्दशा और अपनी मानवता का परिचय देते हुए दया भावना के फल स्वरूप उन्होंने पच्चीसों मटको की सहायता से पक्षियों के लिए एक घर, उनके रैन बसेरा का निर्माण किया।
जनसंख्या वृद्धि के कारण लोगों के द्वारा रहने के लिए पर्याप्त जगह ना होने के कारण जंगलों को अंधाधुंध काटा जा रहा है और मौसम विविधता के कारण भी पक्षियों को उनके घर से बाहर जाना पड़ता है। उनका वह घर रहने के लायक नहीं रहता या मनुष्य के रहने के कारण छिन जाता है। इन सभी समस्याओं के कारण पक्षियों के रहने का ठिकाना नहीं रहता है और वह यहां वहां भटकते रहते हैं।
भगवान जी रूपपारा द्वारा जब इनकी समस्याओं को देखा गया, तो उन्हें बड़ी दया आई और उन्होंने पच्चीसों मटको की सहायता से एक वर्ड हाउस का निर्माण किया, जिससे पक्षी उसमें आराम से रह सके। यह पक्षियों का घर मटको के कई साइजों से मिलकर बना है, जिसमें छोटे से लेकर बड़े मटको तक को लगाया गया है, जिसमें पक्षी अपनी सुविधानुसार रह सकते हैं।
वर्तमान समय की मुख्य समस्या
वर्तमान समय की सबसे बड़ी समस्या यदि कोई है तो वह है, जनसंख्या वृद्धि, क्योंकि जनसंख्या वृद्धि बहुत तेजी से बढ़ रही है और जो समस्याएं आ रही हैं वह खाने पीने, रहने और प्राकृतिक संसाधनो की कमी है।जिसके फलस्वरूप अन्य दूसरी समस्याएं हमारे सामने मुंह उठाए चली आ रही हैं।
यदि देखा जाए तो जनसंख्या वृद्धि से खाने-पीने की समस्या के कारण महंगाई बढ़ रही है और जनसंख्या वृद्धि के कारण रहने के लिए भी समस्या आ रही है। जिससे लोग जंगल को काट रहे है और रहने के लिए कृषि भूमि का इस्तेमाल कर खेतों में घर बनाए जा रहे हैं। जिससे पक्षियों का घोंसला उजड़ रहा है और उनके रहने के ठिकाने बर्बाद हो रहे है और वह रहने और खाने पीने के लिए भटक रहे हैं।
परिंदों का रैन बसेरा बर्ड हाउस
साकली गांव के रहने वाले भाई भगवान जी रुपापारा द्वारा परिंदों के लिए जो रेन बसेरा बनाया गया है वह एक बहुत ही अच्छी मानवता का उदाहरण है। इस रेन बसेरे में पक्षियों को रहने के लिए सभी सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है। यह घर 140 फीट लंबा 70 फीट चौड़ा और 40 फीट ऊंचा है।
इस रेन बसेरा रे मैं खास तौर पर जो मटके (Matake) लिए गए हैं, उनके साइजों को चुनकर बड़े से छोटे सभी प्रकार के आकारों का उपयोग किया गया है। ताकि सभी परिंदे अपनी सुविधा के अनुसार अपने घर का चुनाव कर सकें।
Gujarat native Bhagvanji Rupapara spent Rs 20 lakh to make this birdhouse, or rather a bird bungalow, which is 140 feet long, 70 feet wide and 40 feet high.
The house was built on a riverbank with over 2,500 earthen pots customised just for this purpose. pic.twitter.com/5qjCmgSDU6
— Indian Weekender (@indianweekender) January 7, 2022
इसके साथ ही भगवान जी भाई रूपा पारा ने नई तकनीकों की सहायता से इस के तापमान को भी मेंटेन किया है, जिससे कि पक्षी हर मौसम में सुकून से रह सके। यह पक्षियों का घर लगभग बीस लाख रुपए (20 Lakh Ru) की लागत द्वारा तैयार किया गया है। भगवान जी रूपा पारा जैसे लोगों के कारण भारत में अभी भी मानवता बची हुई है और यह भारत के लिए बहुत ही गर्व की बात है।
टूरिस्ट गाइडों द्वारा वर्ल्ड हाउस देखने का उत्साह
भगवानजी भाई (Bhagvanji Bhai) रूपापारा ने पक्षियों के लिए रहने के लिए जिस बर्ड हाउस (Bird House) का निर्माण किया है, वह टूरिस्ट गाइडओं में चर्चा का विषय बन गया है और उसे देखने और उस जगह पर घूमने के लिए उनका उत्साह देखते ही बनता है। दूर क्षेत्रों सेऔर देशों से इस वर्ल्ड हाउस को देखने के लिए आ रहे हैं और भगवान जी रुपापारा की अपने दिल से प्रशंसा कर रहे हैं।
मानवता को हमेशा बनाए रखें
ऊपर बताई गई कहानी के द्वारा हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें हमारी मानवता और इंसानियत को हमेशा बनाए रखना चाहिए। क्योंकि आज का समय बहुत ही संघर्षशील और प्रतियोगिताओं से भरा हुआ है।
जिसमें लोग सिर्फ अपने कार्य से मतलब रखते हैं, दूसरे दिन दुखियों और लाचार व्यक्तियों की तरफ उनका ध्यान ही नहीं जाता, जिससे वह मदद करने में हमेशा पीछे रहते हैं। लोगों को अपने बिजी शेड्यूल में से थोड़ा सा समय निकाल कर अन्य दुखी लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए दुखी लोगों में पशु-पक्षी भी आते हैं।




