
Aligarh: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ (Aligarh) जिले में रहने वाली आशा देवी एक दिहाडी महिला (Daily Wage Labor) मजदूर है जो अपने पति के साथ दैनिक मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण बड़ी कठिनाई से कर रही थी। वह बहुत ही मेहनती और जागरूक महिला है जिसने अपने परिवार के भलाई के बारे में सोचते हुए आगे बढ़ने का निर्णय लिया और उनके इस निर्णय को सफ़लता भी मिल गई।
आज भी वो एक अच्छा जीवन व्यतीत कर रही हैं और अपने परिवार को बहुत अच्छे तरीके से चला रहे हैं उनका चेहरा एक सफल बिजनेस वूमेन (Successful Business Woman) के रूप में उभर कर हमारे सामने आया जोकि उनकी मेहनत संघर्ष और लगन और अपने उद्देश्य के प्रति गहरी लगन का परिणाम है।
यह बात हम भली भांति जानते हैं कि यदि कोई व्यक्ति किसी भी लक्ष्य को निर्धारित कर ले और उसे अपनी मेहनत और लगन से प्राप्त करने के लिए ठान ले तो वह कभी विफल नहीं हो सकता और इस बात का उदाहरण आशा देवी हैं जो एक दिहाड़ी महिला मजदूर होकर भी कुशल एंटरप्रेन्योर बन गई और एक सफल बिजनेस वूमेन के रूप में हमारे सामने है।
आशा देवी का संघर्ष
आशा देवी (Asha Devi) उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ (Aligarh) जिले के टप्पल ब्लॉक के खंडेहा गांव की रहने वाली है उनका पूरा परिवार मजदूरी करके अपना भरण-पोषण बड़ी मुश्किल से कर पाता था मजदूरी करके उतना पैसा नहीं मिल पाता था, जिससे घर के सभी सदस्यों को पेट भर भोजन करा सके।
बहुत ही मुश्किलों में उन्होंने अपने परिवार को चलाया और आगे के भविष्य के बारे में चिंतन करते हुए सोचा कि ऐसे कब तक चलेगा कुछ तो करना ही पड़ेगा, ताकि जीवन सुचारु रुप से चल सके और परेशानियां खत्म हो सके। उनकी इस सोच ने उन्हें आगे नया भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया और सन 2015 से उन्होंने अपनी मजदूरी के पैसे से थोड़ी-थोड़ी बचत करना शुरू कर दिया।
इसी समय उन्हें एक व्यापार का उपाय सूझा और उन्होंने इस सोच को कार्य रूप में परिणत करने के लिए कमर कस ली ऐसा नहीं है कि इन सभी कामों में उन्हें संघर्ष नहीं करना पड़ा, उन्होंने भारी तकलीफ और परेशानियों को सहन करते हुए अपने स्टार्टअप बिजनेस को शुरू किया।
आशा देवी द्वारा वॉटर प्यूरीफाई आरओ प्लांट की शुरूआत
वर्तमान समय की जरूरत के अनुसार आशा देवी ने वाटर प्यूरीफायर आरओ प्लांट (Water Purifier RO Plant) लगाने के बारे में सोचा। घर में परिवार के सभी लोगों से रजामंदी लेकर प्रोजेक्ट को शुरू किया उन्होंने 52000 Ru का लोन लिया और अपनी मजदूरी से जो पैसे थोड़े-थोड़े करके बचाए थे वह करीबन डेढ़ लाख के करीब थे उन पैसे को अपने बिजनेस में लगाया।
आशा देवी ने सबसे पहले सीआरपी-ईपी की मदद से बीआरसी कार्यालय, ब्लॉक ऑफिस और जट्टारी के लोगों के साथ साथ टप्पल के दुकानदारों तक पानी पहुंचाना शुरू किया और उनके इस कार्य में उनके परिवार वालों ने भी बहुत मदद की जो धीरे-धीरे करके उनको सफलता की ओर ले गया।
इस प्रकार समय के साथ साथ उनके बिजनेस ने जोर पकड़ा और धीरे-धीरे उनकी अच्छी खासी कमाई होने लगी जिसमें उनके परिवार का सहयोग भी बराबर था और इस समय आशा देवी और उनका परिवार एक अच्छा जीवन व्यतीत कर रहा है।
शासन द्वारा स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम की सफलता
हम सभी जानते हैं कि वर्तमान समय में जनसंख्या बहुत तेज गति से बढ़ रही है जिस वजह से हमारे खानपान, प्राकृतिक संसाधन और रोजगार में कमी आ रही है, क्योंकि जनसंख्या वृद्धि के कारण शासन सभी को गवर्नमेंट जॉब नहीं दे सकती है।
उन्होंने आशा देवी जैसी अनेक महिलाओं के लिए जो मजदूरी करके अपना पालन पोषण कर रहे हैं और उनमें टैलेंट तो है परंतु बगैर लागत के अपने टैलेंट को भी नहीं दिखा सकती, तो शासन में स्टार्टअप ब्लेज एंटरप्रेन्योरशिप नामक प्रोग्राम की शुरुआत की जिसमें घरेलू उद्योग कुटीर उद्योग और अन्य बिजनेस को बढ़ावा दिया जिससे टैलेंटेड लोग अपने टैलेंट का उपयोग कर सकें और रोजगार द्वारा अपने जीवन स्तर को सुधार सकें।
स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम द्वारा आशा देवी को कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन एंटरप्राइज प्रमोशन ने एसवीईपी से पहचान करवाई आशा देवी को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित भी किया। मिशन निदेशक भानु गोस्वामी का कहना है कि, अभी ये कार्यक्रम राज्य के 18 जिलों और 19 विकास खंडों मे चल रहा है। जिसमे राज्य की लगभग 15,804 महिला उद्यमी लाभान्वित हो चुकी है।
आशा देवी द्वारा अपने व्यापार को ऊंचाइयों पर ले जाने की चाहत
आशा देवी के व्यापार में सफलता प्राप्त करने के बाद उनकी चाहत यहीं पर खत्म नहीं हो गई है। वह अपने व्यापार को ऊंचाइयों तक ले जाना चाहती है और इसके लिए वह कई प्रकार के उपायों को ढूंढ रही हैं और भविष्य में अपने आसपास के शहरों और स्थानीय बाजारों में भी पैकेज्ड वॉटर बॉटल की पूर्ति के बारे में सोच रही हैं जोकि बहुत ही संभव प्रयास है।



