
Photo Credits: News18 Hindi
बच्चे का पहला सीखने का स्थान उसका विद्यालय होता है। उस वक़्त बच्चा किताबी ज्ञान के साथ व्यवहार में उपयोग होने वाला ज्ञान भी लेता है जो उसके जीवन में काफी उपयोगी साबित होता है। वक़्त बीतता है और बच्चे छोटे से बड़े होते है और साथ ही जिम्मेदार भी।
कहते है समय एक बार निकालने के बाद वापस नहीं आता ऐसा ही बचपन है, जब बचपन निकल जाता है, तो उसकी केवल यादें रह जाती है। और सबसे ज्यादा यादें उस स्कूल से होती है जहाँ पूरा बचपन बिताया होता है वहां के टीचर और वेफ़िक्री वाले दिन हमेसा याद आते है।
वर्तमान समय में लोग अपने जीवन में इतने उलझे हुए है कि उन्हें खाने पीने का भी समय नहीं होता पहले जिस उम्र में बच्चे बिना चिंता के खेला कूदा करते थे, आज उस उम्र में बच्चे अपने भविष्य की तैयारी करते है। यही है समय का बदलाव।
स्कूल के सुहानी यादें
स्कूल में बिताया समय हर किसी के जीवन में सबसे खास समय होता है। बचपन में और नादानी में ना जाने हम कोन कोन से नासमझी के काम कर जाते हैं, जिसका हमें खुद पता नहीं होता। स्कूल में दोस्त और टीचर सबसे खास होते है।
वही शिक्षकों से डरते है और दूसरी तरफ दोस्तों के साथ मस्ती करना वो भी क्या दिन होते है। कुछ बच्चो को विषय से डर लगता है कोई मैथ से डरता है तो कोई विज्ञानं से। कोई अंग्रेजो की तरह फर्राटेदार अंग्रेजी सीखना चाहता है, तो कोई दुनिया के नक़्शे को विस्तार से जानना चाहता है।
कही कही माता पिता अपने बच्चे को पढाई में होशेयर बनाने के लिये एक अलग से ट्यूशन लगा देते। ये सभी यादें होती है, जो बड़े होने के बाद अक्सर हमें याद आती है। आज हम इस पोस्ट के माध्यम से एक ऐसे टीचर की बात करेंगे, जिसने अपना गुरुधर्म काफी अच्छी तरह निभाया और विद्यार्थियो के सामने अपनी अच्छी छवि बनाई और जब वे शिक्षक रिटायर हुए तो उन्हें काफी अच्छी तरह विदाई दी गई। तो आइये जानते है कि कोन है वो टीचर।
टीचर को दी यादगार बिदाई
शिक्षक, गुरु ऐसे कई नामो से बुलाया जाता है, शिक्षक एक ऐसी सख्सियत का नाम है, जो किसी भगवान से कम नहीं। शिक्षक वो शख्स होता है जो बच्चों को हाथ पकड़ कर जीवन के अँधेरे रास्ते से उजाले में लाता है।
हर किसी के जीवन में कोई न कोई शिक्षक उनका आदर्श होते है, जो बच्चों को उनके भविष्य की उचाईयां दिखाने ने मदद करते है। जो बच्चे दिन रात एक करके अपना भविष्य बनाते है, उनके सफल भविष्य के पीछे भी उनके गुरु की मेहनत होती है। वर्तमान समय में बहुत से टीचर बच्चों की शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं होते वे सिर्फ फॉर्मेलिटी करते है और अपनी नोकारी का समय काटते है।
मध्यप्रदेश के शिक्षक
मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) यानि ह्रदय प्रदेश के छिंदवाड़ा (Chhindwara) जिले के एक टीचर जिनका नाम चंद्र प्रकाश त्रिपाठी (Chandra Prakash Tripathi) है। आज उन्होंने अपने व्यवहार से अपनी छाप बनाई है। उन्होंने अपने नरम स्वाभाव के कारण बच्चों के दिल में जगह बनाई है। कहने को तो त्रिपाठी जी भी एक सरकारी शिक्षक (Government Teacher) थे, परंतु उन्होंने अपने शिक्षक होने का दायित्व बड़े ही प्यार से निभाया उन्होंने कई बच्चों के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए दिन रात एक कर दिया।
आपको बता दें चंद्र प्रकाश त्रिपाठी जी छिंदवाड़ा जिले के एक गांव के कन्या शासकीय शाला के शिक्षक है। इन्होंने अपने स्कूल की बालिकाओं को काफी अच्छे से पढ़ाया है, इसलिए जब वे सेवानिवृत (Retire) हुए तो सभी बच्चों ने मिल कर उनके फेयरवेल को बेहद खास बना दिया।
विद्यार्थियों के साथ शिक्षक भी हुए भावुक
बहुत ही कम ऐसा समय आता है, जब किसी टीचर की विदाई (Retirement Farewell) में विद्यालय के विद्यार्थी भी शामिल हो और उन्हें विदाई दे। ऐसे तो कई मामले देखे है, परंतु इस विदाई में सब कुछ बहुत खास था।
आपको बता दें कि हर वर्ष सभी डिपार्टमेंट से किसी न किसी के रिटायमेंट का समय होता ही है, ऐसे ही छिंदवाड़ा जिले के एक गांव के स्कूल के टीचर का भी रिटायरमेंट का समय आया। इस अंतिम दिन में बच्चो ने अपने शिक्षक को ढेर सारी यादो के साथ विदाई देने का विचार बनाया।
स्कूल की छात्राओं ने अपने सर के लिए ढेर सारी तैयारियां की। चंद्र प्रकाश त्रिपाठी को घोड़े पर बैठा कर पूरे गांव में बेंड बाजो के साथ घुमाया। कहने को तो टीचर बच्चो के लिये एक डर का पात्र होते है परंतु बहुत कम ऐसे टीचर है, जो बच्चो के साथ घुल मिल कर रहते है।



