आपको नहीं मालूम होगा की पहले के ज़माने में ट्रैन में AC कोच कैसा होता था और उसे ठंडा कैसे रखते थे

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Frontier Mail Train
Frontier Mail was train before independence between Peshawar and Bombay. Now named Golden Temple mail. Train had AC Coaches.

Photo Credits:Twitter(@WesternRly)

Delhi: भारतीय रेलवे को भारत की जीवन रेखा भी कहा जाता है। पूरे एशिया में भारतीय रेल का दूसरा सबसे बड़ा Railway Network हैं और पुरे विश्व में तीसरे स्थान पर है। लाखों लोग रोज़ भारतीय रेल से यात्रा करते हैं। भारतीय ट्रेनों की बोगियां को अलग अलग श्रेणियों में रखा गया है।

रेलवे में General, Sleeper, AC 3rd Class, AC 2nd Class,और AC 1st Class की बोगियां लगाई जाती हैं। इसके अलावा भारतीय रेलवे ने कुछ ट्रेनें ऐसी भी चलायी है। जिस ट्रेनों में सारी बोगियां AC होती हैं। आईए बताते हैं, भारतीय रेलवे की सबसे पहली एसी बोगी की कब और कहां से इसको शुरू किया गया।

First Indian Air Conditioned Train पहली भारतीय रेल का चलन

जब ट्रेन चलने की शुरुआत हुई, तो उसको कुछ सालों बाद फर्स्ट क्लास और सेकंड क्लास डिब्बे भी बनाये गए लोग अपनी सुविधा से इनमें सफर का आनंद लेते थे और उस समय AC डिब्बे बनाये गए थे। आइये हम बताते हैं, भारत में ट्रेन की शुरुआत और AC कोच के बारे में।

भारत में पहली ट्रेन 1853 में चली और उसके कई सालो बाद 1934 में AC कोच (AC Coaches) बनाये गये। यह ट्रेन का सफर मुंबई से पेशावर (Mumbai To Peshawar) तक का था। इस ट्रेन को फ्रंटियर मेल (Frontier Mail) के नाम से जाना जाता था। यह ट्रेन दिल्ली, पंजाब और लाहौर (Delhi To Punjab To Lahore) होते हुए जाती थी।

यह ट्रेन लगभग 72 घंटे का सफर करती थी। इस ट्रेन से महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने यात्रा की थी। जब AC डिब्बे की बात आयी तो इन्हे ठंडा रखने का तरीका निकला और बर्फ की सिल्लियों से कोच को ठण्डा रखा जाता था, क्योंकी तब तक इंडिया में AC नहीं आये थे।

एक अलग टीम बनायीं गयी थी, जो ट्रेन में बर्फ चढाने का काम करती थी

यह काम बिलकुल भी आसान नही था, बर्फ से डिब्बे को ठंडा रखना बर्फ के पिघल जाने के बाद फिर से बर्फ की सिल्लियों को चढ़ाना कठिन था। इसके लिए अलग से टीम बनायीं गयी, जो यह कार्य करती थी खिडकियों में खस की चटाई लगायी गयी थी। उसे भिगो कर रखा जाता था, जिस से हवा ठंडी और खुशबूदार आती थी।

बर्फ के चैम्बर बनाये गए थे

भारतीय रेलवे के रिटायर्ड इंजीनियर और मेंबर ऑफ़ रेलवे बोर्ड राजेश मीडिया में बताते हैं, ट्रेन के एक डिब्बे में बर्फ के चैम्बर बनाये गए और एक पंखा लगाया गया। जिस से ठंडी हवा पुरे डिब्बे में फ़ैल जाती थी और डिब्बा ठंडा हो जाता था।

ऐसा कहते हैं अंग्रेज़ ज्यादातर सफर करते थे। 1940 के आस पास ट्रेन में 6 AC कोच बना दिए गए थे। इस ट्रेन की सबसे अच्छी बात यह थी कि यह Right Time पर चलती थी और कभी लेट नहीं होती थी। ऐसा कहते हैं एक बार ट्रेन लेट हो गई थी, तो उस ट्रेन के ड्राइवर से कारण मांगा गया था।

भारत के आज़ाद होने के बाद यह ट्रेन मुंबई से अमृतसर तक चलने लगी थी। 1996 में इस ट्रेन का नाम भी बदला गया और गोल्डन टेम्पल मेल (Golden Temple Mail) रख दिया गया। यात्रा में फर्स्ट और सेकंड क्लास के यात्रियों को खाना भी सर्व किया जाता था। यात्रियों को अखबार और किताबें दिए जाते थे, साथ में एंटरटेनमेंट के लिए ताश के पत्ते दिए जाते थे।

रेलवे स्टेशन में बर्फ के टैंकर बनाये गए

उस टाइम मुख्य रेलवे स्टेशन में बर्फ घर (Ice House) बनाये गए, जहाँ नीचे तरफ आइस प्लांट लगाया गया ऊपर पानी की टंकी बनायीं गयी, जिस से पानी लगातार उपलब्ध होता था और बर्फ की सिल्लियां भी खूब बनायीं जाती थी।ट्रेन में बर्फ की सप्लाई के अलावा भी बर्फ की सप्लाई अलग अलग दफ्तरों में की जाती थी, जिस से गर्मी के मौसम में अंग्रेज़ रह पाते थे।

आज पुरे भारत में शायद ही ऐसा परिवार होगा जिसने भारतीय रेल में सफर न किया हो। बच्चे तो गर्मियों की छुट्टियों का इंतज़ार करते थे की नानी के घर जाना है और इसमें ट्रेन के सफर का अलग ही मज़ा होता था।

बड़े बिज़नेस मेन काम की वजह से ट्रेन में सफर करते हैं, तो कई परिवार घूमने फिरने के शौक से ट्रेन के सफर का आनंद लेते हैं। कुल मिलाकर भारतीय रेल से भारत की जनता का भावनात्मक रिश्ता भी है, लोगो के कई यादगार पल होंगे।

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