इस तरह बायोगैस उत्पादन करके भारत के गाँवों में रोजगार और कमाई का तरीका निकाला गया

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Biogas Village business
Biogas for rural Households in India in Hindi. Rural employment generation through biogas production in villages of India. Bio energy in India.

File Photo Used from Social Media

Mandla: पूरे विश्व भर में ऊर्जा के क्षेत्र में भारी डिमांड आई है और खपत भी बढ़ी है, ऐसे में इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में बहुत इज़ाफ़ा हो रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़, वैश्विक स्तर पर अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 11.5 मिलियन लोग कार्यरत हैं।

बायोगैस (Biogas) एक उत्तम अक्षय ऊर्जा उद्योग (Renewable Energy Industry) के रूप में सामने आया है। इसके तहत खेती-किसानी, औद्योगिक, पशु पालन और नगरपालिका कचरे को ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।

हमारे देश में ऊर्जा की आवश्यकता को पूरा करने के साथ ही साथ, यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को नियंत्रित करने, प्रदूषण को कम करने और कचरे को सही इस्तेमाल करके में मदद कर सकता है। इंडियन बायोगैस एसोसिएशन के मुताबिक, भारत में बायोगैस उत्पादन की 1108 TWh (टेरावाट-घंटे) की बायोगैस कैपेसिटी है।

देश में बायोगैस उद्योग गांवों में लघु व्यवसाय और रोजगार श्रजन कर रहा है। जैविक कचरे (Organic Waste) के माध्यम से बायोमीथेन का उत्पादन एक छोटे पैमाने पर एक बेहतर उद्योग है, जो पशु खाद, कृषि अवशेषों और अन्य जैविक वेस्ट पर डिपेंड करता है।

यह ऐसा काम है, जो ग्रामीण इलाकों में रोजगार और छोटे व्यवसाय के मौके बनता है। इसमें बायोगैस बनाने, उसे इकठ्ठा करने के साथ इन्तेमल करने और बायोगैस संयंत्रों के रखरखाव व व्यवसाय में अनेक लोगो की जरुरत पढ़ती है। ऐसे में रोजगार के अवसर बनते हैं।

इसके ज़रिये भिन्न भिन्न प्रकार के रोजगार बने है। इस उद्योग में तीन अलग-अलग श्रेणियों में रोजगार मुहैला होते है। पहली श्रेणी बायोगैस परियोजनाओं में सीधा रोजगार है, जिसमें फसल उत्पादन, निर्माण, बायोगैस संयंत्रों के संचालन और रखरखाव और परिवहन के लिए आवश्यक सभी मानव शक्ति शामिल है।

फिर दूसरी श्रेणी के तहत बायोगैस ईंधन साइकिल (Biogas Energy Cycle) में इन्वेस्ट करने से अप्रत्यक्ष रोजगार श्रजन होता है। अप्रत्यक्ष काम के अंतर्गत उपकरण बनाने वाले और सर्विस देने वाले आते हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के साथ ही साथ, बायोगैस उद्योग में प्रेरित रोजगार पैदा करने की क्षमता है।

इस क्षेत्र में सभी प्रकार के कामों, उत्पादों और सेवाओं की डिमांड बड़ी है और आगे अधिक बढ़ सकती है। ऐसा होने पर गांवो में रोजगार के अवसर बनेंगे। गाँव के युवा बाहर शहरों में ना जाकर अपने ही गाँव में रहकर अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं। खेती-किसानी के वेस्ट का उपयोग बायोमास के रूप में बायोगैस बनाने में किया जा सकता है, जिसे जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

अपने इस्तेमाल के बाद किसान बायोगैस को ग्रिड को बेचकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। खुद इसका इस्केमाल करके से बाकी का खर्चा भी बच जायेगा। इस रिपोर्ट में बताया गया है की इंडियन बायोगैस एसोसिएशन के मुताबिक़, भारत के बायोगैस उद्योग में परिवार के आकार की बायोगैस सुविधाओं का बोलबाला है।

अभी भारत में 4120000 से अधिक बायोगैस इकाइयाँ (Biogas Units) हैं, जो योग्य और कम योग्य कामगारों को रोजगार देती हैं। आने वाले कीच सालों में इसमें और अधिक इज़ाफ़ा होना तय है, क्योंकि सरकार का जैविक खेती और नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर व्यापार को आगे बढ़ाएगा।

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है की साल 2025 तक, SATAT (सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन) पहल 5000 बड़े स्तर पर बायोगैस सुविधाओं का निर्माण करना चाह रही है। इन बायोगैस संयंत्रों को लगाने के लिए स्वतंत्र उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जाता है।

5000 संयंत्रों के मिशन को सफल बनाने के लिए, भारत को इन संयंत्रों के निर्माण और संचालन के लिए 415000 कामगारों और तकनीशियनों की जरुरत पड़ेगी। इसके तहत करीब 55000 योग्य संयंत्र डिजाइनरों और साइट इंजीनियरों, 2 लाख से अधिक मजगूरों, प्रशासन की देखरेख के लिए 10000 योग्य इंजीनियरों की जरुरत होगी। ऐसे में एक मज़दूर से लेकर कंप्यूटर ऑपरेटर और योग्य इंजीनियर के अलावा मैनेजमैंट करने वालो को भी काम और रोजगार मुहैया करवाया जायेगा।

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