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Delhi: कोरोना ने खिलाफ जंग में कारगर पीपीई किट (PPE KIT) में खास तरह के मास्क, दस्ताने, शू-कवर, हेड कवर और गाउन होते हैं, जो डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को वायरस से बचाते हैं। इसे एक प्रकार से सुरक्षा कवच भी कहा जा सकता है। पहले हमारे देश में इसकी कमी थी पर अब इसके उत्पादन करने वाले देशों में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर आ गया है।
कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण देश में जहां PPE यानि Personal Protection Equipment और मास्क की कमी की शिकायतें मिल रही हैं। एक समय सभी राज्य सरकारें इसकी मांग कर रही थी। अब इन दोनों ज़रूरी वस्तुओं और किट के उत्पादन से जुड़ी बड़ी ख़बर आई है, जो की बहुत सुकून देने वाली है।
भारतीय मीडिया चैनल से मिली जानकारी के मुताबिक़ पीपीई (PPE Kit) और N95 मास्क के उत्पादन के मामले में भारत पूरी दुनिया में अब दूसरे नम्बर पर पहुंच गया है। प्राप्त सूत्रों ने बताया कि 11 अप्रैल को भारत के घरेलू उत्पादकों ने 22000 से ज़्यादा पीपीई का उत्पादन किया। ये अब तक की एक दिन में सबसे ज्यादा उत्पादित होने वाली सबसे मानी जा रही है।
सरकार के एक अधिकारी ने इसे बड़ी उपलब्धि बताते देते हुए कहा कि लगभग 1 महीना पहले तक भारत में PPE Kit और मास्क का उत्पादन न के बराबर होता था। उसकी सबसे बड़ी वजह ये थी कि पीपीई के लिए इस्तेमाल होने वाला फैब्रिक भारत में पहले बनता नहीं था। हालांकि अधिकारी ने ये भी बताया कि फ़िलहाल महामारी की भयावय स्थिति को देखते हुए आपातकालीन ज़रूरत को पूरा करने के लिए चीन से पीपीई और मास्क बनाने का फ़ैसला भी किया गया है।
खबर के अनुसार सरकार के सूत्रों ने बताया कि अगले कुछ दिनों में पीपीई और मास्क बनाने की क्षमता दोगुनी हो जाने की संभावना है। फ़िलहाल देश की 40 कम्पनियों ने पीपीई का उत्पादन शुरू किया है। सूत्रों के अनुसार आयात और घरेलू उत्पादन मिलाकर देश की आवश्यकताओं के लिहाज़ से पीपीई और मास्क की कमी पूरी हो जाने की आशंका है, जिसके बाद सरकार इनका निर्यात करने पर भी विचार कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक़ कोरोना जैसी बीमारी से लड़ने के लिए भारत दुनिया को सहयोग करने की लगातार कोशिश करता रहेगा।
PM मोदी सरकार ने हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्विन और पैरासिटामॉल दवाओं के निर्यात की छूट दे दी थी। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की सराहना की थी। ट्रम्प ने कोरोना के इलाज में काम आने वाली मलेरिया की दवा हाइड्रक्लोक्वीन भारत द्वारा भेजे जाने पर PM Modi की सराहना की थी।
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन मलेरिया की दवा है, जो कोरोना के इलाज में बेहद असरदार मानी जा हैँ और अमेरिका को इस दवा की बहुत जरूरत है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था की प्रधानमंत्री मोदी महान हैं और बहुत शानदार हैं। कोरोना वायरस से धराशाही अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका ने भारत से 29 मिलियन दवा की डोज खरीदी है। अधिकांश दवा भारत से मिलेगी।
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन (Hydroxycloroquine) भारत में मलेरिया के इलाज की पुरानी और सस्ती दवा है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच देश के स्वास्थ्यकर्मी यह दवा एंटी-वायरल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके चलते सरकार ने पिछले महीने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। नासा के वैज्ञानिकों ने भी मलेरिया निरोधक हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन को कोरोना से लड़ने में कारगर बताया था।






