टीम इंडिया के धुआंधार बल्लेबाज “यशस्वी जयसवाल” संघर्ष के दिनों में गोलगप्पे बेचते थे, पूरी कहानी

0
2140
Yashasvi Jaiswal
Success Story of Indian Cricketer Yashasvi Jaiswal. Yashasvi Jaiswal Lived in a tent, sold pani puri, slept hungry, now plays cricket in IPL.

Mumbai: दोस्तों हर कोई बचपन से बड़े होते तक एक ही चीज के बारे में सोचता है और वह सफलता। हर किसी के लिए सफलता के अलग-अलग मायने होते हैं, जैसे एक स्टूडेंट अगर अच्छी पढ़ाई करके पास होता है तो सफलता है। एक कलाकार अच्छी एक्टिंग करके हिट फिल्म देता है, तो सफलता है।

वही जब कोई खिलाड़ी लंबे संघर्ष के बाद अपने हुनर के जरिए बेहतर परफॉर्मेंस देता है, तो वह भी एक सफलता है। परंतु यह सफलता इतनी आसान नहीं होती। ऊंचे मुकाम तक पहुंचने और सफलता पाने के लिए एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। कभी यह लड़ाई खुद से होती है और कभी अपने जीवन को सरवाइव करने के लिए लड़नी पड़ती।

आज हम जिस युवा क्रिकेटर (Young Cricketer) की बात कर रहे हैं, जिनके खेल की चमक दुनिया भर में फैल रही है, परंतु 20 वर्ष के खिलाड़ी को यहां तक पहुंचने के लिए जो जीवन जीना पड़ा, वो अति संघर्षपूर्ण था और आजीविका चलाने के लिए उन्हें गोलगप्पे की रेहड़ी (Golgappe Stall) भी लगानी पड़ती थी। परंतु इतने संघर्ष के बाद आज वह डबल शतक लगाने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के बल्लेबाज की लिस्ट में शामिल हैं।

यशस्वी के पिता करते हैं मजदूरी, उत्तर प्रदेश में जन्म हुआ

दोस्त हम बात कर रहे हैं यशस्वी कुमार जयसवाल (Yashasvi Jaiswal) की जो इस समय भारतीय टीम अंडर-19 के खिलाड़ी रहे हैं और आईपीएल में राजस्थान रॉयल (Rajasthan Royals) की तरफ से खेलते हैं। इन का जन्म गांव सूर्याना जिला भदोही उत्तर प्रदेश में 28 दिसंबर 2001 में हुआ था। इनके पिता का नाम भूपेंद्र कुमार जयसवाल है और माता का नाम कंचन जायसवाल है। यशस्वी पांच भाई बहन है।

यशस्वी के पिताजी मजदूरी का काम किया करते हैं, जिस वजह से परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यधिक कमजोर थी। इसके चलते यशस्वी अपने कैरियर को सवारने के लिए छोटी उम्र में ही घर छोड़कर मुंबई शिफ्ट हो गए थे। इन्होंने लंबा समय मुंबई के दादर में रहकर बिताया।

यशश्वी आर्थिक संघर्षों के चलते, गोलगप्पे बेचा करते थे अपनी जीविका चलाने

भदोही से मुंबई आने के बाद यशस्वी को जीविका चलाने के लिए कई तरह के कार्य करने पड़े। सर्वप्रथम रहने के लिए उन्होंने मुंबई के आजाद मैदान के कर्मचारियों के साथ उनके एक टेंट को ही अपना आशियाना बनाया। एवं जीविका चलाने के लिए गोलगप्पे का ठेला (Pani Puri Thela) लगाया करते थे।

गोलगप्पे बेचने के दौरान जब कभी उनके साथी खिलाड़ी वहां से गुजरते तो वो छिप जाया करते थे। क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि उनके साथ के लोगों को पता चले कि वह क्या काम करते हैं। कभी-कभी किसी मैच में अच्छा परफॉर्म करने पर भी इनाम के रूप में कुछ पैसे मिल जाते थे।

विजय हजारे ट्रॉफी में 200 से अधिक रन मार के चमके यशस्वी आज है टीम इंडिया के खिलाड़ी

वैसे तो यशस्वी जयसवाल कई सालों तक लोकल क्रिकेट खेला करते थे, जिसमें अच्छे परफॉर्मेंस की वजह से उन्हें महाराष्ट्र क्रिकेट टीम में शामिल किया गया। तत्पश्चात महाराष्ट्र की तरफ से खेलते हुए “विजय हजारे क्रिकेट टूर्नामेंट” में झारखंड के खिलाफ खेलते हुए यशस्वी ने 154 बॉल पर धुआंधार 203 रन ठोक डाले।

इनकी आतिशी पारी के बाद देश के समस्त क्रिकेट एक्सपर्ट की निगाह इन पर जम गई। लेफ्ट हैंड की बल्लेबाजी करने वाले यशस्वी जयसवाल आज भारत के अंडर-19 टीम का हिस्सा बन चुके हैं।

आई पी एल में राजस्थान रॉयल्स ने इन्हें शामिल किया था टीम में

आपको बताना चाहेंगे यशस्वी द्वारा 203 दिन का अर्थात डबल शतक की पारी खेलने के बाद आईपीएल टीम में खिलाड़ियों के चयनकर्ताओं की निगाह इन पर पड़ी। इसके बाद राजस्थान रॉयल्स में 2020 में बैटमैन के तौर पर 20 साल के आक्रामक बल्लेबाज के तौर पर यशस्वी जयसवाल को अपनी टीम में शामिल कर लिया।

इसके लिए यशस्वी को 2.4 करोड़ की फीस राजस्थान टीम की तरफ से फेंकी गई थी। मजदूर पिता के परिवार से निकलकर, गोलगप्पे की रेडी लगाने से लेकर ढाई करोड़ रुपए आईपीएल के एक सीजन में कमाने तक का यशस्वी का यह सफर काफी संघर्षों से भरा था। हम उनके आने वाले जीवन और करियर के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here