
Haridwar: हमारा भारत देश सदियों से पूरी दुनिया का अध्यात्म संस्कृति ज्ञान एवं शिक्षा का केंद्र रहा है। अगर हम एक नजर इतिहास में डालें तो पिछले हजारों सालों में विदेशों से कई ज्ञानी पुरुष आध्यात्मिक योग एवं ज्ञान की खोज में हजारों मील का सफर तय करके भारत को ढूंढते हुए इस देश की धरती तक पहुंचे हैं।
ऐसे ही एक बेन बाबा (Ben Baba) का वीडियो कुछ दिन पहले हरिद्वार (Haridwar) से वायरल हुआ था। जो कि मूलतः स्विट्जरलैंड के रहने वाले थे, 33 वर्षीय बेन 6000 किलोमीटर की यात्रा 18 देशों से होते हुए पैदल चलकर भारत पहुंचे। बेन आज पूर्ण रूप से भगवा धारण कर चुके हैं।
वह कमर पर चटाई को बांधे हुए हैं एवं सामान के नाम पर सिर्फ एक लोटा रखते हैं अपने पास, वही बाल साधुओं के समान लंबे-लंबे एवं गुथे हुए, स्विट्जरलैंड (Switzerland) की लग्जरी लाइफ से निकल के भारत में पूर्ण रूप से सन्यासी बन चुके आध्यात्म के दीवाने बेन बाबा की आज हम आपको पूरी जीवनी बताने वाले हैं।
कभी बेन करते थे वेब डेवलपमेंट, आजकल कहलाते हैं बाबा
जानकारी के अनुसार बेन की उम्र 33 वर्ष है और यह स्विट्जरलैंड के रहने वाले हैं। बेन स्विट्जरलैंड में पेशे के तौर पर वेब डेवलपमेंट का काम किया करते थे। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया वह अपने काम में माहिर थे एवं प्रोफेशनल होने की वजह से अच्छा खासा पैसा कमा लेते थे।
जिस वजह से उनकी लाइफ में लग्जरी एवं आराम की कोई कमी नहीं रही। परंतु काम के दौरान उन्होंने महसूस किया कि यहां पर आराम तो है, परंतु आध्यात्मिक एवं योग की तरह जीवन में सुख नहीं है।
धीरे-धीरे उन्होंने अपना रुख शांति और सुकून की खोज में अध्यात्म की तरफ किया और स्विट्जरलैंड में ही योग की प्रैक्टिस शुरू कर दी। वो कहते हैं जैसे-जैसे योग की तरफ उनकी प्रैक्टिस बढ़ी उन्हें भारतीय अध्यात्म ने अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया। आज ये भारत के हिमाचल प्रदेश में बस चुके हैं।
स्विट्जरलैंड से भारत तक का सफर 6000 किलोमीटर 18 देश
योग प्रैक्टिस के दौरान बेन यह निर्णय लिया कि, अब वह भारत में ही अध्यात्म एवं शांति की खोज में जीवन बिताएंगे। जिसके लिए वह अपना सब कुछ त्याग के स्विट्जरलैंड से भारत की ओर पैदल रवाना हुए। नंगे पैर चलते हुए बेन ने स्विट्जरलैंड से भारत तक पूरे 6000 किलोमीटर का सफर तय किया।
इस सफर में उन्होंने करीब 18 देशों को पार करना पड़ा। बैंड बताते हैं कि हर देश में प्रवेश करने से पहले ही वह उस देश के वीजा के लिए अप्लाई कर चुके होते थे। बेन ने भारत आने के लिए इन देशों को पार किया, ईरान, तुर्की, जॉर्जिया, आर्मेनिया, किर्गिस्तान, रूस, पाकिस्तान एवं चीन।
भारत की आध्यात्मिक संस्कृत एवं योग ने किया आकर्षित
बेन बताते हैं स्विट्जरलैंड में काम के दौरान अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में जब भी उन्हें योग करने का मौका मिलता था, तो उन्हें इससे अपार शांति प्राप्त होती थी। जिस वजह से जल्दी उन्हें महसूस हो गया कि भारत की संस्कृति एवं योग में ही उन्हें सच्ची शांति प्राप्त होने वाली है।
भारत आने के बाद बेन ने अलग अलग मंदिर एवं मठों में आध्यात्मिक की प्राप्ति हेतु कई बार ध्यान योग किया। आज वह पतंजलि में बकायदा योग की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। भारत की संस्कृति को ठीक से समझने के लिए बेन ने बहुत जल्द हिंदी किताब के जरिए फर्राटेदार हिंदी बोलना भी सीख लिया।
बेन बन चुके हैं एक संपूर्ण सन्यासी, फोन भी नहीं रखते
भगवा वस्त्र धारण कर आज बेन एक संपूर्ण सन्यासी बन चुके हैं। सामान के नाम पर आप फोटो में देख सकते हैं, उनके पास सिर्फ वही एक चटाई और लोटा है। यहां तक की बेन मोबाइल फोन भी नहीं रखते। किसी मस्त मौला सन्यासी की तरह घूमते हुए बेन आपको गंगा किनारे हिमाचल प्रदेश में कहीं भी देखे जा सकते हैं।
भारतीय आध्यात्म का प्रभाव!
स्विटज़रलैंड के बेन बाबा जो मूलतःवेब डिज़ाइनर हैं भारतीय आध्यात्म से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने शानशौक़त का जीवन छोड़ ध्यान योग अपना लिया।अब वे क़रीब 6.5हज़ार किमी की पैदल यात्रा कर कुम्भ हेतु हरिद्वार पहुँचे हैं।#thursdaymorning #KumbhMela2021 pic.twitter.com/8ohrL3QQmW— Dr. Devendra Bhasin (@DrDBhasin) March 25, 2021
उनका जहां मन होता वहां वह ध्यान लगाते हैं एवं जब चलते-चलते थकते हैं, तो खुले आसमान के नीचे किसी भी निर्जन स्थान जंगल या फुटपाथ पर ही अपनी चटाई बिछाकर सो जाते हैं। जीवन यापन के लिए भिक्षा मांग कर भोजन करते हैं।
उनकी सोच है कि भारत से ज्ञान प्राप्ति के बाद वह वापस अपने देश स्विजरलैंड जाएंगे और इस समृद्ध भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति का प्रचार प्रसार करेंगे। बेन इस समय हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के अंतर्गत मैकलोडगंज में अपना स्थान बना चुके हैं।



