
Chikhli: कहते है जब बच्चा पैदा होता है तो मुठ्ठी बांध कर पैदा होता क्योंकि ईश्वर उसे उसके हाथ में उसकी किस्मत लिख कर देता है। हर बच्चे के माता पिता चाहते है की उनका बच्चा अच्छे से पढ़े लिखे और खूब कामयाब बने। परंतु कभी कभी बच्चे सोच नही पाते की उन्हे किस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना है।
कुछ लोग नोकरी या व्यापार के माध्यम से समाज सेवा करना चाहते है। इसलिए वे अपनी नोकरी को छोड़ कर कुछ ऐसा करते है की उनके साथ देश के अन्य युवाओं का भी भला हो सके। भारत में रोजगार के लिए कई युवा भटक रहे है, परंतु उन्हें नोकरी नहीं मिल पा रही।
कुछ क्षेत्रों में तो लोगो ने पलायन भी करना प्रारंभ कर दिया है। अब देश के युवा जो विदेशों में नोकरी कर रहे है, वे भारत आकर गांव के युवाओं को रोजगार मोहिया करा रहे है। आज हम बात करेंगे एक ऐसे युवा की जिसने अपने 10 लाख रुपया की नोकरी छोड़ी और स्वदेश लौटे। हम बात कर रहे है।
डॉ. अभिषेक भराड (Dr Abhishek Bharad) की जो महाराष्ट्र (Maharashtra) के चिखली (Chikhli) तहसील के अंतर्गत आने वाले साखरखेर्दा गाँव के निवासी है। इनके पिता भागवत भराड पेशे से सिंचाई विभाग में इंजीनियर हैं। अभिषेक के पिता ने अभिषेक को अच्छी तरह पढ़-लिख कर कामयाब इंसान बनते देखना चाहते थे।वे भी पढाई में काफी अच्छे थे।
एक गांव का लड़का विदेश में बन साइंटिस्ट
वर्ष 2008 में अभिषेक ने बीएससी की डिग्री हासिल कर विदेश जाकर अपना एजुकेशन पूरा करने का फैसला किया। फिर उन्होंने अमेरिका (America) के लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की पढ़ाई की साथ ही अपनी पीएचडी भी कर ली।
पीएचडी करने के बाद अभिषेक को वर्ष 2013 में लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी में ही साइंटिस्ट की जॉब मिल गई। 2 वर्षो तक अभिषेक काम करते रहे और काफी सारे साइंस से संबंधित रिसर्च भी करते रहे। अभिषेक को साइंटेस्ट की जॉब में 10 लाख रुपया सैलेरी दी जाती थी।
सब कुछ अच्छा चल रहा था, परंतु अभिषेक का मन जॉब में नहीं लगता था। वे अक्सर अपने घर परिवार और अपने देश को काफी ज्यादा मिस करते थे। वे अपने देश के लिए कुछ करना चाहते थे। जिससे वे अपने साथ और भी लोगो को रोजगार दे सके। उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दिया और वे भारत लौट आए।
अपने गांव लौट एक ऐसा काम शुरू किया जिससे कई लोग को रोजगार मिला
यूनिवर्सिटी की तरफ से अभिषेक को 10 लाख रुपया की सैलरी दी जा रही थी। आरामदायक नोकरी होने के बाद भी अभिषेक अपने आप से खुश नहीं थे। वे अपने घर अपने परिवार में लौटना चाहते थे और अपने देश और देश के युवाओं के लिए कुछ करना चाहते थे। जो अपने साथ दूसरो के लिए भी अच्छा साबित हो।
विचार कर अभिषेक अपनी नौकरी से इस्तीफा देकर अपने देश और गाँव वापसी की। अभिषेक कहते है की काफी सोंच विचार कर उन्होंने गोट फार्मिंग करने का निश्चय किया। उन्होंने प्लान बना कर 20 एकड़ की जमीन भाड़े पर ली। साथ ही बकरियों के रहने के लिए गोट शेड भी भाड़े पर ली।
गोट फार्मिंग का व्यापार प्रारंभ किया
व्यापार को प्रारंभ करने के लिए उन्होंने 12 लाख की लागत लगाई। जिसमे उन्होंने सबसे पहले 120 बकरियाँ खरीदी और उनका पालन प्रारंभ किया। वे बकरियों के लिए खुद से उगा कर पोष्टिक आहार खोलते है, उन्हे बाजार का खाना नही दिया जाता।
बकरियो के लिए आहार उगाने के लिए उन्होंने 6 एकड़ की उपजाऊ जमीन पर मक्का, बाजरा आदि अनाज की फसल उगाई। इन फसलों का उपयोग उन्होंने बकरियों के आहार के लिए किया। पोष्टिक आहार से बकरिया एक दम हष्ट पुष्ट हो गई है।
एक वर्ष के भीतर अभिषेक के फार्म में दो गुनी बकरिया (Goats) हो गई है। वर्तमान समय में उनके पास करीब 8 नस्लों की बकरिया है जैसे अफ़्रीकी बोर, बेतट, सिरोह, जमुनापरी आदि नस्ल शामिल हैं। उनकी एक बकरी की कीमत 10 हजार रूपए से ज्यादा है।
नौकरी के साथ ट्रेनिंग भी देते है अभिषेक
अभिषेक के इस कार्य में आस पास के कई क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार मिला है। अभिषेक के द्वारा पारंपरिक व्यापार को आधुनिक ढंग से कर कई लोगो को एक मिशाल दी है। वे कई लोगो को अपने कार्य की प्रणाली बदलने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं और उन्हें वो तरीका भी सीखा रहे हैं। वे किसानों का एक ग्रुप बना कर किसानों को फ्री में गोट फार्मिंग स्किल ट्रैनिंग (Goat Farming Skill Training) दे रहे है।



