
Bathinda: शिक्षा वह हथियार है जो हर परिस्थितियों से लड़ना सिखाता है। व्यक्ति अपने उच्च शिक्षा के लिए हर संभव कोशिश करता है, जो वह कर सकता है हर अभिभावक चाहता है कि उनका बच्चा खूब शिक्षित हो और अपने जीवन में सफल भी परंतु समाज में कुछ ऐसे बच्चे भी हैं, जिन्हें शिक्षा नसीब नहीं होती।
वह अपना जीवन फुटपाथ पर बिताते हैं, यहां तक कि उनके सर पर एक छत तक नहीं होती यह स्थिति काफी दुखद है, परंतु वास्तविक है भारत देश में गरीबी काफी ज्यादा है, जिसकी वजह से बच्चे अपना जीवन काफी संघर्ष में बिताते हैं।
वैसे तो आज के समय में व्यक्ति केवल अपने और अपने काम से मतलब रखता है, परंतु कुछ ऐसे समाजसेवी भी उभर के आए हैं, जिन्होंने हमारे देश के भविष्य को संभाला है। आज की पीढ़ी हमारे देश का भविष्य है समय के साथ देश में तरक्की आज का युवा ही ला सकता है और वह युवा तब तरक्की लाएगा, जब वह शिक्षित होगा इसीलिए कुछ व्यक्तियों ने अपने जीवन का सही इस्तेमाल किया और अपने देश के भविष्य को संवारा।
आज हम एक ऐसे ही व्यक्ति की बात करेंगे, जिसने अपने कर्तव्य को भली-भांति निभाया। हम बात कर रहे हैं पंजाब के भटिंडा शहर की जहां के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने गरीब बच्चों को शिक्षा देकर उनके भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश की।
भटिंडा के सुखपाल सिंह सिद्धू की कहानी
पंजाब (Punjab) राज्य के भटिंडा (Bathinda) शहर के सुखपाल सिंह सिद्धू (Sukhpal Singh Sidhu) एक शिक्षक के साथ-साथ एक अच्छे समाजसेवी भी हैं। अक्सर कई बच्चों को सड़कों पर भीख मांगते और लोगों के सामने गिड़गिड़ाते हुए देखा है। उन्हें देखकर काफी तकलीफ होती है, क्योंकि उनकी स्थिति काफी दयनीय होती है।
कुछ ऐसी ही तकलीफ और दुख सुखपाल सिंह सिद्धू को भी होती है उन्होंने जब यह देखा, तो निश्चित किया कि वह इन बच्चों को शिक्षित करेंगे और एक उज्जवल भविष्य देंगे। अपने शिक्षक होने का धर्म निभाते हुए उन बच्चों को सड़क पर ही शिक्षा देना प्रारंभ कर दिया।
हम कह सकते हैं कि शिक्षक ने सड़क को ही स्कूल बना दिया अभी उन्होंने 2 महीने का समय बिता दिया है एक चौक पर बच्चों को शिक्षा देने में। इन बच्चों में वे बच्चे भी शामिल हैं, जिन्होंने कभी पेंसिल पकड़ी ही नहीं है।
सुखवाल सिंह सिद्धू अपने इंटरव्यू में बताते हैं कि यह बच्चे उसी फुटपाथ पर रहते हैं और कुछ बच्चे भीख मांगते हैं तो कुछ छोटा मोटा सामान बेचकर पैसा इकट्ठा करते हैं उन्हें उन बच्चों में हमारे देश का भविष्य दिखता है इसलिए वे उन बच्चों के भविष्य को संवारने में लगे हुए हैं।
शिक्षा प्राप्त करना हर बच्चे का स्वतंत्र अधिकार है
सुखपाल सिंह सिद्धू पंजाब राज्य के भटिंडा शहर के इलाके के निवासी हैं और वह एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के शिक्षक भी हैं उनकी उम्र करीब 40 वर्ष है। उनका कहना है कि स्वतंत्रता के अधिकार में शिक्षा का अधिकार भी हर बच्चा का एक अधिकार है वे शिक्षा को व्यक्ति की सफलता और समाज निर्माण की कुंजी मानते है।
वे फुटपाथ में पढ़ने वाले बच्चों के साथ-साथ अपने स्कूल के बच्चों को भी सर्व सुविधा युक्त रखते हैं जिसमें उन्हें कोई दिक्कत परेशानी ना हो। सुखपाल कहने को तो एक सरकारी शिक्षक हैं, परंतु उन्होंने अपने स्टाफ के साथ मिलकर उस सरकारी स्कूल को किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं रखा।
वे सरकार की मदद मिलने या ना मिलने पर कभी अपने फर्ज से पीछे नहीं हटते बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी होती है। इसके साथ ही उनके अंदर एक गिल्ट भी है कि वह उन बच्चों को शिक्षित नहीं कर पा रहे जो सड़कों पर दर-दर की ठोकरें खाते हैं। इस पर भी बे बहुत जल्द काम शुरू करेंगे और अपना सपना पूरा करेंगे।
5 बच्चों को लेकर किया शुभारंभ
सुखपाल सिंह सिद्धू ने फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों को शिक्षित करने का सपना देख रखा है और वह सपना तब पूरा कर पाएंगे जब उनके जिले के डीआईओ इसकी परमिशन देंगे। उन्होंने इस मुद्दे को डीआईओ के सामने रखा और बोला कि वे उन बच्चों को केवल 1 घंटे पढ़ाना चाहते हैं।
सुखपाल बताते हैं कि उनकी पत्नी बहुत पहले से कुछ ऐसा काम करने का सोच रही थी जैसे ही डीईओ की परमिशन मिली उन्होंने क्षण भर का समय भी नहीं लगाया और जुलाई 2022 से सड़क के किनारे ही उन बच्चों का स्कूल खोल लिया।
पंजाब के भटिंडा में सुखपाल अपनी नौकरी के बाद भीख मांगने वाले गरीब बच्चो को पढ़ाते हुए pic.twitter.com/48epuBB0Ui
— sanatanpath (@sanatanpath) September 19, 2022
वे बताते हैं कि प्रारंभ में उन्होंने केवल 5 बच्चों को शिक्षा देना शुरू किया था और 2 महीनों में ही वह 22 बच्चे हो गए उन्हें इस बात का बेहद दुख हुआ कि उन बच्चों में कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो पेन और पेंसिल का नाम तक नहीं जानते परंतु उन्हें इस बात की खुशी भी है कि वे बच्चे शिक्षा के प्रति काफी उत्साहित हैं।
बिना शर्म के फुटपाथ पर लेते हैं क्लास सुखपाल सर
उन्होंने यह भी बताया कि इन बच्चों के माता-पिता नहीं चाहते कि यह शिक्षा प्राप्त करें वह बच्चों को भीख मांगने के लिए ही कहते हैं, परंतु सुखपाल सिंह ने इन बच्चों के लिए काफी मेहनत की और उन्हें पढ़ाई के मायने समझाएं तब जाकर बच्चे यहां पर अपने माता पिता से छुपकर पढ़ने आते हैं।
सुखपाल सिंह सिद्धू प्रतिदिन अपनी पत्नी के साथ इन बच्चों को शिक्षा देने आते हैं और उनके स्टेशनरी से लेकर हर चीज के बंदोबस्त भी खुद करते हैं सुखपाल सिंह सिद्धू की पत्नी कहती हैं कि इन बच्चों को हर खुशियां देने की कोशिश करती हैं जिससे वे इस समाज से जोड़ सकें और खुद को इसका हिस्सा समझे।
उन्होंने सभी फैमिली को कहा है कि वे समाज के इन बच्चों की जितनी हो सके उतनी मदद करें और उन्हें खुशियां दे। सुखपाल सिंह सिद्धू ने इन बच्चों का उज्जवल भविष्य बनाना ही अपना लक्ष्य निर्धारित किया है।



