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जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने वर्षो अध्ययन और रिसर्च करके सोनभद्र (Sonbhadra) में भारी मात्रा में सोने का भंडार होने का पता लगाया है। यह सोने का भंडार लगभग 3 हजार टन से भी ज्यादा का बताया जा रहा है। मौजूदा कीमत के हिसाब से इतने सोने का मूल्य करीब 12 लाख करोड़ रुपये है। सोने की यह चट्टान एक किलोमीटर से ज्यादा लंबी और 18 मीटर गहरी है। इस चट्टान की चौड़ाई 15.15 मीटर है।
मीडिया में आई खबर के अनुसार सोने की यह खदान सोनभद्र (Sonbhadra) के कोन थाना क्षेत्र के हरदी कोटा ग्राम पंचायत में पाई गई है। अब ई-टेंडरिंग के माध्यम से सोने की खदानों की नीलामी के लिए UP शासन ने 7 मेंबर टीम का गठन भी कर दिया है। हालांकि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और भूतत्व एवं खनिज विभाग संयुक्त रूप से जीओ टैगिंग का कार्य कर रहे हैं। इससे अन्न जानकारी मिलने के आसार है।
पुराने समय में भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। अब उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले (Sonbhadra District UP) में मिले लगभग 12 लाख करोड़ रुपये की कीमत का 3350 टन सोने का भण्डार मिला है। एक रिपोर्ट के अनुसार, हालिया समय में भारत के पास लगभग 626 टन सोने का भंडार है। सोनभद्र जिले में मिला सोना इससे 5 गुना अधिक है। ऐसे में यह बात सामने आ रही है की सोने के रिजर्व को लेकर भारत पूरी दुनिया के Top-3 देशों में शामिल हो सकता है।
भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के अनुसार, सोनभद्र की पहाड़ियों में तीन हजार टन से अधिक सोना का भंडार है। सर्वे के दौरान Sonbhadra की पहाड़ी में सोने के अलावा, लोहा और भारी मात्रा में दूसरे खनिज भी दबे हैं। ऐसे में अब उत्तर प्रदेश के साथ साथ भारत सरकार की भी बल्ले बल्ले होने वाली है।
सोने के अलावा कई अन्य धातुओं की खदानें भी मिली हैं। इन खदानों को कई ब्लॉक्स में विभाजित किया गया है, जिनमें सोन पहाड़ी ब्लॉक में सोने की खदान पाई गई है। इस खदान में लगभग 2993.26 टन सोने का भंडार होने की उम्मीद है। सोनभद्र जिले के खनन अधिकारी केके रॉय ने मीडिया में बताया कि पनारी गांव के सोन पहाड़ी में 3 हजार टन (3350 Tonne), पड़रछ के हरदी में लगभग 650 टन सोने का भंडार मिला है।
सोनभद्र के लीलासी-सांगोबांध मार्ग के बीच स्थित कुदरी पहाड़ी पर लगभग 100 टन यूरेनियम (100 Tonne Uranium) मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके लिए पहाड़ी पर तीन स्थानों पर खुदाई भी शुरू करवा दी गई है। इसके अलावा जिले की सीमा से सटे तीन राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्र में भी यूरेनियम की तलाश के लिए सर्वे किया जा रहा है।
केन्द्रीय परमाणु ऊर्जा विभाग, दिल्ली की टीम हेलीकॉप्टर से एरो मैग्नेटिक सिस्टम के जरिए कुदरी के अलावा सोनभद्र जिले से सटे पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जंगलों और पहाड़ों में यूरेनियम खोज कर रही है। सोनभद्र जिले के कुदरी पहाड़ी क्षेत्र में लगभग 100 टन यूरेनियम मिलने की उम्मीद है। पहाड़ी पर जीएसआई की टीम तीन स्थानों पर खुदाई करवा कर यह पता लगाने में जुट गई है कि यूरेनियम कितना गहराई पर मौजूद है।
100 टन यूरेनियम (Uranium In Sonbhadra) मिलना बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। एक किलो यूरेनियम से 24 मेगावॉट तक बिजली पैदा की जा सकती है। बताया जा रहा हैं कि म्योरपुर ब्लॉक के कुदरी लीलासी के बीच यूरेनियम का भंडार है। इसके लिए जीएसआई के वैज्ञानिकों ने तीन स्थानों पर खुदाई भी की है। इसमें म्योरपुर के आसपास की पहाड़ियों में तीन किलोमीटर तक क्षेत्र में यूरेनियम को लेकर बात सामने आयी है।
इससे पहले भी यूरेनियम, सिलिमेनाइट पत्थर के उपलब्ध होने की बात सामने आती रही है। वर्ष 1990 में बभनी ब्लॉक के इकदीरी ग्राम पंचायत के छिपिया पहाड़ी में सिलिमेनाइट पत्थर और यूरेनियम के होने की पुष्टि हो चुकी है। जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (जीएसआई) की टीम ने यहां 1990 और 2005 में कैंप कर जगह-जगह गड्ढों की खुदाई कर इन खनिज संपदाओं के होने की बात कही थी।
यूरेनियम (Uranium) पूरी दुनिया की सबसे मंहगी धातु हैं। यह ऐसी धातु अगर इसे खुले में छोड़ देंके तो इसमें खुद ही आग लग जाएगी। युरेनियम हवा के संपर्क पर स्वयं ही जल उठता है। युरेनियम का भंडार मिलना भारत को मलामाल कर देगा। युरेनियम के लिए पूरी दुनिया मे होड़ मची हुई है। परामाणु ऊर्जा (Nuclear Power) में इसका उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। वर्तमान समय में धरती पर यूरेनियम का सबसे अधिक उपयोग परमाणु ऊर्जा में किया जाता है।
आपको बता दें की सेकेंड विश्व युद्ध के समय जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमला हुआ था, तब 64 किलोग्राम यूरेनियम इस्तेमाल किया गया था। जिसमें सिर्फ 0.002 जितनी ही परमाणु ऊर्जा ही उत्सर्जित हो पायी थी। अगर उसमें 20 किलोग्राम ऊर्जा कनवर्ट हो जाती तो दुनिया ही स्वाहा हो जाती।
सोनभद्र जिला खनिज संपदाओं से भरा है। यहां पहले से ही लगभग आधा दर्जन कोयले की खदानें चालू स्थिति में हैं। पत्थर और बालू की भी खदाने हैं। अब सोने, लोहे, पोटास और इंडालुसाइड की भी खदाने पाई गई हैं। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी हवाई सर्वेक्षण के जरिए भूगर्भ में छिपे अन्य खनिज तत्वों की जानकारी ली जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि यहां अभी सोना, कोयला और इंडालुसाइड की खदाने मिल सकती हैं।






