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Delhi/Hong Kong: यह खबर आज भारत और पूरी दुनिया को जानना जरुरी है। हालाँकि चीन इस तथ्य से बखूबी वाकिफ है। लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों को कुचलने में चीन माहिर तो है और उसकी दमनकारी नीतिया सभी जानते है। यह तो आपने सुना होगा की चीन ने अपने शिनजियांग प्रान्त में रह रहे उइगर मुस्लिम्स का दमन किया हुआ है और उनके लिए डिटेंशन सेंटर भी बनाये हुए हैं। किन्तु आज बात हांगकांग की ही रही है।
अगर आप विदेशी मीडिया के टच में रहते है, तो आपको पता होगा की हांगकांग के लोकतंत्र समर्थकों पर चीन लगातार गमन नीती अपनाता आया है। अब चीन की सरकार और भी बड़ा कदम लेने के इंतज़ार में है। अब चीन हांगकांग और उसके लोकतंत्र की आवाज पूरी तरह से समाप्त करने के इरादे से काम कर रही है।
असल में चीन की सरकार अब हांगकांग की सुरक्षा के बहाने नया कानून लाने की तैयारी में है। ये कानून देशद्रोह, अलगाव और उत्पात को रोकने की आड़ लेकर लाया जा रहा है, परन्तु इसका असल मकसद कुछ और ही है। हांगकांग के लोकतंत्र समर्थकों का मानना है कि चीन इस कानून का इस्तेमान करके उनकी आवाज पूरी तरह दवा देगा। चीन की इस चाल से हांगकांग की सीमाई स्वायत्ता समाप्त हो जाएगी और फिर कोई आवाज़ भी नहीं उठा पायेगा।
For our latest episode, Hong Kong pro-democracy activist and politician @joshuawongcf joins us to discuss his experiences and his vision for the future.
Click here to listen:https://t.co/nb0yFatpjI pic.twitter.com/895jRRXKFa
— Oxford Union (@OxfordUnion) May 15, 2020
अब चीन की इस दमनकारी चाल के सामने फिर से वही लड़का खड़ा हो गया है और चीन को उंगली दिखाई है। हांगकांग के एक लोकप्रिय युवा एक्टिविस्ट और लोकतंत्र समर्थक आंदोलन का प्रमुख मुखिया रहा पूर्व छात्रनेता जोशुआ वांग (Joshua Wong) फिर आ गया है चीन को आँख दिखाने। जोशुआ वांग ने क्लियर बता दिया है कि हम लोग सड़कों पर प्रदर्शन करते रहेंगे और हांगकांग किसी से डरता नहीं है।
आपको बता दे की जोशुआ वांग की उम्र अभी 23 साल है, परन्तु वह 14 साल की उम्र से चीन को आँख दिखा रहा है। जोशुआ वांग पूरे विश्व में सोशल मीडिया का हीरो है। मासूम और काम उम्र के इस युवा से चीन सरकार भी खौफ कहती है। असल में जोशुआ वांग हांगकांग में लाखों प्रदर्शनकारियों का लीडर है। उसके एक इशारे पर लाखों लोग चीन के खिलाफ सड़क पर उतर आते हैं और चीनी सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगते है।
चीन की सरकार और सेना इस लड़के के सामने असहाये है
चीन की सरकार और सेना भले ही कितनी ताकतवर हो पर इस दुबले पतले लड़के के सामने असहाये हो जाती है। युवा जोसुआ वांग ने अनेक बार चीन को झुकाया है। जब जोसुआ 14 वर्ष का था तब वो चीन के खिलाफ आंदोलन में चमत्कारिक रूप से लीडर बनकर सबके सामने आ गया था। जब यह लड़का बोलना शुरू करता है की लोगो की भीड़ जुट जाती हैं। उसकी एक आवाज़ पर लाखों हांगकांग की जनता सड़कों पर आ जाती हैं।
आपको बता दें की चीन की सरकार और राष्ट्रपति जिनपिंग भले की भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से नहीं डरते हो, परन्तु जोसुआ वांग के नाम से खौफ खाते है। यह लड़का बिना किसी भय के पिछले कई साल में कई आंदोलनों को लीड कर चुका है, जिससे चीनी सरकार भी हिल गई थी। वह कई बार जेल जा चुका है और कहता भाई की उसे डर नहीं लगता है।
"Hong Kong will turn from a one country two system, to one country one system."
Pro-democracy activist Joshua Wong says China's proposed new law would "erode the freedom of Hong Kong."#EarlyRundown
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— Sky News (@SkyNews) May 22, 2020
Pro-democracy activist Joshua Wong says China’s proposed new law would “erode the freedom of Hong Kong.” Hong Kong will turn from a one country two system, to one country one system.
आपको बता दे की जोसुआ वांग की दुनिया के सामने 2014 में आया था, जब वो हांगकांग के स्कूल में पढ़ रहा था। तब उसकी उम्र 14 साल थी। तब हांगकांग में चीन की गलत नीतियों के चलते जनता का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था, उस विरोध प्रदर्शन को युवाओं ने बगी ज्वाइन किया थ। स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों ने भी इसमें हिस्सा लिया था।
जोशुआ वांग चमत्कारिक रूप से ने नेता बनकर उभरा
जोशुआ भी उसमे शामिल हुआ और चमत्कारिक रूप से ने नेता बनकर उभरा था। उसने एक प्रदर्शन प्लान किया था, जो बहुत कारगर रहा था कि पूरी दुनिया में छा गया था। इसी दौरान उसने छात्रों का एक संगठन स्कॉलरिज्म भी बनाया। यह संगठन बहुत शक्तिशाली हो गया। फिर उसने प्रो डेमोक्रेसी पार्टी डेमिस्टोस बनाई। अभी जोसुआ इस पार्टी का महासचिव है। चीन भले ही मोदी-ट्रम्प से ना डरे, किन्तु इस छोटे लड़के से खौफ खता है।
9/ When more people who defend against an evil law fall behind bars, it only reveals the injustice of the system. June 12 of 2019 was the time when #HKers came up with our 5 demands & urged for a more accountable & democratic gov, and an independent probe into police atrocities. pic.twitter.com/brFKv64NIB
— Joshua Wong 黃之鋒 😷 (@joshuawongcf) May 15, 2020
जोशुआ के बारे में खास बात यह है की चीन की सरकार इंटरनेट सेवा बंद करके भी जोशुआ की आवाज़ नहीं दवा पाती। वह स्मार्टफोन का अच्छा जानकार है। चीन इंटनेट सेवा बंद करता तो जोशुआ और दोस्त एक एप (Mobile APP) के जरिए एक-दूसरे से चैट कर लेत, वो भगी बना इंटरनेट के। हाँ ऐसा एप जिसे चलाने के लिए इंटरनेट की आवश्यकता नहीं पड़ती।
जोशुआ नोबल पुरस्कार के लिए नामिनेट
हांगकांग में 5 साल पहले हुए प्रदर्शनों के साथ अंब्रेला मूवमेंट को भी जोसुआ वांग के साथ लिंक करके देखा जाता है। हालांकि जोसुआ के आंदोलन की शुरुआत क्लास बॉयकाट के साथ हुई, जो चीन के विरोध में हांगकांग मकई सडकों पर आ गई और जोसुआ वांग पूरी दुनिया का हीरो बन गया। जोशुआ एक सामांन्य मध्यवर्गीय परिवार से है। उसके पिता आईटी के रिटायर्ड नौकरी पेशा रहे हैं। परन्तु जोशुआ की राह कुछ और ही थी।
जोशुआ को पूरे विश्व की मीडिया ने कवर किया था और इसपर बड़ी रिपोर्ट बनी, यहाँ तक के टाइम पत्रिका ने उसे “सबसे असरदार युवा” बताया तो वहीँ फार्चुन मैगजीन ने “वर्ल्ड ग्रेटेस्ट लीडर” बनाया। यहाँ भी जोशुआ का सफर नहु रुका, बल्कि 2017 में उसका नाम नोबल पुरस्कार के लिए नामिनेट हुआ था।



