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Raipur, CG: जब पुराने ज़माने में बिजली और बल्ब नहीं थे, तब लोग दिये ही तो जलाते थे, रौशनी करने के लिए। इस साल भी दिवाली आ रही है, इससे पहले बाजार में विभिन्न प्रकार के लैंप आने शुरू हो गए हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ से एक अनोखा दीप निकला है। यह दिया बड़ा ही अनोखा है।
ऐसे में छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग विभिन्न विधाओं में पारंगत हुनरमंदों का क्षेत्र मन जाता है। वहां कई तरह के चीज़ों को बनाया जाता है। हैंडमेड चीज़ों के लिए छत्तीसगढ़ बेहद प्रसिद्ध है। वहीं आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने एक शानदार 24 घंटे चलने वाला दिया बनाया है।
जिसकी मांग अब पूरे देश में हो रही है। यह दीपक एक से दो घंटे नहीं जलता है, लेकिन 24 से 40 घंटे तक जलता रहता है।इस दीपक के आने के बाद बाजार में इसकी मांग बढ़ गई है। यह दीपक छत्तीसगढ़ के कोंडागांव (Kondagaon in Chhattisgarh) के रहने वाले कारीगर अशोक चक्रधारी (Potter Ashok Chakradhari) द्वारा बनाया गया है।
राष्ट्रीय मेरिट पुरस्कार से सम्मानित किया
अशोक चक्रधारी (Ashok Chakradhari) को इस मिट्टी के दीपक के लिए राष्ट्रीय मेरिट पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जो 40 घंटे तक लगातार जलता है। अशोक चक्रधारी पिछले कई सालों से मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करते हैं। वह कहता है कि उसने 35 साल पहले ऐसा दीपक देखा था।
इस बात को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने यह दीपक बनाया
अशोक चक्रधारी ने बताया, 35 साल पहले मैंने एक दीया (Diya) देखा था, मैंने उसे याद करके यह दीया बनाया है। इस साल किसी ने मुझे नवरात्रि में बुलाया और कहा कि जो दीया तुमने बनाया है, उसे हमें भी देना चाहिए। इसने मुझे बदल दिया। वीडियो वायरल हो गया है। जिसकी वजह से लोग मुझे फोन कर रहे हैं। हम हर रोज 50-60 ऐसे विशेष दीए बना रहे हैं। हमने इसकी कीमत 200 से 250 रुपये रखी है।
क्या है जादुई दिया
मिट्टी का बना यह जादुई दिया (Mitti Ka Diya) बेहद खास है। इसे दो भाग में बनाया गया है, जिसमें नीचे के हिस्से को एक गोलाकार दिया गया है, जहाँ बत्ती लगाई जाती है। जबकि दूसरा भाग चाय की केतली की तरह दिखता है, जिसमें तेल (Oil) भरा जाता है। यह तेल के ज़रिये लगातार जलता है।
62-YEAR OLD POTTER FROM CHHATTISGARH REVIVES A TRADITIONAL DIYA THAT BURNS FOR 24 HOURS
Ashok Chakradhari, a Potter from Bastar district of Kondagaon village in Chhattisgarh has revived a traditional Diya that can burn for at least 24 hours, which made him a viral sensation. pic.twitter.com/NdpAqGLk8E
— The Arth India (@thearthindia) November 4, 2020
इस में से तेल निकालने के लिये मिट्टी की नलकी बनाई गई है। इस गोलाकार पात्र में तेल भरकर दिये वाले आधार के ऊपर उल्टा कर सांचे में फिट कर दिया जाता है। इसकी दीये को जादुई इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि जब इसमें तेल कम होता है तो यह अपने आप तेल की धार शुरू कर देता है।
फोन पे हो रहे ऑर्डर
सबसे हैरानी की बात यह है कि अशोक चक्रधारी को यह भी नहीं पता था कि उसका यह वीडियो और फोटो कैसे वायरल हुआ। लोग अब कारीगर अशोक चक्रधारी को बुला रहे हैं और मांग कर रहे हैं। लोग लगातार फोन कॉल की मांग कर रहे हैं। कई लोगों ने दीयों के लिए ऑर्डर दिए हैं और एडवांस पैसे भी जमा किए हैं।
सीखाना चाहते हैं अपने कुम्हार साथियों को
अशोक मिट्टी का प्रयोग कर सिर्फ पैसे कामना नहीं कहते हैं। अशोक कहते हैं कि वह इस परंपरा को जीवित रखना चाहते हैं। वह नए कुम्हारों को भी मिट्टी से अलग अलग तरह के वस्तुएं बनना सीखना कहते हैं। इसलिए जब भी उनको समय मिलता है वह तब लोगों को सीखने बैठ जाते हैं। अशोक मिट्टी से मूर्तियां, दैनिक उपयोग की वस्तुएं, सजावट के सामान आदि चीज़ें बनाते हैं।
Magical Lamp from #AspirationalDistrict Kondagaon, Chhattisgarh!
National Award nominee Ashok Chakradhari has designed a special oil lamp that automatically refills oil and keeps the diya 🪔 burning for an entire day.
A #MadeInIndia marvel! #Local4Diwali #AatmanirbharBharat pic.twitter.com/v1veezg73N
— NITI Aayog (@NITIAayog) November 13, 2020
अशोक के इस जादुई दिये की कीमत कोंडागांव में 200 रुपये है। बल्कि बहार के लोगों के लिए पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट का शुल्क अलग से जोड़ा जाता है। उन्होंने अपनी ज़िंदगी में कई ऐसी परिस्थितिओं का भी सामना किया है, जो बेहद ही खराब थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और हर चीज़ का डटकर सामना किया और अपनी कठोर मेहनत से इस दिया का नाम जादुई दिया रखा है।



