
Gurugram: आधुनिक दौर में जर्मन और नॉन स्टिक बर्तनों का चलन है, इससे पहले हमारे दादा दादी के समय मिट्टी से बने बर्तनों का इस्तेमाल हुआ करता था। उस वक्त दादी नानी चूल्हे पर मिट्टी के बर्तनों में खाना पका दी थी, उस खाने का स्वाद आज के खाने से काफी ज्यादा अच्छा होता था और सारे पोषक तत्व मिल जाया करते थे।
आज के दौर की बात करें, तो नॉन स्टिक बर्तन में इस्तेमाल होने वाली नॉनस्टिक कोटिंग की धातु मानव शरीर के लिए काफी ज्यादा नुकसान देय है। नॉन स्टिक बर्तनों में उपयोग होने वाली धातु का नाम टेफलॉन है जो शरीर के लिए काफी घातक होती है। लगातार नॉन स्टिक बर्तनों के इस्तेमाल से व्यक्ति एक समय के बाद बड़े-बड़े और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो सकता है।
आधुनिक समय को पाश्चात्य सभ्यता ने काफी ज्यादा घेर रखा है, लोगों को धीरे-धीरे इसका एहसास हो रहा है और वह वापस अपने पुराने समय में लौटने की कोशिश कर रहे हैं। इसका एक उदाहरण है एक इंजीनियर युवा (Engineer Youth) जिसने मिट्टी के बर्तनों का निर्माण कर पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में अपना योगदान दे रहा है। साथ ही लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रहा है आइए जाने इस युवक के बारे में।
मिट्टी से बने बर्तनों की मांग बढ़ रही है बाजार में
दोस्तो हम जानते है की हमारा शरीर पंच तत्वों से मिलकर बना है और ऐसा माना जाता है की मिट्टी में सभी प्रकार के खनिज और ज़रूरी तत्व पाए जाते है। यदि मिट्टी के बर्तन का लगातार उपयोग किया जाए, तो लोगो के शरीर में सभी जरूरी तत्व पहुंचने लगते है।
आधुनिक समय के साथ वैज्ञानिक आविष्कार ने अपने पैर कुछ इस प्रकार फैलाए है की व्यक्ति पूरी तरह आधुनिक संसाधनों पर निर्भर हो गया है। लोग लगातार फ्रिज का इस्तेमाल करते है, फ्रीज के ढेर सारे नुकसान है। सबसे पहले फीज से निकलने वाली गैस बतावरण में प्रदूषण फैलती है और फ्रिज में रखे प्रोडक्ट समय के साथ अपने जरूरी पोषक तत्व खो देते है।
यदि हम गर्मी के समय मिट्टी से बने घड़े का इस्तेमाल करते है, तो घड़े के पानी के अपने फायदे होते है। अब मार्केट में मिट्टी से बने कुकवेयर और पानी की बोतल जेसे प्रोडक्ट मिल रहे है। साथ ही प्रोडक्ट की मांग भी मार्केट में बढ़ते जा रही है।
23 वर्षीय युवक ने शुरू किया मिट्टी से बने बर्तन का व्यापार
हरियाणा (Haryana) राज्य से ताल्लुक रखने वाले नीरज शर्मा (Neeraj Sharma) पेशे से एक इंजीनियर है, इसके साथ ही उन्होंने बिना किसी केमिकल के इस्तेमाल के मिट्टी से बने बर्तनों का व्यवसाय शुरू किया। उनका कहना है कि यह व्यापार उन्होंने खासतौर पर कुंभार वर्ग के व्यक्तियों के लिए शुरू किया है।
इस व्यवसाय की खासियत है कि बे मिट्टी से बनने वाले बर्तन का ज्ञान रखते हैं, तो वह ऐसे लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं। अब लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो गए हैं, जिसकी वजह से वह आधुनिक समय में चलने वाले एल्युमीनियम और नॉन स्टिक कोटिंग के बर्तनों का इस्तेमाल छोड़कर मिट्टी से बने बर्तनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जैसे-जैसे मार्केट में इन बर्तनों की मांग बढ़ रही है वैसे-वैसे इस व्यवसाय में भी बढ़ोतरी आ रही है।
नीरज के काम की शुरुआत
जानकारी के अनुसार नीरज ने आज से 2 वर्ष पहले इस काम की शुरुआत अपने ही गांव के 2 कुम्हारों के साथ की थी। यह लोग प्योर मिट्टी के बर्तन बनाते हैं जिनमें न किसी प्रकार का रंग होता है और ना किसी रसायन का इस्तेमाल किया जाता है।
इन्होंने अपने व्यापार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आप और मैं नाम से शुरू किया था। दो कुम्हारों के साथ शुरू किया व्यवसाय आज आठ कुम्हारों के साथ अन्य स्टाफ भी शामिल हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार नीरज शर्मा के पिता बिजली विभाग में काम करते हैं और उनकी माता ग्रहणी है। उनके घर में खेती किसानी का काम भी होता है।
नीरज ने अपने जीवन का ज्यादातर समय अपने उस गांव में बिताया है, जहां वे आज काम कर रहे हैं वर्ष 2016 में उन्होंने रोहतक से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर गुड़गांव में एक अच्छी खासी कंपनी में जॉब करने लगे। 1 साल नौकरी करने के बाद उनके मन में अपना खुद का स्टार्टअप करने का विचार आया और उन्होंने ठान लिया कि वह कुछ अच्छा करेंगे।
बर्तन बनने वाले कारखाने में किया काम शुरू
नीरज शर्मा को बर्तन (Pottery) बनाने वालों का आईडिया (Business Idea) अपने ही घर से आया वह कारोबार की तलाश में थे, तभी उन्होंने देखा कि उनके घर में काफी सारे बर्तन है, जो मिट्टी से बने हैं। उनके मन में आया कि यह बर्तन कोई कारीगर बनाता होगा फिर उन्होंने इसकी पूरी जानकारी निकाली।
जानकारी के अनुसार में एक कारखाने में पहुंचे और वहां जॉब करने लगे। वहां उन्होंने देखा कि लोग मोल्ड से कई तरह के बर्तन मिट्टी (Mitatee Ke Bartan) से बना रहे हैं। उन्होंने अपने कारोबार की शुरुआत में मोल्ड का प्रयोग किया उन्होंने देखा कि मोल्ड से बनाए हुए बर्तनों में कास्टिक सोडा और सोडा सिलिकेट का इस्तेमाल हो रहा है, जो कहीं ना कहीं मानव शरीर को नुकसान पहुंचाता है, तो उन्होंने मोल्ड से बर्तन बनाने छोड़कर हाथों की कारीगरी से बर्तन बनवाने प्रारंभ किए।
दो कुम्हारों के साथ उन्होंने बर्तन बनाएं, उनके बर्तन चमकीले नहीं थे वह प्योर मिट्टी के बने हुए थे। अपने बर्तनों को बेचने और उनकी गुणवत्ता बताने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा लिया और आज भी इस व्यापार के बादशाह बन गए हैं।




