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Delhi: हमारे आस पास कई ऐसे एरिया रहते हैं। जिनके बारे में हमे कोई खबर तक नहीं रहती। यहा तक की इस एरिया के भू वैज्ञानिक को भी इस बारे मे पता नहीं होता है कि उनके आस पास के फ़ैले जंगलो मे क्या क्या होगा।
आइए आज हम इस पोस्ट के जरिए एक ऐसे जंगल के बारे में आपको जानकारी देते हैं। जो कुछ ही क्षेत्र में नहीं बल्कि अरबो एकड़ मे फ़ैला है। यह जो जंगल है बहुत ही विशाल एवं रहस्यमय है। बता दे कि इस विशालमय अमेजन फ़ारेस्ट मे जंगल के बहुत सारे क्षेत्र ऐसे है। जहा तक कोई भी नही जा पाया है।
यह जंगल इतना बड़ा हैं कि नौ देशो के बार्डर से लगा है एवं इस जंगल में पेड़ पौधे और पशु पक्षी की ढेर सारी ऐसी प्रजातियाँ है। जिनके बारे मे हम कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकते।
पेरू से जुडी हुई है यह नदी जिसे Boiling रिवर कहा जाता है
बता दे कि यह विशालमय अमेजन फ़ारेस्ट (Amazon Forest) के एक हिस्से या कोने में नौ देशो मे से एक देश पेरु जुड़ा हुआ है। उस एरिया मे एक ऐसी नदी हैं जो हमेशा उबलती रहती है। इसलिए इस नदी को Boiling River कहा जाता है।
बताया जा रहा है कि वैज्ञानिक इस नदी के संबंध में यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि इस नदी के उबलने का क्या कारण है। साथ ही इस नदी को विश्व का सबसे बड़ा थर्मल रिवर (Thermal River) भी माना जा रहा हैं।
आन्द्रे रूजो ने 2011 मे की थी इस नदी की खोज
आपको बता दे कि इस बायलिंग रिवर जिसे मयानतुयाकू नदी के नाम से पहचाना जाता है। जिसकी खोज साल 2011 मे भूवैज्ञानिक आन्द्रे रूजो ने की थी। आन्द्रे बताते है कि वह बचपन में Boiling रिवर की कहानी अपने दादाजी से सुना करते थे। जिससे उनको यह यकीन था कि अगर लोककथा मे इस नदी के बारे मे बताया गया है। तो सच मे ऐसी नदी भी होगी। इसलिए उन्होने इस नदी की खोज के लिए बहुत मेहनत की।
आन्द्रे के भूवैज्ञानिक बनने पर सबसे पहले उन्होने इस नदी की ही खोज करना प्रारंभ किया। उन्होने गैस कम्पनियो और सरकार से भी पता किया कि उन्हे इस नदी के बारे मे कोई जानकारी तो होगी।
साथ ही खदानो से भी पता लगाया परंतु सबने इस बारे मे कुछ जवाब नहीं दिया। इस बारे मे आन्द्रे को कुछ जानकारी नही मिलने पर उन्होने स्वयं ही नदी को खोजने का निर्णय किया।
आन्द्रे को पानी के स्त्रोत मिलने के बजाय मिली नदी
बता दे कि आन्द्रे को इस उबलती नदी की तलाश मे निकलने से पहले ही अन्य वैज्ञानिक ने पहले ही बताया था कि अमेजन फ़ारेस्ट मे ऐसी कोई उबलती नदी नही है। क्योकि वह फ़ारेस्ट किसी भी जिन्दा ज्वालामुखी से कोशो दूर है। इन सब बातो के बावजूद भी इस नदी की तलाश करने के लिए चले गए।
बता दे कि यह सब घटना वर्ष 2011 की है। जब वह टेक्साम युनिवर्सिटी में पीएचडी कर रहे थे। वह इस नदी को खोजने के लिए यह विचार कर रहे थे कि कही ना कही गर्म पानी का स्त्रोत ही मिल जाए तो अच्छा है। परंतु जो आन्द्रे के साथ हुआ वह एकदम उनकी सोच के उल्टा। क्योंकि उन्हें पानी के स्त्रोत के बजाय वह नदी ही मिल गई।
यहा की जनजाति इस नदी को अपनी भाषा मे कहते हैं मयानतुयाकू
आन्द्रे की खोज रंग लाई क्योकि पेरू से लगे हुए अमेजन फ़ारेस्ट मे करीब चार मील दूर तक फ़ैली एक उबलती नदी मिली। जिसके आस पास पेरू की जनजाती Ashaninka बसी हुई है। जो कि इस नदी को अपनी भाषा में मयानतुयाकू (Mayantuyacu River) कहते हैं। इसे वह पवित्र मानते हैं।
There's a boiling river in Peru that kills anything that goes into it, with temperatures up to 93°C [read more: https://t.co/zMGhcTVDCS] pic.twitter.com/uOnSIb6tRd
— Massimo (@Rainmaker1973) December 22, 2020
बता दे कि एक रिपोर्ट के मुताबिक आन्द्रे बताते है कि इस नदी का पानी वास्तव मे बहुत गर्म है। जिसमे उंगली भी डाली तो यह उंगली एक सेकेण्ड के अंदर जल सकती है। क्योकि उन्होने अपने सामने ही इस नदी मे कई बार जानवर को उबलते और जलते देखा है। यह सब को देखते हुए आन्द्रे ने इस नदी के बारे में एक किताब लिखी है जिसका नाम द बायलिन्ग रिवर: एड्वेचर एंड डिस्कवरी इन द अमेजन।
वैज्ञानिक नदी की तह तक पहुंचने की कर रहे हैं कोशिश
बता दे कि नदी के सबसे पास की ज्वालामुखी की दूरी करीब 700 किलोमीटर है। जो कि काफ़ी दूर है। यह ज्वालामुखी बहुत दूर होने के बाद भी इस नदी का पानी उबल रहा है। इसका क्या कारण है? वैज्ञानिक अनुमान लगा रहे हैं कि इन सबका कारण भूमि की अंदर की गतिविधिया है। जिसकी गहराई से खोज करने की वह कोशिश कर रहे हैं।
यहा की जनजातियो के साथ मिलकर कर रहे हैं इस प्रोजेक्ट पर काम
आन्द्रे के अनुसार जब हमारे पुर्वज इस नदी के बारे में जानते होगे। तब इस नदी का नाम Shanay-Timpishka था। जिसका मतलब सूरज की गर्मी से उबला हुआ पानी होता हैं। बता दे कि वर्तमान मे इस नदी के प्रोजेक्ट पर ही काम चल रहा है। जिसमे इस नदी के पास मे रहने वाले जनजाति लोगो को भी जोडा जाएगा।
The 4-mile-long 'boiling river' in Peru reaches temps of 90°C, killing any creature that enters it. It's 700km away from the nearest volcano pic.twitter.com/FTlGNoo9jx
— Nature Is Weird (@NaturelsWeird) April 7, 2017
इन सभी के बाद आने जाने वाले राहगीरो को सझाया जा रहा है कि कोई भी इस नदी मे तैरने के बारे में नहीं सोचे ना नदी मे कुछ फ़ेके और ना ही किसी को नुकसान पहुंचाए। क्योकि इस पानी लगभग 80 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक तापमान वाला होता है। जिसमे एक सेकेण्ड में कोई भी बुरी तरह से जल जाता है।



