
Delhi: चीन विश्व का सबसे शक्तिशाली देश में से एक है। यह तकनीकी ज्ञान में सबसे आगे है। इसी के चलते चीन ने पूरे विश्व को एक अजीबो गरीब बीमारी का शिकार बना दिया। जिससे देश में जन धन की काफी ज्यादा हानि हुई। चीन अपने सस्ते उत्पाद के कारण पूरे देशों के बाजार में अपने उत्पाद फेला रखा है। जिससे स्थानीय व्यापारी और स्वदेशी कारीगरों को काफी ज्यादा हानि हुई।
देश की सभ्यता प्रतिको और खेलौनो को जैसे लोग भूल गए। परंतु देश में वोकल फॉर लोकल (Vocal For Local) के नारे ने एक नई क्रांति लाई है। जब से देश में आपदा की दस्तक हुई और इसके पीछे चीन की साजिश का खुलासा हुआ, तब से चीन की हर चीजों को देश के बाहर निकाल फेका और स्वदेशी उत्पाद को अपनाने के लिए मेक इन इंडिया (Make In India) योजना चलाई जो देश हित में है।
पिछले तीन सालो में जो खोया है उसकी भरपाई तो मुश्किल है, परंतु देश में कई सुधार हुए जैसे स्वदेशी उत्पाद को बढ़ावा मिला जो देश का पैसा है वो देश में रहेगा। लोगो को रोजगार मिला, जिससे लोगो में असुरक्षा का भय नहीं होगा। लोग आत्मनिर्भर बन रहे है। अब वो दिन दूर नही जब हमारा देश एक विकसित देश बन जाएगा।
देश में चीनी खिलौनो का विरोध
चीन हमेशा से एक चालक देश रहा है इसके विदेशी बाजारों में अपने सस्ते उत्पाद स्वदेशी उत्पाद को हटा कर रखने के कई मामले सामने आए है इसके साथ ही इस देश पर कई आरोप लगे हुए है। यह डेटा चोरी में माहिर है। चीन की इन बेकार सी हरकतों का पूरी दुनिया ने विरोध किया है।
भारत में चीन के सस्ते सामानों (Chinese Products) का हमेशा से बहिष्कार हुआ है। अपने से चार गुनी मेहनत करके सैन्य प्रतिक्रिया से भारत चीन को हमारे देश की अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र से बायकाट कर रहा है। चीन के खिलाफ की गई कार्रवाइयां, हमारे देश के निर्माताओं को मजबूत बना रहा है, सरकार के दबाव का परिणाम अब देखने मिल रहा है।
सरकार के हस्तक्षेप से व्यापारियों को लाभ हुआ
अगस्त 2020 के कार्यक्रम “मन की बात” के अंतर्गत प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में “भारतीय टॉय स्टोरी की रीब्रांडिंग” के लिए अपनी बात रखी। प्रधान मंत्री कहते है की बच्चों के लिए सुरक्षित और सीखने के उद्देश्य से बनाए गए खिलौनों का उपयोग करना है। जो भारतीय मूल्य प्रणाली, इतिहास और देश की संस्कृति और सभ्यता को रिप्रेजेंट करे। जिससे भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाया जा सके।
अग्रवाल के द्वारा बताया गया कि सरकार के कई हस्तक्षेपों से उद्योग क्षेत्र को कई प्रकार के लाभ हुए है।जो मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम की कामयाबी को प्रदर्शित करते है। वे कहते है की स्वदेशी खेलोनो की विक्री कुछ ही उत्पादों तक सीमित थी।
Noida is all set to emerge as the the manufacturing hub of toys in India with enough potential to challenge booming Chinese toy industry..
134 companies acquire land in Noida Toy Park, to invest 410.13 Cr. Factories to provide employment to 6157 people.. pic.twitter.com/JcmAZOpi6u
— Rajender Singh 🇮🇳🇮🇳 (@rs_rajender) August 8, 2021
भारतीय बाजार में चीनी खिलौनों (Chinese Toys) का पूर्णरूप से बहिष्कार करने और उन पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरकार ने खिलौने पर-एचएस कोड 9503 जारी किया और कस्टम ड्यूटी फरवरी 2020 में 20 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी कर दिया।
क्यूसीओ के नियमो में हुआ परिवर्तन
सरकार के द्वारा खिलौनों का परीक्षण और उसकी गुणवत्ता की जांच कर सरकार ने इंडियन टॉय मार्केट का मानवीकरण कराया। साथ ही सस्ते और चीनी खिलौनो को भारतीय बाजार से बाहर निकालने के लिए कहा।
What a turnaround!
Our toy imports shrink by a massive 70% and exports shoot up by 61% in the last 3 years.
PM @NarendraModi ji's clarion call of 'Vocal For Local' is transforming India's toy sector.
📖https://t.co/PgxjC4LfNi pic.twitter.com/8woOEcOG5X
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) July 6, 2022
इसके बाद स्वदेशी खिलौना बनाने वाले कारीगरों और छोटे खिलौना निर्मातायों के लिए क्यूसीओ के नियमों में परिवर्तन किया गया। स्वदेशी अपनाओ के नारे के साथ बीआईएस के द्वारा खिलौनों की सुरक्षा और घरेलू निर्माताओं को बढ़ावा देने के लिए 843 लाइसेंस जारी किए। और विदेशी खिलौना निर्माताओ को 6 लाइसेंस दिए।
मेक इन इंडिया की सफलता चीन को पहला जबाब
मेक-इन-इंडिया योजना के तहत खिलौना उद्योग में मिली इस सफलता से पेपर ड्रैगन, चीन को एक बहुत बड़ा झटका दिया। मेक इन इंडिया की इस सफलता के बाद देश के और भी उद्योग क्षेत्रों में इस अर्थव्यवस्था को जल्द ही दोहराने की तैयारी चल रही है और चीन जो पहले ही आर्थिक पीड़ा को झेल रहा है, उसे एक बार फिर अपने कर्मो की कीमत चुकानी पड़ेगी।



