राजपूत उत्तर भारत का एक क्षत्रिय कुल माना जाता है जो कि “राजपुत्र” का अंश है। राजस्थान को ब्रिटिशकाल में “राजपुताना” भी कहा गया है। पुराने समय में आर्य जाति में केवल चार वर्णों की व्यख्या थी। राजपूत काल में प्राचीन वर्ण व्यवस्था समाप्त हो गयी थी तथा वर्ण के स्थान पर कई जातियाँ व उप जातियाँ के रूप में परिवर्तित हो गई।
कवि चंदबरदाई के कथनानुसार राजपूतों की 36 जातियाँ पाई गई थी। कुछ इतिहासकारों ने प्राचीन काल एवं मध्य काल को “संधि काल” भी कहा है। इस काल के महत्त्वपूर्ण राजपूत वंशों में राष्ट्रकूट वंश, चालुक्य वंश, चौहान वंश, चंदेल वंश, परमार वंश एवं गुर्जर-प्रतिहार वंश शामिल हैं।
राजपूत कल्याण सभा की मीटिंग
राजपूत कल्याण सभा चंबा द्वारा हर माह एक मीटिंग का आयोजन किया जाता है। जिसमे समिति के सभी सदस्य उपस्थित होते है। भूपिद्र जसरोटिया इस सभा की अध्यक्षता करते है। इस दौरान राजपूत समुदाय की सभी छोटी से लेकर बड़ी गंभीर परेशानी पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें मुख्य विषय था राजपूत समुदाय के लिए भवन का निर्माण न होना।
कोई राजपूत चंबा के आस पास निजी जमीन दार करे
समिति के अध्यक्ष मनजीत जसरोटिया ने कहा कि अगर किसी राजपूत के पास चंबा के आस पास किसी की निजी जमीन है, तो सभा को स्वेच्छा से दान करे, ताकि महाराणा प्रताप भवन का निर्माण बिना किसी रुकावट के हो सके। उन्होंने राजपूत कार्यकताओ व सदस्यों से आग्रह करते हुए बोला कि जिन्होंने अपना साल का अंशदान नहीं दिया है, वे दिसंबर से पहले कैशियर के पास अंशदान जमा करवाएं।
महाराणा प्रताप भवन निर्माण में सहयोग मांग रहे
भवन निर्माण में सहयोग प्रदान करें। जनवरी 2020 से अगला वार्षिक अंशदान शुरू हो जाएगा। महासचिव जसवंत ठाकुर ने सभा के निर्धारित वादे मुताबिक राजपूत के वंचित वर्ग की मदद स्वरूप अभय ठाकुर को एक हजार रुपये हर माह देने की शुरुआत कर दी।
जो एक साल तक सभा की ओर से चलता रहेगा। सभा में उपस्थित वरिष्ठ उपाध्यक्ष शक्ति सिंह मोतलीयाल, उपाध्यक्ष महिद्र जंदरोटिया, सह-सचिव हरीश ठाकुर, आंचल ठाकुर, इकाई के सचिव आजाद सिंह पठानिया तथा पृथ्वी सिंह राणा आदि रहे। इसमे सभी ने अपने अपने विचार रखे।




