
Delhi: कहते हैं लोहा भी आग में तप कर हथौड़े से पिट-पिटकर मूल्यवान बनता है। इसी प्रकार इंसान का संघर्ष है, जो इंसान को मूल्यवान बनाता है। एक इंसान भी अपने जीवन के संघर्ष की आग में जलता है और आगे बढ़ता है। दुनिया का हर व्यक्ति अपने अच्छे और बेहतरीन भविष्य के लिए बेहद संघर्ष में जीवन व्यतीत करता है।
व्यक्ति युवावस्था से जीवन का संघर्ष समझने लगता है। युवा अपने अपने भविष्य के क्षेत्र में मेहनत करते हैं और अपने लक्ष्य को पाने की कोशिश करते हैं। कई युवा व्यापार करते हैं, तो कुछ प्राइवेट नौकरी और कुछ प्रशासनिक नौकरी की तैयारी में रहते हैं।
वर्तमान समय के युवाओं में यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) के लिए काफी ज्यादा झुकाव देखा। यूपीएससी की परीक्षा देश की सबसे जटिल परीक्षा है, वह इसलिए क्योंकि यह परीक्षा तीन चरणों में होती है, पहला चरण प्रारंभिक परीक्षा दूसरा मुख्य परीक्षा और तीसरा साक्षात्कार।

यदि किसी उम्मीदवार ने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा निकाल ली और साक्षात्कार में फेल हो गया, तो वह व्यक्ति दुबारा से पहले चरण से शुरू करेगा। यही कारण है कि व्यक्ति बार बार फेल होने के बाद इस परीक्षा से हतोत्साहित होने लगता है।
कई बार तो युवा इस क्षेत्र में भविष्य बनाने की उम्मीद को छोड़ देते हैं और अन्य चीजों में अपना भविष्य खोजते हैं। परंतु कुछ ऐसे उम्मीदवार भी होते हैं, जो कई दफा फेल होने के बाद भी इस परीक्षा को अपना जीवन मानते हैं और परिश्रम में लगे रहते हैं।
यूपीएससी के उम्मीदवारों को देना पड़ता है समर्पण
यूपीएससी की परीक्षा कोई आम परीक्षा नहीं है, क्योंकि यह एक जीवन का बहुत बड़ा संघर्ष है। देश में कई ऐसे आईएएस और आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्होंने यूपीएससी की परीक्षा और उस आउडे के लिए दिन रात अथक परिश्रम किया और कई बलिदान भी दिए।
सोशल मीडिया पर ऐसे कई आईएएस ऑफिसर की सफलता की कहानी डली हुई है, जिन्हें देखकर और सुनकर एक ही बात का अनुभव होता है कि यूपीएससी सफलता के लिए बलिदान मांगता है। बलिदान का मतलब है अपने आरामदायक क्षेत्र से बाहर आना जैसे कि यदि कोई गांव का युवा यूपीएससी की परीक्षा देना चाहता है, तो उसके लिए सबसे बड़ा त्याग उसका घर होगा।
UPSC की सिविल सेवा परीक्षा (IAS) में #महावीर_सिंह_विश्वकर्मा गांव बिहोली (समालखा) हरियाणा की बेटी #मधुमीता_विश्वकर्मा जी ने देशभर में 86वां रैक हांसिल किया। बेटी को ढेरों आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं।💐@jdshahpur @jangidyodha @dharmvir_9 @sachujangra @AlVishwakarma1 pic.twitter.com/lxKQCql6tV
— Satisha Devi (@DeviSatisha) August 7, 2020
युवा अपने घर में सुख सुविधा और आराम से रहता है, परंतु घर से दूर माता-पिता से दूर रहकर एक कमरे में बंद होकर पढ़ाई करना भी एक संघर्ष है। आज की कहानी भी एक ऐसी बेटी की है, जिन्होंने अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए 5 वर्षों तक अपने परिवार से दूर रहें और पढ़ाई करके आईएएस अधिकारी बन के अपने घर लौटी।
हरियाणा की मधुमिता की कहानी
भारत देश के अंतर्गत आने वाला हरियाणा (Haryana) राज्य का पानीपत (Panipat) जहां एक आईएएस अधिकारी मधुमिता (IAS Officer Madhumita) का जन्म हुआ। मधुमिता हरियाणा में जन्मी, परंतु उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली से की। मधुमीता उन आईएस अधिकारियों में आती है, जिन्होंने अपने जीवन को इतना संघर्ष और समर्पण के साथ जिया।
A Good Interaction with IAS Madhumita Ma'am in Zoom Meeting & Some Motivation Lines help to those Prepares UPSC Exam.
Plz Subscribe IAS Madhumita Ma'am YouTube Page!Big Thanks to @BrahmapurCorp@SDTE_Odisha @Ganjam_Admin @sdmbam @Vijaykulange @keerthi_ias @IASassociation pic.twitter.com/FSEEnEqddK
— Subham Panigrahy (@PanigrahySubham) June 7, 2021
उन्होंने 5 वर्षों तक अपने माता-पिता से दूर रहकर यह सफलता हासिल की मधुमिता बताती हैं कि उनका जीवन काफी संघर्षमय था। एक तो वे परिवार से दूर थी, ऊपर से उन्हें काम के साथ साथ पढ़ाई भी मैनेज करनी होती थी।
यूपीएससी के उम्मीदवारों के लिए मधुमिता की सलाह
यूपीएससी की परीक्षा पास कर मधुमिता ने अपने छोटे भाई बहन जो यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें सलाह देते हुए कहा की यूपीएससी की तैयारी शुरू करने से पहले अपने चारों तरफ सकारात्मक माहौल बना ले इसके बाद पढ़ाई की रणनीति को तैयार करते हुए सबसे पहले यूपीएससी के सिलेबस को अच्छी तरह पढ़ लें उसके हिसाब से आप अपनी पढ़ाई शुरू करें।
मधुमिता कहती है कि यूपीएससी के उम्मीदवार को हमेशा फोकस्ड रहना चाहिए और सोशल मीडिया से बहुत दूर। पूरे सिलेबस को पढ़ने के बाद और दोबारा दोहराने के बाद ज्यादा से ज्यादा आंसर राइटिंग की कोशिश करें।
Madhumita IAS allocated to the Odisha Cadre | CSE 2019 – https://t.co/GhCQqdpMeV pic.twitter.com/xqN0g2DRnG
— Indian Bureaucracy (@INDBureaucracy) March 1, 2021
इससे आपकी आंसर लिखने की आदत बनेगी और जितना लिखेंगे, उतना करेक्शन भी होते जाएगा। आप मॉक टेस्ट भी लगा सकते हैं, साथ ही स्वयं के नोट्स भी तैयार कर सकते हैं। इस प्रकार आपकी तैयारी 100 प्रतिशत हो जाएगी।
वर्ष 2019 में मधुमिता बनी आईएएस अधिकारी
आपको बता दें कि मधुमिता वर्ष 2019 में आईएएस अधिकारी बने, इससे पहले उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में 2 प्रयास किए थे। पहले प्रयास में वह इंटरव्यू तक पहुंची और दूसरे प्रयास में भी आईएएस अधिकारी बन गई। व्यक्ति की हार ही उसे बहुत कुछ सिखाते हैं, इसीलिए हार से घबराना नहीं है, बल्कि इसे स्वीकार कर आगे बढ़ना है।



