
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने हाल ही में नसीरुद्दीन शाह का बयान की बात करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहा था की अब हम आपको सिखाएंगे की अल्पसंखयकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाना चाहिए। तो भारतीय मीडिया ने बताया की अब यह पाकिस्तान कैसे सिखाएगा? अब खबर आई है की पाकिस्तान में खैबर पख्तुनवा सरकर ने एक अति प्राचीन हिंदू धार्मिक स्थल जो की पंज तीरथ के नाम से जाना जात था, को राष्ट्रीय विरासत घोषित कर दिया है।
असल में यहां पर पांच कुंड स्थित थे। इन 5 कुंड या सरोवरों के कारण इसका नाम पंज तीरथ पड़ा था। यहां पर मंदिर के अलावा अनेकों खजूर के पेड़ों वाला उद्यान भी है। पहले यहाँ पर विशाल मंदिर प्रांगड़ हुआ करता था। भारत पाकिस्तान बटवारे के बाद यह स्थान वीरान हो गया तब 1970 में वहां की सरकार ने मंदिर परिसर में तोड़ फोड़ करके वहॉं पर खैबर पख्तूनख्वा चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री का दफ्तर और एक पार्क बना दिया।
अब बस पंज तीरथ मंदिर के नाम पर एक छोटा था टुटा मंदिर ही बचा है। पंज तीरथ मंदिर स्थल के पांचों सरोवर चाचा युनूस पार्क और खैबर पख्तूनख्वा चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के के अंदर आते हैं। पाक सरकार के आदेश के बाद खैबर पख्तूनख्वा पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशालय ने नए नियम के अनुसार अब अधिसूचना जारी कर के पी ऐंटिक्वीटीज एक्ट-2016 के अंतर्गत पंज तीरथ पार्क के पुरे परिसर को राष्ट्रीय विरासत घोषित कर दिया है।
पेशावर पाकिस्तान का रह हिन्दू तीर्थ स्थान कभी बहुत संपन्न हुआ करता था और भक्तो का आना जाना भी बहुत अधिक था. फिर इस स्थान पर आक्रमणकारियों की काली नज़र पद गई और अफगानिस्तान के आक्रमणकारी अफगान दुर्रानी ने 1747 में इस स्थान तहस नहस कर दिया था। इस बर्बादी के बाद पुरे उत्तरी भारत भारत में सिखों का राज़ आया तब 1834 में कुछ हिन्दू भक्तो ने सिख शासकों की मदत से पंज तीरथ का फिर से जीर्णोद्धार करवाया था। किन्तु पाकिस्तान बनने के बाद फिर से यह स्थान अपनी बदहाली की दास्ताँ बयां कर रहा है।
अब विरासत स्थान घोषित होने के बाद पाक सरकार ने इस ऐतिहासिक विरासत स्थल को किसी भी प्रकार से नुक्सान पहुँचाने वालो को दोषी पाये जाने पर 20 लाख रुपये का जुर्माना और पांच साल तक की सजा की बात कही है।
अब हम आपको यह बताते है की यह स्थान जितना अनमोल है और विरासत क्यों है? ऐसा कहा जाता है की इस जगह का संबंध महाभारत काल से है और महाभारत में पांडवो के पिता राजा पांडू का कुछ सम्बन्ध यहाँ से था। राजा पांडू इस जगह पर काफी समय तक रहे थे। यहाँ पर 5 पवित्र सरोवर भी है। हिंदू इन सरोवरों में स्नान करने के लिए कार्तिक महीने में आते थे और 2 दिनों तक पूजा पाठ किया करते थे।
हिंदू धार्मिक स्थल 'पंज तीरथ' को पाकिस्तान ने राष्ट्रीय विरासत घोषित किया#PakistanIn2019 #Pakistan #Peshawar #PanjTirath #Hindu #Hinduism @ImranKhanPTI pic.twitter.com/2rDh3dd9sC
— sanatanpath (@sanatanpath) January 6, 2019
अब आप खुद ही सोचिये की जो जगह पहले से ही अति प्राचीन ऐतिहासिक विरासत थी उसे पहले बर्बाद करके फिर इसने सालो तक बदहाली के रखकर तब राष्ट्रिय विरासत घोषित किया जाता है जब वह पर मंदिर के नाम पर कुछ एक टूटा खण्डार बचा है। वैसे इमरान खान की पाकिस्तान सरकार का रह फैसला अच्छा है, किन्तु फिरफ पंज तीरथ ही नहीं बल्कि ऐसे अनेकों प्राचीन मंदिर हैं। पाकिस्तान में जिनको ऐतिहासिक विरासत घोषित करने की जरुरत है। कुछ मंदिर और ऐतिहासिक विरासत वाले स्थान अब बिलकुल भी नहीं बचे हैं।



