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Bhagalpur: लोग कहते हैं कि घर ग्रहसती की सारी जिम्मेदारी केवल आदमी पर ही होती है। वही हर परेशानी का हल ढूँढ कर सबकी खुशियो का ध्यान रखते है। लेकिन ऐसा नहीं है, क्योंकि आपने भी देखा होगा कि हमारे देश की महिलाए किसी भी काम में कभी पीछे नहीं हटती है। जब भी कोई बड़ी परेशानी हो तो पुरी मेहनत व लगन से अपने परिवार की सारी जिम्मेदारी अपने कंधे पर ले लेती है।
बता दे कि ऐसी महिलाए अपने घर परिवार को चलाने के लिए कुछ भी कर सकती है। इन्ही सब मेहनती महिलाए मे से एक महिला पिंकी देवी (Pinky Devi) है। जो की बिहार राज्य की रहने वाली है।
वह इतनी मेहनती है कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण होने वाली तंगी का सामना करके ई रिक्शा चलाकर अपने घर परिवार को सँभाल रही है। आइए आज हम आपको इस पोस्ट के जरिए पिंकी देवी के जीवन के बारे में कुछ बाते शेयर करते हैं कि उनका यह नया जीवन कैसे प्रारंभ हुआ।
जानिए पिंकी के परिवार के बारे में
बता दे कि पिंकी देवी की आयु 30 वर्ष है। जो अब पेशे से एक रिक्शा चालक है। यह बिहार (Bihar) राज्य के भागलपुर (Bhagalpur) मे रहती है। पिंकी देवी की शादी की बात करे, तो इनकी शादी अमरजीत नाम के लड़के से जो कि भागलपुर के ही है उनसे हुई है। इनके परिवार मे इनकी दो बेटियाँ रिया और वर्षा एवं दो बेटे सत्यम और शिवम है। इन बच्चो के अलावा पिंकी के सास ससुर भी है।
किस मजबूरी से पिंकी ने किया ई रिक्शा चलाना शुरु
पिंकी बताती है कि जब उन्होने अमरजीत से शादी की थीं। तब घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब चल रही थी और उनके पति के ऊपर कर्ज भी बहुत ज्यादा था। यहा तक कि उनकी जमीन भी नही थी।
जिससे उनकी घर मे आर्थिक तंगी होने की वजह से यह सब कर्ज चुका पाना एवं अपने परिवार का अच्छी तरह से भरण पोषण करना बेहद कठिन हो रहा था। इसी सब परेशानी को देखते हुए पिंकी के पति घर छोड़कर भाग गये। जिससे पिंकी के कंधे पर परिवार को सम्भालने से लेकर कर्ज चुकाने तक की सारी जिम्मेदारी आ गयी।
वह बताती है कि उनके पति के घर छोड़ने के बाद उन्होने ई रिक्शा (E-Rikshaw) चलाने का निर्णय लिया। ताकि इससे घर की भी परेशानी एवं आर्थिक स्थिति मे सुधार आ जाए। अब वह ऑटो चलाकर 800 रुपये प्रतिदिन की कमाई कर रही हैं। आज वह इन्ही पैसो से अपने घर के खर्चो के साथ साथ अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई भी करवा रही है।
ज्यादा पढ़ाई नही करने के बावजूद भी पिंकी शिक्षा के महत्व को समझती हैं अच्छे से
पिंकी देवी जो कि अब एक रिक्शा चालक है। वह बताती है कि उन्हे पढ़ने लिखने का काफ़ी शौक था। लेकिन अपने घर मे वह सबसे बड़ी होने के कारण व घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह केवल 8 वी क्लास तक ही पढ़ाई कर पाई।
पिंकी सिर्फ़ 8वी कक्षा तक ही पढ़ पाई, लेकिन वह शिक्षा के महत्व को काफ़ी अच्छी तरह से समझती हैं। क्योकि उनकी भी आगे पड़ने की इच्छा अधुरी रह गयी थी। इसी वजह से वह सारे कष्ट उठाते हुए रिक्शा (Electric Rickshaw) चलाकर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना चाहती है।
बाकी महिलाओं के लिए पिंकी जी है एक प्रेरणा
पिंकी देवी ने अपने परिवार की सारी जिम्मेदारी उठाकर यह साबित कर दिया है कि पुरुष ही नही, बल्कि एक अकेली महिला भी अपने परिवार को सँभाल सकती हैं। सिर्फ इतना ही नहीं यह सब करते हुए ई रिक्शा चलाकर बाकी सब महिलाओ के लिए प्रेरणा की मिसाल बन चुकी है।
हर किसी ने ने पिंकी की खूब तारिफ़ भी कि है। पिंकी की यह मेहनत एवं यह कदम सबको यह सीख देता है कि महिलाए भी पुरूषो से कम नहीं है। अगर कुछ करने का ठान लो तो सब किया जा सकता है।



