काशी-मथुरा मंदरों पर हिंदुओं की याचिका के खिलाफ यह दलील दी गई सुप्रीम कोर्ट में, जानें

0
569
Kashi Mathura Hindu Temple Case
Kashi-Mathura Temple Case: Jamiat moves SC urging the top court not to even admit the plea filed by the Hindu group. Will create fear in Muslim minds still recovering from the Ayodhya verdict, says Jamiat. Kashi and Mathura Hindu Temples will be next for verdict. The Places of Worship 1991 Act needs to be dumped.

Presentation Image

Delhi: राम मंदिर अयोध्या विवाद सुलझने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में काशी-मथुरा के मंदिरों को लेकर याचिकाओं का दौर आरम्भ हो गया है। अभी हाल ही में हिंदू पक्ष की तरफ से एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में डाली गई थी। इस याचिका के बाद अब मुस्लिम पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट पहुँचा चूका है। मीडिया में खबर आई है की जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के वकील एजाज मकबूल ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी डाली और हिंदू पक्ष की याचिका का विरोध किया है।

खबर मिल रही है की जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की तरफ से वकील द्वारा दाखिल याचिका में गुजारिश की गई है कि हिंदू पुजारियों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट नोटिस न जारी करें। विरोधी पक्ष का मामना है कि इस मामले में नोटिस जारी करने से एक विदेश समुदाय या कौम के लोगों के मन में अपने इबादत की जगहों के लिये भय पैदा होगा।

आपको बता दे की याचिका में अयोध्या विवाद का हवाला देते हुए कहा गया है कि इस मामले के पश्यात इस प्रकार की याचिका से उनके विशेष समुदाय के लोगो के मन में चिंता और भय व्यक्त होगा, जिससे देश की धर्मनिरपेक्ष सोच पर असर पड़ेगा। इसके अलावा जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने कोर्ट से यह गुज़ारिश की है कि उसे इस मामले में पक्षकार बनाया जाए।

आपको बता दे की लोगो में अब ऐसी चर्चा है की अब अगला नंबर कशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) बनारस और श्री कृष्णा जन्मभूमि का है। एक मीडिया रिपोर्ट और देश के इतिहास की माने तो देश के कई हज़ार मंदिर ऐसे बताये जाते है। जिन पर आज मस्जिद बना दी गई है। अयोध्या में राम जन्म भूमि मंदिर पर कोर्ट का फैसला आ ही चुका है। कोर्ट ने मन की मुग़ल आक्रमणकारियों ने राम मंदिर के स्थान पर बाबरी मस्जिद बनाई थी। अब अयोध्या का राम मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य शुरू हो रहा है।

हाल ही में काशी और मथुरा मंदिर विवाद पर अब सुप्रीम कोर्ट में एक PIL दाखिल की गयी है। इस PIL में एक कानून (Places of worship Act, 1991) को चुनौती दी गई है। इस PIL को दायर करने वाले हिंदु पुजारियों के संगठन के “विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ” के हवाले से मीडिया में खबर आ रही है की अब अन्न मंदिरों को भी मुक्त करवाने की दिखा में काम किया जा रहा है।

आपको बता दे की यह अधिनियम काशी और मथुरा के मामले में इसलिए जरुरी है, क्योंकि उन दोनों ही हिन्दू धार्मिक स्थानों पर विवादित मस्जिदें हैं और यह कानून किसी भी मंदिर को मस्जिद में बदलने या किसी मस्जिद को मंदिर में बदलने से रोक देता है। मतलब इस कानून के रहते हुए अन्न हिन्दू धार्मिक स्थानों और मंदिरो को न्याय नहीं मिल सकता है।

अब यह PIL विवादित धार्मिक स्थलों और हिन्दू मंदिरों के लिए कानूनी जंग जीतने के लिए डाली गयी है। इस PIL के अनुसार हिंदुओं को अपने धार्मिक स्थल वापस लेने के अधिकारों से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए, और देश की संसद को इस ममले में सही दिशा में कार्य किये जाने चाहिए।

आपको बता दे की इस एक्ट को पहले कभी भी चुनौती नहीं दी गई है। ऐसे में यह एक ठोस कदम हो सकता है। इस उपासना स्थल अधिनियम, 1991 कानून को 18 सितंबर, 1991 को पारित किया गया था। उस वक़्त कांग्रेस का राज़ था। इसके तहत 15 अगस्त 1947 तक के मैजूदा किसी भी धार्मिक स्थल को एक धर्म से दूसरे धर्म में चेंज नहीं किया जा सकता है।

इसका सीधा मतलब है की देश की आज़ादी और बटवारे के बाद यदि 15 अगस्त, 1947 को एक स्थान पर मस्ज़िद थी, तो वहां पर अभी भी मस्ज़िद की ही दावेदारी मानी जावेगी। फिर भला ही इस तारीख से कितने दिन पहले या प्राचीन काल से मंदिर ही क्यों ना रहा हो। इस कानून के तहत, मुगलो और आक्रमणकारियों द्वारा तोड़े गए किसी भी मंदिर पर जहां आज मस्जिद है, उस स्थान पर हिंदू अपना दावा नहीं कर पा रहे। इस एक तरफ़ा कानून के रहते हिंदुओं को अपना मंदिर और ज़मीन वापस नहीं मिल सकती है।

PIL is moved in the Supreme Court of India, challenging provision of the Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991, in order to reclaim the land. Jamiat-Ulema-e-Hind asks Supreme Court not to admit pleas of Hindus seeking to reopen Kashi-Mathura dispute cases.

अगर कोर्ट में इस तरह का कोई भी मामला चलाया गया, तो उसे निरस्त कर दिया जायेगा। इस कानून की एक खास बात यह भी है की यह कानून देश की मान्यता प्राप्त प्राचीन स्मारकों पर लागू नहीं होता है। अब इन मान्यता प्राप्त प्राचीन स्मारकों के श्रेणी और नज़रिये भी अलग अलग है। इसके अलावा इस कानून के खिलाफ जाना अपराध कि माना गया है और इस पर जुर्माना और तीन साल तक की सज़ा का भी प्रावधान है। इस कारण से भी अनेक हिन्दू मंदिरों पर लोग आवाज़ नहीं उठा पा रहे है।

इस सबके बीच भाजपा नेता और देश के जाने माने वकील डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है की अयोध्या के बाद अब काशी विश्वनाथ मंदिर का नंबर है। सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट करते हुए कहा की काशी के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया जायेगा और सिर्फ कोरोना के ख़त्म होने की प्रतीक्षा की जा रही है।

अयोध्या राम मंदिर मामले में भी भाजपा नेता और वकील सुब्रमनियन स्वामी की महत्वपूर्ण भूमिला मानी जाती है। अब स्वामी के मुताबिक़ अयोध्या राम मंदिर केस तो थोड़ा दिक्कत भरा था, परन्तु काशी और मथुरा केस बहुत आसान है। इससे पहले सुब्रमनियन स्वामी कह चुके है की काशी और मथुरा में हिन्दू मंदिर तोड़ने के बहुत बहुत साक्ष्य उपलब्ध है, काशी में जो मंदिर पर मस्जिद बनाई है, उस मंदिर की दीवार अभी भी मौजूद है, अतः काशी विश्वनाथ मंदिर केस अयोध्या केस से आसान रहने वाला है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here