दावा: किसी विदेशी नहीं, बल्कि भारतियों ने पहले गुरुत्वाकर्षण बल और पाइथागोरस प्रमेय की खोज की

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Pythagoras theorem is Vedic
A Karnataka education policy panel's position paper has claimed that the Pythagoras theorem has Indian Vedic roots.

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Bengaluru: हमारे स्‍कूल की किताबों में किसी विषय के बारे में जितना लिखा होता है। अक्‍सर हम उसे ही सच समझते है। चाहे इतिहास की बात हो या फिर विज्ञान की। किताबों में हमारी संस्‍कृति तथा हमारी सभ्‍यता से जुड़ी हुई बहुत सी बातों का उल्‍लेख नहीं है। जिस वजह से हम इनके विषय में अधिक जानने से वंछित रह गये है।

हमने स्‍कूली जीवन से ही गुरूत्‍वाकर्षण बल और गणित में पाइथागोरस प्रमेय (Pythagoras Theorem) इन सभी के विषय में ज्ञान प्राप्‍त किया है। अधिकतर हमने देखा है कि इन सभी खोजों के लिए विदेशी साइंटिस्‍ट को ही सारा श्रेय दिया जाता है।

लेकिन कभी कभी जैसा हमें किताबो में दिखाई देता है वैसा वास्‍तव में नहीं होता। कभी कभी हमें इन खोजों के पीछे की सच्‍चाई पता नहीं लग पाती है। हमने कई बार सुना है कि बहुत से वैज्ञानिकों ने किसी दूसरे साइंटिस्‍ट की खोज को चुरा कर अपना नाम फैमस करवा लिया जैसे डीएनए की खोज, इमेल की खोज इत्‍यादि।

पाइथागोरस और गुरूत्‍वाकर्षण भारतीय संस्‍कृति की देन

इसी में आज हम आपको गुरूत्‍वाकर्षण और पाइथागोरस (Gravity And Pythagoras) के विषय में भी सच्‍चाई बताने जा रहे है। हम जो खबर आपको बताने जा रहे है, उसे जानने के बाद आप अचंभित हो जायेंगे। शुरू से हमें गुरूत्‍वाकर्षण बल तथा पाइथागोरस प्रमेय के विषय में जो जानकारी बताई गई वह दरअसल गलत है।

अक्‍सर देखा जाता है कि किताबों में विदेशाी वैज्ञानिकों का ही अव्‍व्‍ल स्‍थान रहता है। जिसे पढ़कर हम बिदेशी साइंटिस्‍टों को महान समझने लगते है। हमें लगता है कि विदेशी हमसे हर चीज में बहुत आगे है। लेकिन जानकारी के मुताबिक ऐसा कुछ भी नहीं है।

वैदिक गणित से जुडी है खोज

आपको बता दे कि पाइथागोरस प्रमेय तथा गुरूत्‍वाकर्षण बल का बेस बैदिक गणित से जुड़ा हुआ है। इस बात को कर्नाटक राज्‍य की एक रिपोर्ट के द्वारा पुष्‍ट कर दिया गया है। हमें किताबों के माध्‍यम से हमेशा ही पढ़ाया गया है कि गुरूत्‍वाकर्षण की खोज विदेशी वैज्ञानिक न्‍यूटन (Isaac Newton) ने की है।

इसकी खोज उन्‍होंने 1666 में की। न्‍यूटन जी के सिर पर जब सेब गिरा, तो उन्‍होंने इसकी खोज की। लेकिन नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए जो कर्नाटक करिकुलम फ्रेकमवर्क बनाया गया है। उसके टास्‍क फोर्स ने किताब की इस थ्‍योरी को पूरी तरह से फर्जी बता दिया है।

आज तक किताबों में दी गई गलत जानकारी

जी हॉं आपने सही पढ़ा दरअसल इस टास्‍क फोर्स में अध्‍यक्ष पद पर कार्यरत मदन गोपाल जी कहते है कि गुरूत्‍वाकर्षण की न्‍युटन के द्वारा खोज और गणित में पाइथागोरस प्रमेय के विषय में बच्‍चों को गलत बताया और पढ़ाया जा रहा है।

आपको बता दे कि टास्‍क पेनल के अध्‍यक्ष श्री मदन गोपाल जी स्‍कूली सिलेबस में नई राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कई प्रस्‍ताव रख् चुके है। उनका कहना है कि छात्रों को झूठी जानकारी के विषय में प्रश्‍न करने को प्रेरित करना चाहिए। इन प्रश्‍नों में पाइथागोरस प्रमेय तथा न्‍यूटन के सर में सेब गिरने गुरूत्‍वाकर्षण की खोज जैसी फर्जी जानकारी किस तरह प्रचलित में आई शामिल होना चाहिए।

ऋषि बोधायन ने दिया पाइथागोरस प्रमेय

मदन गोपाल जी का कहना है, कि गरूत्‍वाकर्षण और पाइथागोरस का संबंध वैदिक गणित से है और यह भारतीय दृष्टिकोण है। भारत के सबसे प्राचीन गणितज्ञ की बात कि जाये तो ऋषि बौधायन ने अपने ग्रंथो में पाइथागोरस प्रमेय के विषय में लिखा था। हालांकि यह भी हो सकता है कि मदन गोपाल के इस दृष्टिकोण से कुछ लोग सहमत ना हो। लेकिन उनका यह तर्क बहुत ही विचारणीय है।

भले ही आज तक हमने पढ़ा हो कि पाइथागोरस के प्रमेय को पाइथागोरस नाम के किसी गणितज्ञ ने दिया था। लेकिन यह हकीकत नहीं है। वास्‍तव में पाइथागोरस प्रमेय को ऋषि बोधायन ने दिया था। इस प्रमेय की रचना 250 साल पहले बौधायन जी ने की थी।

शुल्‍ब सूत्र के 12 श्‍लोक में है पाइथागोरस का वर्णन

ऋषि बोधायन जी ने अपनी बुक शुल्‍ब सूत्र के अंतर्गत विभिन्‍न प्रकार के फॉमूलों और मापों को दिया है। उन्‍हीं की बुक शुल्‍ब सूत्र के चेप्‍टर 1 में एक श्‍लोक है। जिसका नंबर 12 है। उसमें ही पाइथागोरस के अर्थ के विषय में बताया गया है।

इसी के विषय में 2015 में केंद्रीय प्राद्योगिकी तथा विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन जी ने मुंबई विश्‍वविद्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से जिक्र किया था। उन्‍होंने प्रधानमंत्री से कहा था कि हमारे देश के वैज्ञानिक के द्वारा पाइथागोरस की खोज हुई। लेकिन इसका पूरा श्रेय यूनान को दिया जाता है।

भास्‍कराचार्य ने दिया गुरूत्‍वाकर्षण नियम

पाइथागोरस की ही तरह गुरूत्‍वाकर्षण के नियम पर भी इसी प्रकार का दावा किया जा रहा है। दावा किया गया है कि न्‍यूटन ने गुरूत्‍वाकर्षण नियम की खोज से पहले भास्‍कराचार्य ने ग्रेविटी का नियम बता दिया था। भास्‍कराचार्य के ग्रंथ शिरोमणि में पृथ्‍वी के गुरूत्‍वाकर्षण सिद्धांत का उल्‍लेख है। जिससे इस बात का स्‍पष्‍टीकरण होता है, कि इन दोनों ही सिद्धांतों का प्रतिपादन भारतीयों के द्वारा किया गया है।

पाइथागोरस और गुरूत्‍वाकर्षण दोनों ही वैदिक गणित की वजह से आये है। लेकिन हम भारतीय आज तक इससे अनजान है। क्‍योंकि हमारी किताबों में इन बातों का आज तक जिक्र तक नहीं हुआ है। आज तक झूठा प्रसार करके हमें इन बातों से अनजान रखा गया।

अभी की बात की जाये तो विज्ञान और गणित की लगभग सभी किताबों को पश्चिमी वैज्ञानिकों द्वारा लिखा गया है। जिस वजह से इन किताबों में ग्रीक साइंटिस्‍टों का जिक्र अधिक मिलता है। लेकिन भारतीय प्राचीन साइंटिस्‍टों का जिक्र इसमें नहीं मिलता। अब वह समय आ गया है जब हम अपनी सभ्‍यता से जुडे रहस्‍यों तथा बातों को जाने और समझे।

न्‍यू एजूकेशन पॉलिसी भारतीय संस्‍कृति पर होगी आधारित

इसी बात को भारत सरकार के द्वारा भी सपोर्ट किया जा रहा है। वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी की सरकार के द्वारा नई एजूकेशन पॉलिसी जो लाई जा रही है। वह भारतीय संस्‍कृति से पूरी तरह प्रभावित होगी।

नई एजूकेशन पॉलिसी भारतीय भाषा और संस्‍कृति को बढ़ावा देगी। ऐसा हो जाने से भविष्‍य में वह समय जरूर आयेगा। जहॉं हम अपनी किताबों में भारतीय संस्‍कृति के विषय में ना सिर्फ पढ़ेंगे। साथ ही दबे रहस्‍यो को जानने के बाद अपनी संस्‍कृति पर गर्व करते हुए उस का प्रचार पसार भी करेंगे।

Note: अब गुरूत्‍वाकर्षण और पाइथागोरस प्रमेय की क्जोज किसने की? यह तो हम दावे के साथ नहीं कह सकते हैं, परन्तु हमें शुरतु से जो स्कूल में पढ़ाया गया है, अभी तो उसे ही सच मानना पड़ेगा, वर्ना परीक्षा में फ़ैल हो जायेंगे।

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