
Darbhanga: हमने अक्सर ही फिल्मों, टीवी सीरियल, घर परिवार की कहानियों में सास और बहू के संबंध को बहुत ही अलग तरीके से देखा है। अक्सर ही यह दोनों एक दुसरे को ताना मारते हुये दिखाई जाती है। टीवी सीरियल्स में वह एक दुसरे की हमेशा ही बुराई बताते हुये दिखाई देती है।
असल जिंदगी में यह जोड़ी एक दूसरे कि पूरक मानी जाती है। एक सास बहू के लिये मॉं होती है और बहू सास के लिए बेटी समान। आज हम आपकों सास-बहू कि एक ऐसी जोड़ी के बारे में जानकारी देने वाले है। जिसे आदर्श जोड़ी कहा जा रहा है।
इस जोड़ी ने साथ में मिलकर एक स्टार्टअप (Startup) प्रारंभ किया है। इस स्टार्टअप ने इनकी जिंदगी ही पलट दी। यह जोड़ी सक्सेसफुल जोड़ी में शुमार हो गई और समाज में दूसरी सास बहू के लिए प्रेरणा बनकर उभरी। आइये जानते है सास बहू कि इस अनोखी जोड़ी के विषय में।
सास-बहू ने शुरू किया स्टार्टअप
हमने अक्सर ही बिजनेस में भाई-बहन कि जोड़ी, पिता-बेटी कि जोड़ी, भाई-भाई कि जोड़ी इत्यादि के बारे में हमेशा ही सुना है। लेकिन कभी यह नहीं सुना कि सास-बहू कि किसी जोड़ी ने नया स्टार्टअप शुरू किया हो। लेकिन आज हम एक ऐसी सास बहू के बारे में बताएंगे जो कि एक मिसाल बनकर उभरी है। आज कि कहानी कुछ ऐसी है कि आपने कभी अपने जीवन में नहीं सुनी होगी।
रंग-बिरंगी पेंटिंग्स ने दी सफलता
आज कि कहानी बिहार (Bihar) राज्य के दरभंगा (Darbhanga) में रहने वाली रूचि झा (Ruchi Jha) और उनकी सास रेणुका कुमारी (Renuka Kumari) कि है। जिन्होंने साथ में मिलकर एक ऐसा स्टार्टअप शुरू किया कि सफलता हासिल करने में कामयाब हो गये। रूचि झा एक सफल इन्वेस्टमेंट बैंकर रह चुकी है।
जब वह एक बार अपने गाँव गई, तो उन्होंने कई लोगों को बिहार कि प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग्स को बनाते हुये देखा। जिसे देखकर उनका मन आकर्षित हो गया। इसे देखकर उनके मन में एक विचार आया, जिसने उनके और उनकी सास के जीवन को पूरी तरह बदल दिया।
गाँव की इस धरोहर इस अनमोल कलाकृति को रूचि ने बिहार के अलावा देश और विदेश के दूसरे जगह पहुंचाने का मन बना लिया। रूचि कि सास (Mother In Law) रेणुका भी इस कला को काफी पसंद किया करती थी। रेणुका वनस्पति विज्ञान कि पहले प्रोफेसर रह चुकी थी। उनका भी इस पेंटिंग में बहुत इंटरेस्ट था।
वह इस पेंटिंग कि बहुत ही बारिकियों को भी जानती थी। जब दोनों सास बहू का इंटरेस्ट एक हुआ, तो दोनों ने साथ में मिलकर नया स्टार्टअप प्रारंभ करने का सोचा। इस कार्य के लिए रूचि जी ने अपनी नौकरी तक छोड़ दी।
आई-मिथिला हैंडिक्राफ्ट्स को किया शुरू
रुचि (Ruchi) एक एक्सपीरिंसड और प्रोफेशनल नॉलेज रखने वाली लड़की थी। ऐसे में उन्होने अपने इस एक्सपीरियंस और शिक्षा का यूज किया और बाजार में नये स्टार्टअप से संबंधित जानकारी को जुटाना शुरू कर दिया।
इसके बाद रूचि और उनकी सास ने मिलकर 2016 में आई मिथिला हैंडीक्राफ्ट्स तथा हैंडलूम (IMithila Handicrafts and Handloom) के नाम से एक प्राइवेट लिमिटेड को स्थापित कर लिया। इसकी स्थापना का उनका उद्देश्य सिर्फ मिथिला कला को बस आगे लाना नहीं था। बल्कि वह दूसरी अन्य कलाओं को भी वह पहचान दिलाना चाहती थी।
प्रारंभ में परेशानी का सामना किया
रुचि झा कहती है कि हर कार्य के शुरूआत में हमेशा ही धमाकेदार ऑपनिंग नहीं होती। जब उन्होंने इसकी शुरूआत कि तो उनसे ज्यादा कस्टमर नहीं जुड़े थे। वही गॉंव के अन्य लोगों को भी इसके विषय मे आसानी से समझा नहीं पा रहे थे। अधिकतर लोग शुरूआत में इसे मैथिलि कला ही कहते थे। लेकिन बाद में धीरे धीरे उनसे लोग जुड़ने लगे।

रूचि ने वेबसाईट बनाकर भी अपने काम को आगे बढ़ाने की शुरूआत की। उन्होंने ना केवल पेंटिंग को आगे बढ़ाया, बल्कि मधुबनी से जडित दूसरे समानों को भी बेचना शुरू किया। जैसे साड़ियाँ, सजावटी सामान, कुर्ते इत्यादि। इन सब पर उन्होंने मधुबनी कला को उकेरा और उन्हें बेचना प्रारंभ कर दिया।
इस तरह संभलता है, काम
आई-मिथिला का स्टार्टअप तो शुरू अच्छे से हो गया। लोगों ने भी इससे जुड़ना शुरू कर दिया और इसे हर जगह पहचान मिलने लगी। अगर इसके मेनेजमेंट कि बात की जाये तो आपको बता दे इस स्टार्टअप का सारा काम बहू रुचि और सास रेणुका दोनों देखती है।
बहु रूचि राज्य दिल्ली में रहती है और वही से मार्केटिंग का काम करती है। वही रहकर वह देश-विदेश में भी सबको इस कला के विषय में जानकारी देती है। सोशल मीडिया के जरिये भी वह अपना व्यापार आगे बढ़ाती है।

वही बात कि जाये सास रेणुका दरभंगा कि तो वह बिहार बिहार में ही रहकर कलाकारों को सारे काम के विषय में समझाती है और सभी लोगों से कोऑर्डिनेट भी करती हैं। यह दोनों सास बहू कि जोड़ी साथ में घर ओर फैशन में नई नई वस्तुओ को बनाने का प्लानिंग करती है। फिर बाद में उसे एक्सक्यूट करती है।
सरकार ने भी इस स्टार्टअप को मदद दी
इस काम के जरिये कई लोगों को नया रोजगार प्राप्त हुआ। पहले जो उन्हें पहचान नहीं मिल पा रही थी। वही आज लोगों को पहचान मिलने के साथ साथ पैसा भी उन्हें अपनी कला के लिये मिल रहा है।
Utilising the traditional skills of artisans by finding a wider market for handloom and handicrafts. Mithila painting should be popularized & marketed to unknown territories. So, Investment is required in this area. #InvestInMithila pic.twitter.com/IuLWscKSj3
— Durganath Jha (@durganath_jha) May 31, 2020
सास बहू के इस स्टार्टअप से लगभग 100 परिवारों को मुनाफा मिला। इस स्टार्टअप ने इतनी सफलता पाई कि इस कार्य की भनक सरकार को लग गई। सरकार ने इस सास बहू कि जोड़ी कि जमकर सराहना की। सरकार के वेंचर ने उनकी मदद भी की है।
कार्य के लिए मिल चुके बहुत से अवॉर्ड
सास-बहू के द्वारा किये गये इस स्टार्टअप ने लोगों के मन में इस अनोखी जोड़ी के लिए सम्मान जगा दिया। उनका कार्य सराहना के लायक भी है। उनकी जोड़ी महिलाओं को प्रेरित करने के लिए पर्याप्त भी है। उनके स्टार्टअप के लिए वह कई अवॉर्ड भी प्राप्त कर चुकी है।
इन अवॉर्ड में सुपर स्टार्टअप जैसे अवॉर्ड भी एड है। सास बहू कि इस जोड़ी को बहुत से कार्यक्रमों में चीफ गेस्ट बनाकर भी इनवाइट किया जाता है। इन्हें स्कूल तथा कॉलेज में भी सभी बच्चों को प्रेरणा देने के लिए बुलाया जाता है।



