अमेरिका ने पाकिस्तान से सवाल किया है कि आप केवल कश्मीर में मानवाधिकार के मसले को लेकर टेंसन में क्यो रहते हैं लेकिन पूरे चीन में मुसलमान लगातार जिस गंभीर स्थिति मे हैं, उनपर आप कभी चर्चा नहीं करते। कश्मीर मामले को अंतरराष्ट्रीय बनाने का प्रयास कर रहे पाकिस्तान को अमेरिका ने जबरदस्त पलटवार किया है।
अमेरिका ने पाकिस्तान से पूछा है कि आपको सिर्फ कश्मीर के मुसलमानों की फिक्र क्यों है, चीन के मुसलमानों की फिक्र क्यों नहीं है? दक्षिण और मध्य एशिया में अमेरिका के कार्यकारी असिस्टेंट सेक्रेटरी एलिस वेल्स ने संयुक्त राष्ट्र संघ की 74वीं जनरल असेंबली को संबोधित करते हुए पाकिस्तान की कड़ी निंदा की है।
उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के चीन के विरुद्ध कोई आवाज नहीं उठाने को लेकर कई प्रश्न खड़े कर दिए है। एलिस वेल्स ने बताया कि चीन के जिनजियांग प्रांत में करीब 10 लाख मुसलमानों को बंदी बनाकर रखा गया है, उनकी स्थिति भयभीत है, लेकिन पाकिस्तान वह मुद्दा कभी नहीं उठाता।
चीन देता रहा है पाकिस्तान का साथ
चीन पाकिस्तान का करीबी साथी है। चीन अधिकतर बिना किसी दबाव के हर लेवल पर पाकिस्तान के बचाव में सामने आ जाता है। चाहे मुद्दा मुंबई हमले का हो या पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मसूद अजहर पर पाबन्दी लगाने का हो, चीन ने अंतरराष्ट्रीय लेवल पर पाकिस्तान की सहायता की है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति अच्छी नही है और चीन इससे बाहर निकलने में भी पाकिस्तान की आर्थिक सहायता कर रहा है।
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एलिस वेल्स ने पाकिस्तान पर कोई तथ्य बताये
एलिस वेल्स ने बताया कि मैं बराबर लेबल की टेंसन उन मुसलमानों के लिए भी देखना चाहता हूं, जिनको पश्चिमी चीन में भयभीत स्थिति में रखा गया है। वे सही मायने में बहुत खराब स्थिति में है। चूंकि आप कश्मीर में मुसलमानों के मानवाधिकारों को लेकर बहुत अधिक परेशान हैं, इसलिए यह चिंता और अधिक व्यपाक रूप मांगती है।
उन्होंने कहा कि आपने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान प्रशासन को यहां बहुत सक्रिय रूप पर देखा है कि कैसे वह पूरे चीन में मुसलमानों के लिए जारी रहने वाली भयभीत हालातो पर जोर डालने का प्रयास कर रहा है। एलिस का यह बयान सामने तब आया है, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी जनरल असेंबली को संबोधित करने वाले हैं। पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वह अपने संबोधन में कश्मीर का मुद्दा उठाएंगे। लेकिन चीन को लेकर कोई बात नही करेंगे।



